केजरीवाल की जीत भी और झटका भी... शराब केस से अलग हुईं जस्टिस स्वर्णकांता, लेकिन पांच AAP नेताओं पर अवमानना की कार्रवाई

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्साइज पॉलिसी केस से जुड़े बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अरविंद केजरीवाल समेत कई AAP नेताओं के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू की है. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि अदालत और जज के खिलाफ सुनियोजित बदनाम करने का अभियान चलाया गया, जिसका उद्देश्य न्यायपालिका पर दबाव बनाना था.

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जस्टिस शर्मा ने कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश की गई (Photo: ITG) जस्टिस शर्मा ने कहा कि न्यायपालिका को बदनाम करने की कोशिश की गई (Photo: ITG)

सृष्टि ओझा / संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 14 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:06 AM IST

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद आम आदमी पार्टी के कई बड़े नेता अब एक नए कानूनी संकट में घिरते नजर आ रहे हैं. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत ने आबकारी नीति मामले से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट और बयानों को लेकर अरविंद केजरीवाल समेत कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी है.

जिन नेताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई है, उनमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, सौरभ भारद्वाज और विनय मिश्रा शामिल हैं.

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कोर्ट ने कहा कि प्रथम दृष्टया इन नेताओं के कृत्य आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आते हैं. अदालत के मुताबिक, यह कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया की रक्षा और न्यायिक कार्यवाही की गरिमा बनाए रखने के लिए शुरू की गई है.

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि न्यायपालिका के फैसलों की निष्पक्ष आलोचना करना अवमानना नहीं है, लेकिन अदालत के खिलाफ सुनियोजित अभियान चलाना और जनता के बीच अविश्वास पैदा करना गंभीर मामला है.

अदालत ने कहा कि अरविंद केजरीवाल और अन्य नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट और वीडियो का उद्देश्य जनता के मन में न्यायपालिका की निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा करना था. कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि केजरीवाल हाईकोर्ट के फैसले से असहमत थे तो उनके पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने कानूनी रास्ता अपनाने के बजाय वीडियो और सार्वजनिक अभियान का रास्ता चुना.

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जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने टिप्पणी की कि केजरीवाल ने अपने बयानों में यह संकेत देने की कोशिश की कि अदालत सरकार, बीजेपी या सॉलिसिटर जनरल के प्रभाव में काम कर रही है. अदालत ने पूछा कि आखिर किस अधिकार से कोई यह कह सकता है कि अदालत स्वतंत्र रूप से फैसला नहीं कर सकती.

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि केजरीवाल के बयान प्रथम दृष्टया निंदनीय हैं और आपराधिक अवमानना के दायरे में आते हैं. अदालत ने यह भी कहा कि संजीव पाठक के पत्र, संजय सिंह और विनय मिश्रा के सोशल मीडिया पोस्ट भी इसी तरह की श्रेणी में आते हैं.

सौरभ भारद्वाज के पोस्ट किए गए वीडियो को लेकर भी कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की और उसे 'परेशान करने वाला वीडियो' बताया. अदालत ने कहा कि यह वीडियो आम आदमी पार्टी के आधिकारिक अकाउंट से भी प्रसारित किया गया था.

कोर्ट ने साफ कहा कि यह कार्रवाई किसी व्यक्तिगत नाराजगी या क्रोध के कारण नहीं की जा रही है. अदालत सभी पक्षों और वादियों का सम्मान करती है. आदेश में कहा गया कि यह फैसला पूरी आत्मनिरीक्षण प्रक्रिया के बाद लिखा गया है और संबंधित नेताओं के अपने कृत्यों के आधार पर लिया गया है.

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