चमोली (Chamoli) चमोली उत्तराखंड राज्य का एक जिला है, जो राज्य के गढ़वाल क्षेत्र में स्थित है. जिले का प्रशासनिक मुख्यालय गोपेश्वर में है. इसके उत्तर में तिब्बत, पूर्व में पिथौरागढ़ और बागेश्वर, दक्षिण में अल्मोड़ा, दक्षिण-पश्चिम में पौड़ी गढ़वाल, पश्चिम में रुद्रप्रयाग और उत्तर-पश्चिम में उत्तरकाशी जिला स्थित है. चमोली मध्य हिमालय के पर्वतीय क्षेत्र का हिस्सा है.
चमोली जिले का नाम संस्कृत के चंद्रमौलि शब्द से जुड़ा माना जाता है. यह भगवान शिव का एक नाम है, जिसका अर्थ सिर पर चंद्रमा धारण करने वाले से है. प्राचीन समय में गढ़वाल क्षेत्र को केदारखंड के नाम से जाना जाता था. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस क्षेत्र का संबंध कई प्राचीन हिंदू ग्रंथों और ऋषि-मुनियों की परंपराओं से रहा है.
ऐतिहासिक रूप से चमोली क्षेत्र वर्ष 1960 तक पौड़ी गढ़वाल जिले का हिस्सा था. 24 फरवरी 1960 को चमोली तहसील को अलग जिला बनाया गया. अक्टूबर 1997 में जिले के कुछ तहसीलों और विकासखंडों के हिस्सों को अलग करके रुद्रप्रयाग जिले में शामिल किया गया. इस प्रशासनिक बदलाव के बाद चमोली की सीमाओं में परिवर्तन हुआ.
गढ़वाल के इतिहास में कत्यूरी और पंवार राजवंशों का उल्लेख मिलता है. ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार, वासुदेव कत्यूरी ने इस क्षेत्र में अपना शासन स्थापित किया था. जोशीमठ को उनके शासनकाल से जुड़ा एक प्रमुख स्थान माना जाता है. बाद में आदि शंकराचार्य ने जोशीमठ में ज्योतिर्मठ की स्थापना की. यह उनके द्वारा स्थापित चार प्रमुख मठों में से एक माना जाता है.
वर्ष 1803 में आए विनाशकारी भूकंप के बाद गढ़वाल की तत्कालीन सत्ता कमजोर हुई. इसके बाद गोरखा शासकों ने इस क्षेत्र पर अधिकार कर लिया. वर्ष 1815 में अंग्रेजों की सहायता से गढ़वाल के पंवार शासकों ने गोरखाओं को पीछे हटाया. ब्रिटिश शासन के दौरान चमोली क्षेत्र पौड़ी जिले की एक तहसील के रूप में प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा रहा.
चमोली जिले में बद्रीनाथ, हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल स्थित हैं. बद्रीनाथ धाम हिंदू तीर्थयात्रा का एक महत्वपूर्ण केंद्र है, जबकि हेमकुंड साहिब सिख धर्म के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है. फूलों की घाटी अपने प्राकृतिक वनस्पति क्षेत्र के लिए जानी जाती है. चिपको आंदोलन की शुरुआत भी चमोली क्षेत्र से हुई थी. यह आंदोलन पेड़ों की कटाई के विरोध से जुड़ा था और वन संरक्षण के इतिहास में इसका उल्लेख मिलता है.
उत्तराखंड के चमोली जिले में बद्रीनाथ से देहरादून जा रहे हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद करीब 100 जवानों ने दो दिन तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. खराब मौसम और दुर्गम पहाड़ी रास्तों के बावजूद सभी छह मृतकों के शव रविवार सुबह सुरक्षित रूप से नीचे लाए गए.
उत्तराखंड के चमोली जिले में हेलीकॉप्टर हादसे ने छह परिवारों की खुशियां छीन लीं. बदरीनाथ से देहरादून जा रहा हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें पायलट समेत छह लोगों की मौत हो गई. पांचों यात्री बेंगलुरु के रहने वाले थे. मृतकों में कर्नाटक पुलिस के निरीक्षक अरुण सालुंके और वकील शंकर गौड़ा भी शामिल थे. कर्नाटक सरकार उत्तराखंड प्रशासन के संपर्क में है और शवों को जल्द वापस लाने की व्यवस्था कर रही है.
उत्तराखंड के चमोली जिले में हाथी पहाड़ के पीछे चायी गांव के पास एक हेलिकॉप्टर क्रैश कर गया. खराब मौसम और लगातार बारिश के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में मुश्किल आ रही है. जानकारी सामने आई है कि इस हादसे में पायलट समेत हेलिकॉप्टर में सवार सभी 6 लोगों की मौत हो गई.
उत्तराखंड के चमोली में जोशीमठ के पास चायी गांव में हेलिकॉप्टर क्रैश होने की सूचना है. बदरीनाथ से देहरादून जा रहे हेलिकॉप्टर में पायलट समेत छह लोग सवार थे. खराब मौसम के बीच सेना और SDRF की टीमें सर्च ऑपरेशन चला रही हैं. वीडियो में जानें क्या है पूरा मामला.
उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में भगवान बदरीविशाल को ठंड में घृत कंबल ओढ़ाने की सदियों पुरानी परंपरा निभाई जाती है. चमोली के सीमांत गांव माणा की महिलाएं और बेटियां व्रत रखकर एक ही दिन में यह कंबल तैयार करती हैं. मंदिर के कपाट बंद होने पर मुख्य पुजारी कंबल पर शुद्ध घी और केसर का लेप लगाते हैं और इसे भगवान के विग्रह पर ओढ़ाया जाता है.
उत्तराखंड के पहाड़ों पर जल्द बर्फ गिर सकती है. 23 अक्टूबर से मौसम में बदलाव के आसार हैं. अगले चार दिनों के दौरान कुछ जिलों में हल्की बारिश और 3500 मीटर से ऊंचे इलाकों में बर्फबारी का अनुमान है.
CBRI रुड़की के वैज्ञानिकों ने पहली बार ग्लेशियल झील पर स्वदेशी GLOF अर्ली वार्निंग सिस्टम लगाया. आठ करोड़ की अनुमानित लागत वाले सिस्टम को सिर्फ 61 लाख में तैयार किया है. दो घंटे पहले चेतावनी मिलेगी.
बद्रीनाथ धाम में सर्वपितृ अमावस्या पर तीर्थराज ब्रह्मकपाल में पिंडदान और तर्पण के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी. 10 अक्टूबर को बद्रीनाथ धाम में एक दिन में 28,094 श्रद्धालुओं ने दर्शन किए. इस यात्रा सीजन में अब तक कुल 19,85,318 श्रद्धालु बद्रीनाथ पहुंच चुके हैं.
चमोली में 15,210 फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट शनिवार और रविवार को बंद होने जा रहे हैं. 8 अक्टूबर की रात से लगातार हो रही बर्फबारी के कारण गुरुद्वारा परिसर, मंदिर और पवित्र सरोवर पर आधा फीट से अधिक बर्फ जम चुकी है. ठंड के बावजूद श्रद्धालु 19 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई पार कर अंतिम अरदास के लिए पहुंच रहे हैं.
उत्तराखंड के चमोली जिले में 15,210 फीट की ऊंचाई पर स्थित हेमकुंड साहिब और लोकपाल लक्ष्मण मंदिर के कपाट बंद होने वाले हैं. 8 अक्टूबर की रात से जारी बर्फबारी के कारण दोनों पवित्र स्थलों और आसपास के पहाड़ों पर आधा फीट से अधिक बर्फ जम चुकी है. कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालु अंतिम दर्शन और अरदास के लिए पहुंच रहे हैं. पाकिस्तान से आए सिख श्रद्धालुओं का जत्था भी धार्मिक रस्मों में शामिल होगा.
उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच जोशीमठ में पेट्रोल पंप से जोगीधारा तक 7 से 8 किलोमीटर लंबा जाम लग गया. गाड़ियों में फंसे यात्रियों को एक से तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा. गेट सिस्टम के बावजूद वाहनों की लंबी कतार बनी हुई है.
बद्रीनाथ धाम की इस साल की यात्रा ने नया रिकॉर्ड बना दिया है. कपाट खुलने के बाद अब तक 19 लाख 13 हजार से ज्यादा श्रद्धालु धाम पहुंच चुके हैं. खास बात यह है कि कपाट बंद होने में अभी 1 महीने से अधिक समय बाकी है. कड़ाके की ठंड और मौसम विभाग की चेतावनियों के बावजूद भक्तों का उत्साह बरकरार है. पितृपक्ष में ब्रह्मकपाल पर पिंडदान के लिए भी बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं.
बद्रीनाथ से 52 किलोमीटर दूर 18 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित देवताल इन दिनों चार से पांच फीट बर्फ से ढका है. पवित्र झील पूरी तरह जम चुकी है. बीआरओ के सड़क मार्ग खोलने के बाद तिलक सोनी के नेतृत्व में बाइकर्स और पर्यटकों का दल यहां पहुंचा. भारत-चीन सीमा के करीब इस अद्भुत नजारे ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया.
पितृपक्ष के बीच बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. ब्रह्मकपाल में पिंडदान और तर्पण के लिए देशभर से लोग पहुंच रहे हैं. पिछले आठ दिनों में 60 हजार से ज्यादा श्रद्धालु यहां पहुंच चुके हैं. बदरीनाथ हाईवे पर भी वाहनों का दबाव बढ़ा है, हालांकि रविवार को पिछले दो दिनों की तुलना में जाम की स्थिति में सुधार दिखा.
पितृपक्ष के दौरान बदरीनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. ब्रह्मकपाल तीर्थ पर पिंडदान और तर्पण के लिए देशभर से लोग पहुंच रहे हैं. तीर्थ पुरोहित समाज के मुताबिक, 8 दिनों में 60 हजार से ज्यादा श्रद्धालु ब्रह्मकपाल पहुंचे हैं. वहीं बद्री विशाल के दर्शन के लिए मंदिर में लंबी कतारें लगी हैं. बदरीनाथ हाईवे पर वाहनों का दबाव बढ़ने से प्रशासन ने गेट सिस्टम समेत कई यातायात नियंत्रण उपाय लागू किए हैं.
दो दिनों की बारिश के बाद सोमवार को मौसम साफ होते ही चारधाम यात्रा फिर शुरू कर दी गई. बद्रीनाथ धाम में सुबह से चटक धूप खिली और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे. ऊंची चोटियों पर बर्फबारी और ठंडी हवाओं के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह बरकरार है.
बद्रीनाथ धाम में बिना इजाज़त बड़ा सांस्कृतिक कार्यक्रम करने और लाउडस्पीकर बजाने पर चमोली डीएम ने सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने गढ़वाल स्काउट्स के कमांडिंग ऑफिसर को नोटिस जारी किया है.
नेपाल में 26 अगस्त को लांगटांग लिरुंग से लगभग 40 गीजा पिरामिड जितनी चट्टान और बर्फ गिरने से भीषण मलबा बहा. इसमें 1300 से अधिक लोग मारे गए. जलवायु परिवर्तन से पहाड़ों में ऐसे खतरे बढ़ रहे हैं.
चमोली के कर्णप्रयाग में सीने में दर्द और घबराहट के बाद एक व्यक्ति मेडिकल स्टोर पहुंचा, लेकिन अचानक चक्कर खाकर बेहोश होकर गिर पड़ा. मेडिकल संचालक कैलाश सती ने तुरंत CPR देना शुरू किया. कुछ देर बाद हालत में सुधार हुआ और उसे अस्पताल ले जाया गया. रात में जांच के दौरान उसकी स्थिति सामान्य बताई गई.
चमोली के नारायणबगड़ क्षेत्र में आवारा और हिंसक कुत्तों के बढ़ते आतंक को देखते हुए 10 स्कूलों को चार दिन के लिए बंद करने का फैसला लिया गया है. छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए 20 से 23 अगस्त तक स्कूलों में छुट्टी रहेगी. इस दौरान पढ़ाई ऑनलाइन कराई जाएगी.
उत्तराखंड के चमोली टनल हादसे में फंसे आखिरी मजदूर का शव बरामद हो गया है. 13 अगस्त से शुरू हुए रेस्क्यू ऑपरेशन को अब खत्म कर दिया गया है. इस हादसे में कुल 10 मजदूरों की मौत हो गई है और 12 मजदूर घायल हो गए हैं. आखिरी लापता मजदूर का शव भी बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है.