3000 से 500 हुए पेरू के पेंग्विन, अब 'सुपर अल-नीनो' से मंडरा रहा और बड़ा खतरा

पेरू के पुंटा सैन जुआन में हम्बोल्ट पेंग्विन की संख्या 3,000 से घटकर 500 से भी कम रह गई है. बर्ड फ्लू और अल-नीनो के बाद अब समुद्र के बढ़ते तापमान और संभावित सुपर अल-नीनो ने इन पक्षियों की मुश्किल और बढ़ा दी है.

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पेरू के हम्बोल्ट पेंग्विन की संख्या धीरे-धीरे कम होती जा रही है. (Photo: AFP) पेरू के हम्बोल्ट पेंग्विन की संख्या धीरे-धीरे कम होती जा रही है. (Photo: AFP)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 02 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 12:52 PM IST

पेरू के पुंटा सैन जुआन इलाके में हम्बोल्ट पेंग्विन की संख्या तेजी से कम हो रही है. यहां कभी करीब 3,000 पेंग्विन रहते थे, लेकिन 2025 तक इनकी संख्या 500 से भी कम रह गई. अब समुद्र का बढ़ता तापमान और संभावित 'सुपर अल-नीनो' इन पेंग्विन के लिए नई परेशानी बन रहा है. इससे पहले बर्ड फ्लू और अल-नीनो की वजह से भी इनकी संख्या में बड़ी गिरावट आई है.

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पुंटा सैन जुआन पेरू के दक्षिणी तट पर मौजूद करीब 133 एकड़ का समुद्री रिजर्व है. यह जगह हम्बोल्ट पेंग्विन और कई दूसरे समुद्री पक्षियों के लिए अहम है. लेकिन पिछले कुछ सालों में यहां हालात तेजी से बदले हैं. 2022 और 2023 में फैले एवियन फ्लू से बड़ी संख्या में समुद्री पक्षी प्रभावित हुए. इसके बाद अल-नीनो आया और समुद्र का पानी गर्म हो गया. इससे पेंग्विन के लिए खाना ढूंढना मुश्किल हो गया.

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समुद्र गर्म हुआ तो खाना दूर चला गया

हम्बोल्ट पेंग्विन पेरू और चिली के सूखे तटीय इलाकों में रहते हैं. इनका मुख्य खाना एंकोवी मछली है. पेरू के तट के पास हम्बोल्ट करंट नाम की ठंडी समुद्री धारा बहती है. यह पानी पोषक तत्वों से भरपूर होता है, इसलिए यहां काफी मछलियां मिलती हैं.

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अल-नीनो के समय समुद्र का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है. इसका असर समुद्र की धाराओं और मछलियों पर भी पड़ता है. एंकोवी मछलियां ज्यादा गहराई में या तट से दूर चली जाती हैं. ऐसे में पेंग्विन को खाना ढूंढने के लिए ज्यादा दूर जाना पड़ता है. खाना कम मिलने पर पेंग्विन अपने अंडों और घोंसलों को छोड़ सकते हैं. कुछ पेंग्विन दूसरे इलाकों में भी चले जाते हैं. कई बार खाना ढूंढते हुए उनकी मौत तक हो जाती है.

हजारों से सिमटकर कुछ सौ रह गए

2012 में पुंटा सैन जुआन में करीब 3,000 हम्बोल्ट पेंग्विन थे. 2025 तक यह संख्या 500 से भी कम रह गई. वैज्ञानिकों की निगरानी में यहां खाली घोंसले और अंडे भी देखे गए हैं. पूरे पेरू के तट पर भी पेंग्विन की संख्या घटी है. 2022 में अलग-अलग द्वीपों और तटीय इलाकों में करीब 15,663 हम्बोल्ट पेंग्विन गिने गए थे. 2025 में यह संख्या करीब 5,400 रह गई.

बर्ड फ्लू ने भी पहुंचाया नुकसान

पेंग्विन की संख्या कम होने की एक बड़ी वजह एवियन फ्लू भी है. 2022 और 2023 में यह बीमारी पेरू के समुद्री इलाकों में तेजी से फैली थी. इससे समुद्री पक्षियों के साथ समुद्री शेर और सील जैसे जानवर भी प्रभावित हुए. इसके बाद अल-नीनो ने पेंग्विन के खाने की समस्या बढ़ा दी. 

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इसके अलावा इंडस्ट्रियल फिशिंग यानी बड़े स्तर पर मछली पकड़ने से भी एंकोवी जैसी मछलियों पर दबाव बढ़ता है. इससे पेंग्विन के लिए खाना और कम हो सकता है. वैज्ञानिक मछली पकड़ने के कोटे को कम करने की मांग कर रहे हैं. इससे पहले 2006 में एंकोवी फिशिंग का कोटा घटाया गया था. इसके बाद पेंग्विन की संख्या को संभलने में मदद मिली थी.

पेंग्विन को बचाने के लिए चल रहा काम

पुंटा सैन जुआन में वैज्ञानिक और वॉलंटियर्स लगातार पेंग्विन की निगरानी कर रहे हैं. वे पेंग्विन की संख्या, उनके खाने और प्रजनन से जुड़ी जानकारी रिकॉर्ड करते हैं. छोटे पेंग्विन को सुरक्षित रखने के लिए आर्टिफिशियल नेस्ट भी बनाए गए हैं.

टीम फॉक्स और रैट जैसे जानवरों को भी हटाने का काम कर रही है, जो छोटे पक्षियों का शिकार करते हैं. रिमोट कैमरों से पेंग्विन के घोंसलों और उनकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है. इस डेटा को जल्दी समझने के लिए एआई टूल्स की भी मदद ली जा रही है.

वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि अगर समुद्र का तापमान सामान्य हुआ और एंकोवी मछलियां वापस आईं, तो पेंग्विन भी अपने पुराने इलाकों में लौट सकते हैं. लेकिन संभावित सुपर अल-नीनो इस पूरी कोशिश के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है.

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