यूरोप में इस साल तेज गर्मी और लंबे समय तक पड़े सूखे ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है. जून से सितंबर के बीच गेहूं, मक्का और जौ जैसी अनाज की फसलों का उत्पादन करीब 1.67 करोड़ टन कम होने का अनुमान है. नए आकलन के मुताबिक, इस नुकसान की कीमत करीब 3.2 अरब यूरो है. यानी कम फसल होने से यूरोप के किसानों को अरबों यूरो का नुकसान हुआ है.
यह नुकसान जुलाई में लगाए गए अनुमान से करीब 80 लाख टन ज्यादा है. यानी गर्मी और सूखे का असर पहले सोचे गए अनुमान से भी ज्यादा रहा. फ्रांस सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है. यहां अनाज का उत्पादन करीब 58 लाख टन कम होने का अनुमान है. इससे करीब 1.47 अरब यूरो का नुकसान हुआ है. इसके बाद हंगरी, ब्रिटेन, जर्मनी और स्पेन में भी फसलों को बड़ा नुकसान हुआ है.
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फ्रांस में सबसे ज्यादा नुकसान
आंकड़ों के मुताबिक, हंगरी में अनाज का उत्पादन करीब 31 लाख टन कम हुआ है. इससे किसानों को करीब 72.3 करोड़ यूरो का नुकसान हुआ. ब्रिटेन में करीब 30 लाख टन अनाज कम पैदा हुआ. यहां नुकसान करीब 52.7 करोड़ यूरो रहा.
जर्मनी में अनाज का उत्पादन करीब 25 लाख टन कम होने का अनुमान है. इससे करीब 39.8 करोड़ यूरो का नुकसान हुआ. वहीं स्पेन में करीब 12 लाख टन अनाज कम पैदा हुआ और नुकसान करीब 22 करोड़ यूरो रहा.इन आंकड़ों में गेहूं, मक्का और जौ जैसी बड़ी फसलें शामिल हैं. ज्यादा गर्मी और पानी की कमी की वजह से इन फसलों की पैदावार पर सीधा असर पड़ा है.
सोयाबीन, आलू और चुकंदर भी प्रभावित
गर्मी और सूखे का असर सिर्फ अनाज की फसलों पर नहीं पड़ा. सोयाबीन की पैदावार करीब 15 फीसदी कम होने का अनुमान है. आलू की पैदावार में करीब 7 फीसदी और चुकंदर में करीब 11 फीसदी की कमी का अनुमान लगाया गया है. घास भी कम उगी है. इससे पशुपालकों की परेशानी बढ़ी है, क्योंकि पशुओं के लिए चारा कम हुआ है. यानी मौसम की मार का असर खेती के साथ पशुपालन पर भी पड़ा है.
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फ्रांस के 300 हेक्टेयर के किसान सेबेस्टियन नेव्यू ने बताया कि इस साल उनके खेत की सभी फसलें प्रभावित हुई हैं. सर्दियों में बोई गई फसलों की पैदावार भी करीब 25 फीसदी कम रही. सूरजमुखी की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ. आम तौर पर इसकी पैदावार 1.5 से 2 टन प्रति हेक्टेयर रहती है, लेकिन इस साल यह घटकर सिर्फ 0.7 टन प्रति हेक्टेयर रह गई. यानी करीब 60 फीसदी की कमी आई. किसान के मुताबिक, मई से ही गर्मी की लहरें शुरू हो गई थीं. लगातार गर्मी और सूखे ने फसल की हालत खराब कर दी.
यूरोप में बढ़ रही गर्मी
कृषि विश्लेषक टॉम लैंकेस्टर के मुताबिक, इस साल यूरोप में गर्मी और सूखे का असर काफी ज्यादा रहा. उनके अनुसार, इस बार जितना अनाज उत्पादन कम हुआ है, वह इटली, बेल्जियम और नीदरलैंड के कुल अनाज उत्पादन के करीब है. उनका कहना है कि यूरोप दुनिया के औसत तापमान की तुलना में करीब दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है. अगर ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन कम नहीं किया गया, तो आगे ऐसे नुकसान और बढ़ सकते हैं.
किसानों की परेशानी सिर्फ कम फसल तक सीमित नहीं है. गर्मी और सूखे के बीच खेती का खर्च भी बढ़ रहा है. दूसरी तरफ फसलों की बाजार कीमत इतनी नहीं मिल रही कि कई किसानों के लिए पूरा खर्च निकालना आसान हो. लगातार गर्मी और कम बारिश से मिट्टी में नमी भी कम हो रही है. ऐसे में मिट्टी की सेहत सुधारने और पानी का सही इस्तेमाल करने पर ध्यान देना जरूरी बताया जा रहा है. इससे आने वाले समय में गर्मी और सूखे की वजह से फसलों को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है.
आशुतोष मिश्रा