पीपलकोटी हादसे के बाद अब तपोवन विष्णुगाड टनल में वॉटर लीक से खतरा

चमोली में टीएचडीसी की पीपलकोटी टनल हादसे के बाद लापता श्रमिकों की तलाश जारी है. इस बीच एनटीपीसी की तपोवन विष्णुगाड परियोजना की टनल में कैविटी बनने और पानी रिसाव की घटना हुई. मजदूर बाहर निकाले गए हैं.

Advertisement
ये है तपोवन विष्णुगाड प्रोजेक्ट की वो टनल जिसमें पानी लीक हो रहा है. (Screengrab: ITG) ये है तपोवन विष्णुगाड प्रोजेक्ट की वो टनल जिसमें पानी लीक हो रहा है. (Screengrab: ITG)

कमल नयन सिलोड़ी

  • चमोली,
  • 17 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 12:55 PM IST

उत्तराखंड के चमोली जिले में जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़े टनल निर्माण कार्यों में एक के बाद एक घटनाएं सामने आने से पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल बन गया है. एक ओर पीपलकोटी स्थित टीएचडीसी की निर्माणाधीन टनल में 13 अगस्त को हुए गंभीर हादसे के बाद लापता श्रमिकों की तलाश और राहत-बचाव अभियान जारी है.

वहीं, दूसरी ओर एनटीपीसी की तपोवन विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना की मुख्य टनल की चोरमी एडिट टनल डीबीएम साइट में 15 अगस्त की सुबह कैविटी (छेद) बनने और उससे पानी का रिसाव होने की घटना सामने आई है. इन दोनों घटनाओं ने टनल निर्माण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, भूगर्भीय स्टडी और श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Advertisement

यह भी पढ़ें: बंगाल की खाड़ी में मॉनसूनी इंजन एक्टिव, पूरे देश में बरसेंगे बादल

टीएचडीसी की विष्णुगाड-पीपलकोटी परियोजना की टेल रेस टनल में अचानक मलबा और पानी घुसने से कई श्रमिक फंस गए थे. बचाव अभियान में कई लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन कुछ की मौत हो गई. दो श्रमिक अब भी लापता हैं. रेस्क्यू टीमें पानी निकालने, मलबा हटाने और तलाश जारी रखने में जुटी हुई हैं. इस हादसे ने पहले से ही संवेदनशील हिमालयी क्षेत्र में टनल निर्माण की चुनौतियों को एक बार फिर उजागर कर दिया है.

तपोवन विष्णुगाड टनल में कैविटी और रिसाव की घटना

एनटीपीसी की तपोवन विष्णुगाड जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन मुख्य टनल की चोरमी एडिट टनल डीबीएम साइट में 15 अगस्त की सुबह एक छोटा छेद दिखाई दिया. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उस हिस्से में काम कर रहे मजदूरों को तुरंत बाहर निकाल लिया गया. इसके बाद कैविटी को सुरक्षित तरीके से भरने और उपचार करने का काम शुरू कर दिया गया. टनल के अंदर बनी इस कैविटी से पानी का रिसाव भी हो रहा है.

Advertisement

एनटीपीसी प्रबंधन का कहना है कि टनलिंग के दौरान इस तरह की छोटी कैविटी बनना निर्माण प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हो सकता है. फिलहाल इससे किसी बड़े खतरे की स्थिति नहीं बताई जा रही है. फिर भी सुरक्षा को देखते हुए कैविटी वाले हिस्से में मजदूरों का प्रवेश पूरी तरह रोक दिया गया है. 

विशेषज्ञों की टीम मौके पर तैनात है. आधुनिक मशीनों की मदद से कैविटी को भरने तथा प्रभावित हिस्से को मजबूत बनाने का काम चल रहा है. प्रबंधन ने साफ किया है कि जब तक कैविटी का उपचार पूरी तरह नहीं हो जाता, तब तक उस हिस्से में टनलिंग का काम आगे नहीं बढ़ाया जाएगा.

यह भी पढ़ें: स्वदेशी जेट इंजन से चलने वाले सुसाइड ड्रोन दिव्यास्त्र MK3 की पहली टेस्ट फ्लाइट सफल

लगातार घटनाओं से बढ़ी चिंता

महत्वपूर्ण बात यह है कि पीपलकोटी टनल हादसे के ठीक बाद तपोवन परियोजना में कैविटी और पानी रिसाव की घटना सामने आई है. दोनों घटनाओं के कारण और परिस्थितियां अलग-अलग हो सकती हैं, लेकिन लगातार दो टनल परियोजनाओं से जुड़ी घटनाओं ने श्रमिकों की सुरक्षा और भूगर्भीय जांच को लेकर अतिरिक्त सतर्कता की जरूरत पर जोर दिया है.

हिमालयी क्षेत्र में चट्टानों की जटिल संरचना, पानी की मौजूदगी और मॉनसून के प्रभाव जैसी चुनौतियां पहले से जानी-मानी हैं. ऐसे में निर्माण के दौरान नियमित भूगर्भीय निगरानी, आधुनिक सेंसर तकनीक और सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन बेहद जरूरी हो जाता है.

Advertisement
तपोवन विष्णुगाड बिजली परियोजना में 2021 में फ्लैश फ्लड में सुरंग में पानी भर गया था. जिससे 200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. (File Photo: PTI)

विशेषज्ञों का मानना है कि टनल निर्माण में कैविटी का बनना कभी-कभी होता है, लेकिन समय रहते पहचान  न होने पर यह बड़ा खतरा बन सकता है. तपोवन परियोजना में प्रबंधन ने तुरंत मजदूरों को बाहर निकालकर सही कदम उठाया है, जिससे बड़े हादसे को टाला जा सका. 

वहीं पीपलकोटी हादसे में बचाव अभियान की चुनौतियां पानी और मलबे की वजह से जारी हैं. दोनों मामलों में पारदर्शिता और स्वतंत्र तकनीकी समीक्षा की मांग भी उठ रही है.

ये घटनाएं याद दिलाती हैं कि जलविद्युत परियोजनाएं बिजली उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन श्रमिकों की जान की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए. हिमालय जैसे संवेदनशील इलाके में निर्माण से पहले विस्तृत भूगर्भीय सर्वेक्षण, नियमित मॉनिटरिंग और आपातकालीन योजनाओं को और मजबूत करने की जरूरत है. राज्य और केंद्र सरकार के स्तर पर भी सुरक्षा मानकों की सख्ती से निगरानी होनी चाहिए.

कुल मिलाकर चमोली की इन दो घटनाओं ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि विकास और सुरक्षा का संतुलन बनाए रखना कितना चुनौतीपूर्ण है. तपोवन टनल में कैविटी का समय रहते इलाज और पीपलकोटी में लापता श्रमिकों की सफल तलाश दोनों ही जरूरी हैं. 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »