सांसों में जहर... फिर बिगड़ रही राजधानी दिल्ली की हवा, 349 पहुंचा AQI

दिल्ली का AQI सोमवार को 349 पहुंचकर बहुत खराब श्रेणी में आ गया. दो दिन हुई बारिश की राहत अब खत्म हो चुकी है. पराली जलाने से और शांत हवा से प्रदूषण बढ़ा है. अगले दिनों स्मॉग और बढ़ने की आशंका है.

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दिल्ली-NCR की हवा बिगड़ने लगी है. पॉल्यूशन अब स्मॉग में बदल रहा है. (Photo: Getty) दिल्ली-NCR की हवा बिगड़ने लगी है. पॉल्यूशन अब स्मॉग में बदल रहा है. (Photo: Getty)

आजतक साइंस डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 02 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 12:21 PM IST

दिल्ली की हवा इस सीजन में पहली बार बहुत खराब हो गई है. सोमवार सुबह राजधानी पर घना धुंध छाया हुआ था और प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ गया. पिछले हफ्ते बारिश ने थोड़ी राहत दी थी, लेकिन अब हवा फिर से दूषित हो चुकी है. सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक सोमवार सुबह 7:05 बजे एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी AQI 349 पहुंच गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है. 

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रविवार को 24 घंटे का औसत AQI 261 (खराब) रहा था, जबकि उससे एक दिन पहले यह 117 (मध्यम) था. शुक्रवार को बारिश के बाद AQI 60 तक गिर गया था, जो चार साल में अक्टूबर का सबसे साफ दिन था. अब हालात फिर बिगड़ गए हैं.

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दिल्ली के 59 एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशनों में से 58 के आंकड़े उपलब्ध थे. इनमें से 36 स्टेशनों पर हवा ‘बहुत खराब’ श्रेणी में थी. जहांगीरपुरी एकमात्र ऐसा स्टेशन था जहां AQI 417 पहुंचकर ‘गंभीर’ श्रेणी में चला गया. पांच स्टेशनों पर हवा ‘मध्यम’ रही, बाकी जगहों पर ‘खराब’ श्रेणी दर्ज की गई. 

सुबह 6 बजे ज्यादातर स्टेशनों पर PM2.5 मुख्य प्रदूषक था. 58 में से 51 स्टेशनों पर PM2.5 और बाकी सात पर PM10 मुख्य वजह बनी. एक दिन पहले भी ज्यादातर जगहों पर PM2.5 ही प्रमुख प्रदूषक था. CPCB के मुताबिक AQI 0-50 अच्छा, 51-100 संतोषजनक, 101-200 मध्यम, 201-300 खराब, 301-400 बहुत खराब और 401-500 गंभीर माना जाता है.

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फसल जलाने का असर 

नासा के उपग्रह आंकड़ों के अनुसार 1 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच पंजाब और हरियाणा में कुल 1394 खेत की आग पकड़ी गई. इनमें पंजाब में 1249 और हरियाणा में 145 आग थीं. सिर्फ 1 नवंबर को 171 आग दर्ज हुईं. पिछले साल इसी अवधि में 1861 आग पकड़ी गई थीं. लेकिन ये आंकड़े पूरे सच नहीं बताते क्योंकि अब ज्यादातर पराली शाम के बाद जलाई जाती है. 

2025 में लगभग 98 प्रतिशत आग दोपहर 3 बजे के बाद हुई, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 94 प्रतिशत था. उपग्रह दोपहर करीब 1:30 बजे गुजरता है, इसलिए शाम की आग अक्सर छूट जाती है. ये आग दिल्ली की हवा को प्रभावित करने वाले मुख्य बाहरी स्रोतों में से एक हैं.

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AQI बढ़ने के पीछे कई वैज्ञानिक कारण एक साथ काम कर रहे हैं. सबसे पहले स्थानीय प्रदूषण स्रोत हैं. गाड़ियों का धुआं, कारखाने, निर्माण कार्य और सड़क की धूल रोजाना प्रदूषक छोड़ते हैं. बारिश ने इन्हें धो दिया था, लेकिन बारिश रुकते ही ये स्रोत फिर सक्रिय हो गए. दूसरा बड़ा कारण पंजाब-हरियाणा से आने वाली पराली की आग का धुआं है. यह धुआं हवा के साथ दिल्ली-एनसीआर तक पहुंचता है. 

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तीसरा और बहुत महत्वपूर्ण कारण मौसम की प्रतिकूल स्थिति है. मौसम विज्ञानी नवदीप दहिया के अनुसार उत्तर-पश्चिम दिशा से हवा चल रही है और हवा की रफ्तार बहुत कम यानी शांत है. शांत हवा में प्रदूषक दूर नहीं भाग पाते और लंबे समय तक हवा में बने रहते हैं. सर्दी के मौसम में अक्सर तापमान व्युत्क्रमण यानी टेंपरेचर इनवर्जन होता है. 

इसमें जमीन के पास की हवा ठंडी रहती है और ऊपर गर्म परत बन जाती है. यह परत प्रदूषकों को ऊपर नहीं जाने देती और वे जमीन के करीब जमा हो जाते हैं. PM2.5 बहुत छोटे कण होते हैं जो फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं. ये कण गाड़ियों, जलाने की गतिविधियों और उद्योगों से निकलते हैं. जब हवा रुकी हुई हो तो ये कण आसानी से जमा हो जाते हैं और AQI तेजी से बढ़ जाता है. दिवाली नजदीक है, उस समय पटाखे और जलाने की गतिविधियां और प्रदूषण बढ़ा सकती हैं.

आने वाले दिनों का अनुमान

मौसम विशेषज्ञ नवदीप दहिया ने चेतावनी दी है कि स्मॉग का मौसम शुरू हो चुका है. दिल्ली-एनसीआर के ज्यादातर सेंसर AQI 300 से ऊपर दिखा रहे हैं और कई जगह रात में 400-500 की ओर बढ़ रहे हैं. उत्तर-पश्चिम से हवा और शांत हालत में सारे उत्सर्जन लंबे समय तक हवा में रहेंगे. 

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अगले सात से दस दिनों तक कोई अनुकूल मौसमी स्थिति नजर नहीं आ रही. यानी स्मॉग और बढ़ सकता है. दिल्ली ने इस साल आखिरी बार 11 फरवरी को ‘बहुत खराब’ हवा दर्ज की थी जब औसत AQI 305 था. उससे पहले 4 फरवरी को 339 पहुंचा था. अब नवंबर की शुरुआत में ही हालात बिगड़ना चिंता का विषय है.

सरकार एंटी-स्मॉग गन चला रही है और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय लागू कर रही है. एक दिन में ही लाखों रुपये के जुर्माने वसूल किए गए और कई गाड़ियां वापस भेजी गईं. लेकिन लंबे समय तक राहत तभी मिलेगी जब खेत की आग कम हो, गाड़ियों का उत्सर्जन घटे और मौसम सहयोग करे. आम लोगों को सुबह-शाम बाहर कम निकलना चाहिए, मास्क पहनना चाहिए और बच्चों-बुजुर्गों का खास ख्याल रखना चाहिए. हवा शुद्ध करने वाले यंत्र घर में मददगार हो सकते हैं.

दिल्ली की हवा इस सीजन में पहली बार बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गई है. बारिश की राहत खत्म होते ही प्रदूषण फिर हावी हो गया. पराली जलाने, स्थानीय उत्सर्जन और प्रतिकूल मौसम तीनों मिलकर AQI बढ़ा रहे हैं. वैज्ञानिक दृष्टि से शांत हवा और तापमान प्रदूषकों को जमीन के पास रोक देते हैं. अगले कई दिनों तक हालात और बिगड़ सकते हैं. सावधानी और सामूहिक प्रयास ही राहत दिला सकते हैं.

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हर सर्दी में दिल्ली की हवा सांस लेने लायक नहीं रह जाती. लेकिन इसका बोझ सब पर बराबर नहीं पड़ता. आप जहां रहते हैं, वहां की हवा कितनी प्रदूषित है? शहर के AQI और उसके पांच सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों को फॉलो करें, सुबह 10:45 बजे तक हर 15 मिनट में रीडिंग के साथ.

 

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