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Cyclone Murasu Live: चक्रवात मुरासु- 110 KM की स्पीड से आंध्र प्रदेश से टकराएगा तूफान, हाई अलर्ट

ऋचीक मिश्रा | नई दिल्ली | 02 नवंबर 2026, 9:44 AM IST

Cyclone Murasu Live Updates: चक्रवात मुरासु गंभीर चक्रवाती तूफान बन चुका है. यह बंगाल की खाड़ी में उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है. 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर सुबह के बीच आंध्र प्रदेश के नेल्लोर-नरसापुर तट पर ओंगोल के पास लैंडफॉल की आशंका है. हवा की गति 100-110 किमी प्रति घंटा रहेगी.

साइक्लोन मुरासु आंध्र प्रदेश के तट के पास बंगाल की खाड़ी में दिख रहा है. (Photo: IMD/ITG)

भारत के पूर्वी तट पर एक बार फिर चक्रवाती तूफान का खतरा मंडरा रहा है. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार चक्रवाती तूफान मुरासु पश्चिम मध्य और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में सक्रिय है. यह तूफान तेज गति से उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा है और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों पर असर डालने वाला है. 

स्काईमेट वेदर और आईएमडी के आंकड़ों के आधार पर यह स्पष्ट है कि मुरासु अब गंभीर चक्रवाती तूफान (सीवियर साइक्लोनिक स्टॉर्म) में बदल चुका है. इसकी हवा की गति 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है और झोंके 120 किलोमीटर प्रति घंटा तक के हो सकते हैं. तूफान नेल्लोर और नरसापुर के बीच ओंगोल के करीब आंध्र प्रदेश के दक्षिणी तट को पार करने की संभावना है. यह लैंडफॉल 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच हो सकती है. 

 

9:44 AM (41 मिनट पहले)

Cyclone Murasu Latest Updates: तूफान की मौजूदा स्थिति और रास्ता

Posted by :- Richeek Mishra

आईएमडी के नवीनतम अपडेट के मुताबिक मुरासु 2 नवंबर 2026 को सुबह करीब 2:30 बजे पश्चिम मध्य और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में केंद्रित था. यह चेन्नई से करीब 260 किलोमीटर पूर्व-उत्तर-पूर्व में, नेल्लोर से 290 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व में और मछलीपट्टनम से 320 किलोमीटर दक्षिण-दक्षिण-पूर्व में स्थित था. पिछले छह घंटों में यह लगभग 20 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ा और तीव्र होकर गंभीर चक्रवाती तूफान बन गया. पूर्वानुमान ट्रैक के अनुसार तूफान आंध्र प्रदेश तट की ओर बढ़ रहा है और ओंगोल के आसपास लैंडफॉल करने की संभावना है. लैंडफॉल के बाद यह कमजोर पड़ते हुए मध्य भारत की ओर बढ़ सकता है.
 

9:04 AM (एक घंटा पहले)

Cyclone Murasu Live: चक्रवात मुरासु का नाम और उसकी खासियत

Posted by :- Richeek Mishra

चक्रवातों के नामकरण की प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत होती है. नाम ऐसे चुने जाते हैं जो आसान हों, लोगों से जुड़े हों और किसी व्यक्ति विशेष के नाम न हों. मुरासु नाम तमिल भाषा से लिया गया है. मुरासु एक बड़ा ढोल या नगाड़ा होता है जो युद्ध के समय, उत्सवों में या खतरे की चेतावनी देने के लिए बजाया जाता था.  यह नाम इसलिए चुना गया ताकि लोग आसानी से याद रख सकें और सतर्क रहें. आंध्र प्रदेश पर असर डालने वाले इस चक्रवात को तमिल नाम मिलना क्षेत्रीय सहयोग और साझा मौसम चेतावनी प्रणाली का उदाहरण है. दक्षिण भारत के राज्यों में चक्रवात अक्सर बंगाल की खाड़ी से आते हैं और नामकरण में क्षेत्रीय भाषाओं का इस्तेमाल आम बात है.