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अल-नीनो बढ़ाएगा गर्मी का कहर, 4.5 लाख लोगों की मौत का अनुमान, भारत भी खतरे में

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 25 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 4:57 PM IST
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इस साल का मजबूत अल-नीनो दुनिया के कई हिस्सों में गर्मी को और बढ़ा सकता है. यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब की रिपोर्ट के मुताबिक, जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच सामान्य साल की तुलना में करीब 4,51,000 अतिरिक्त मौतें गर्मी की वजह से हो सकती हैं. Photo: PTI
 

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इनमें भारत में करीब 15,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान जमीन का तापमान सामान्य से करीब 1.2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो सकता है और बहुत ज्यादा गर्म दिनों की संख्या 44 फीसदी बढ़ सकती है. Photo: AFP

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यहां 4.51 लाख का आंकड़ा पहले से हुई मौतों का नहीं है. यह वैज्ञानिकों का अनुमान है कि सामान्य साल की तुलना में अल-नीनो की वजह से कितनी अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं. इसके लिए वैज्ञानिकों ने दुनिया के 24,000 से ज्यादा इलाकों के तापमान और मौतों से जुड़े आंकड़ों को देखा है. Photo: PTI

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इसका सबसे ज्यादा असर उन जगहों पर पड़ सकता है जहां पहले से गर्मी ज्यादा पड़ती है और लोगों के पास गर्मी से बचने की सुविधाएं कम हैं. अफ्रीका का साहेल इलाका और साउथ तथा साउथईस्ट एशिया के कई देश सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं. Photo: AP

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रिपोर्ट के मुताबिक, अफ्रीका का साहेल इलाका सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकता है. यहां करीब 66,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है. नाइजीरिया में करीब 31,400 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है. इसके बाद सूडान में करीब 17,600 और दूसरे देशों में भी हजारों अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है. Photo: Reuters

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साउथ और साउथईस्ट एशिया में भी असर बड़ा हो सकता है. फिलीपींस, वियतनाम, थाईलैंड और कंबोडिया में मिलाकर करीब 19,400 अतिरिक्त मौतें हो सकती हैं. इंडोनेशिया में करीब 19,300 और ब्राजील में करीब 13,300 मौतों का अनुमान है. Photo: AFP

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भारत में भी अल-नीनो की वजह से गर्मी से होने वाली मौतें बढ़ सकती हैं. रिपोर्ट में जून 2026 से फरवरी 2027 के बीच करीब 15,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया गया है. इनमें दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच करीब 7,400 अतिरिक्त मौतों का अनुमान बताया गया है. Photo: Reuters

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इस दौरान भी गर्मी से जुड़ा खतरा बना रह सकता है. गर्मी का असर खास तौर पर बुजुर्गों, बाहर काम करने वाले लोगों और पहले से बीमार लोगों पर ज्यादा पड़ सकता है. जिन जगहों पर पानी, अस्पताल और कूलिंग जैसी सुविधाएं कम हैं, वहां खतरा और बढ़ सकता है. Photo: AFP

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क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब की रिपोर्ट के मुताबिक, इस अल-नीनो के दौरान दुनिया के जमीन वाले हिस्सों का तापमान सामान्य से करीब 1.2 डिग्री सेल्सियस ज्यादा हो सकता है. इसके साथ ही बहुत ज्यादा गर्म दिनों की संख्या करीब 44 फीसदी बढ़ सकती है. Photo: AP

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लोगों को सामान्य साल की तुलना में ज्यादा दिनों तक तेज गर्मी का सामना करना पड़ सकता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, पहले से गर्म इलाकों में तापमान कुछ डिग्री बढ़ना भी लोगों के लिए खतरनाक हो सकता है. खासकर वहां जहां एयर कंडीशनिंग, पानी और हेल्थ सर्विसेज आसानी से उपलब्ध नहीं हैं. Photo: Getty

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WMO के मुताबिक, अल-नीनो फरवरी 2027 तक बना रह सकता है. इसके दौरान दुनिया के कई हिस्सों में तापमान और बारिश के पैटर्न में बदलाव हो सकता है. अल-नीनो एक नेचुरल क्लाइमेट पैटर्न है. लेकिन इस बार यह ऐसे समय आया है जब क्लाइमेट चेंज की वजह से धरती पहले ही गर्म हो रही है. इसी वजह से इसके असर से ज्यादा गर्मी पड़ने का खतरा बढ़ गया है. Photo: PTI

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वैज्ञानिकों का कहना है कि अल-नीनो फरवरी 2027 तक खत्म भी हो जाए, फिर भी गर्मी का असर कुछ समय तक बना रह सकता है. खासकर नॉर्दर्न हेमिस्फेयर के देशों में इसके बाद आने वाली गर्मियों में भी गर्मी से जुड़ा खतरा रह सकता है. Photo: PTI

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