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सुंदर हत्यारे... अपने बच्चों को ही भूखा मार देते हैं ये रंगीन तोते

आजतक साइंस डेस्क
  • नई दिल्ली,
  • 16 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:15 PM IST
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स्कार्लेट मैकॉ बहुत सुंदर और मशहूर तोते हैं. इनका चमकदार लाल रंग जंगल में आसानी से दिख जाता है. लेकिन इनकी संख्या लगातार कम हो रही है. शिकार, जंगल काटना और घोंसलों की कमी से ये खतरे में हैं. मेक्सिको और मध्य अमेरिका में एक उप-प्रजाति लगभग खत्म हो चुकी है. Photo: Getty

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वैज्ञानिकों ने पाया कि इनके खुद के माता-पिता भी बच्चों की मौत का बड़ा कारण हैं. पेरू की वैज्ञानिक गैब्रिएला विगो-ट्रॉको ने दो दशक से ज्यादा समय तक इन पक्षियों की स्टडी की. टेक्सास ए एंड एम यूनिवर्सिटी से जुड़ी यह वैज्ञानिक द मैकॉ सोसाइटी की सह-निदेशक हैं. Photo: Getty

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उन्होंने पाया कि स्कार्लेट मैकॉ जानबूझकर अपने सबसे छोटे चूजों को भूखा छोड़ देते हैं. एक घोंसले में मादा चार अंडे तक दे सकती है. लेकिन आमतौर पर सिर्फ एक या दो बच्चे ही उड़ पाते हैं. तीसरे और चौथे चूजे लगभग हमेशा मर जाते हैं. दूसरे पैदा हुए चूजों में भी करीब 25 प्रतिशत की मौत हो जाती है. Photo: Getty

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2018 में पेरू के तंबोपता नेशनल रिजर्व में विगो-ट्रॉको की टीम ने एक चूजे को घोंसले से निकाला. उसका नाम पार्कर रखा गया. वह चार भाई-बहनों में सबसे छोटा था. आंखें भी नहीं खुली थीं. वह कमजोर और कम वजन का था. अगर बचाया नहीं जाता तो वह भूख से मर जाता. Photo: Getty
 

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वैज्ञानिकों ने घोंसलों में कैमरे लगाकर देखा. माता-पिता, खासकर मां, सबसे छोटे चूजे को किनारे धकेल देती है. पिता जब खाना लाता है तो मां और बड़े बच्चों को खिलाता है. छोटा चूजा ठंडा पड़कर चिल्लाता रहता है. कोई भाई-बहन नहीं सताते. खाने की कमी भी वजह नहीं है. Photo: Getty

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विगो-ट्रॉको का मानना है कि माता-पिता अलग-अलग उम्र के बच्चों को संभाल नहीं पाते. चार-पांच दिन के अंतर से पैदा हुए चूजों की जरूरतें बहुत अलग होती हैं. खाने का तरीका और घोंसले का तापमान दोनों अलग चाहिए. अगर सबको बराबर खिलाने की कोशिश करें तो कोई भी नहीं बच सकता. इसलिए वे सबसे स्वस्थ और बड़े बच्चों को चुनते हैं. यह कभी जीवित रहने की रणनीति थी. अब जब प्रजाति घट रही है तो यह बड़ी समस्या बन गई है. Photo: Getty

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हाथ से पालने का तरीका भी आजमाया जाता है. लेकिन इसमें डेढ़ से तीन महीने लगते हैं. कैद में पले तोतों का जंगल में जीवित रहना मुश्किल होता है. वे शिकारियों को पहचानना, खाना खोजना और झुंड बनाना नहीं सीख पाते. इसलिए विगो-ट्रॉको की टीम ने जंगली पालक माता-पिता का रास्ता चुना. Photo: Getty

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पार्कर को तीन हफ्ते तक फील्ड स्टेशन में हाथ से खिलाया गया. हर दो घंटे में खाना दिया गया. फिर जंगल में ऐसा घोंसला खोजा गया जहां उम्र में मिलता-जुलता चूजा हो या खाली हो. 22 दिसंबर 2018 को पार्कर को नई मां टैंबो के पास रखा गया. टैंबो ने तुरंत उसे संवारा. कुछ महीने बाद पार्कर उड़ने लगा. वह दशकों में पहला चौथा चूजा था जो जंगली घोंसले से उड़ पाया. Photo: Getty

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2017 से 2019 के बीच टीम ने 25 और चूजों को सफलतापूर्वक बचाया. तीन और अपनाए गए लेकिन बिजली, शिकारी या बीमारी से मर गए. विगो-ट्रॉको कहती हैं कि यह शतरंज खेलने जैसा लग रहा था. एक-एक चाल सोचकर काम करना पड़ता था. Photo: Getty

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यह तरीका आसान नहीं है. महंगा भी है. तीन साल के प्रयोग में 20 लोगों की टीम, वेतन, रहने और उपकरणों का खर्च आया. हर जगह दोहराना मुश्किल है. ग्वाटेमाला में रॉनी गार्सिया-अनलेउ ने भी यह तरीका आजमाया. लेकिन 2019 के बाद वहां नहीं चलाया जा सका. सही समय पर सही घोंसला खोजना बहुत कठिन है. Photo: Getty 

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जंगल में मीलों पैदल चलना पड़ता है. कुछ जगहों पर कैद में पाला जाता है फिर छोड़ दिया जाता है. कोस्टा रिका में घोंसलों की रखवाली, स्कूलों में शिक्षा और कृत्रिम घोंसले लगाकर आबादी बढ़ाई गई. वहां जंगल कटने और शिकार को रोकना मुख्य तरीका रहा. Photo: Getty

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विगो-ट्रॉको अब नया तरीका आजमा रही हैं. चूजे को हाथ से पाले बिना सीधे एक घोंसले से दूसरे में ले जाना. इससे खर्च कम होता है. दो घोंसलों में उम्र के अंतर वाले चूजों को बदलकर सफलता मिली है. माता-पिता अब बराबर उम्र के दो बच्चों को पाल पा रहे हैं. Photo: Getty

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यह तकनीक अब अर्जेंटीना से मध्य अमेरिका तक दूसरे तोतों पर भी आजमाई जा रही है. पेरू की अपेक्षाकृत स्वस्थ आबादी ने दूसरे देशों के लिए ज्ञान दिया है. पार्कर 2019 में फिर दिखा. वह अपनी पालक मां-बाप और भाई-बहन के साथ उड़ रहा था. सामान्य परिवार की तरह. Photo: Getty

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