जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा (Swarana Kanta Sharma) दिल्ली हाई कोर्ट की जज हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1991 में की, जब उन्होंने दिल्ली बार काउंसिल में बतौर वकील रजिस्ट्रेशन कराया. साल 2002 में वे Delhi Higher Judicial Service (DHJS) में शामिल हुईं. हाई कोर्ट में आने से पहले वे साकेत कोर्ट में प्रिंसिपल जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर भी रहीं. 28 मार्च 2022 को उन्हें Delhi High Court का जज नियुक्त किया गया.
दिल्ली हाई कोर्ट ने शराब नीति मामले में CBI याचिका सुनवाई के लिए नई बेंच बनाई है. केजरीवाल सहित संबंधित नेताओं पर अवमानना केस भी चलेगा.
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्साइज पॉलिसी केस से जुड़े बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अरविंद केजरीवाल समेत कई AAP नेताओं के खिलाफ अवमानना कार्रवाई शुरू की है. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि अदालत और जज के खिलाफ सुनियोजित बदनाम करने का अभियान चलाया गया, जिसका उद्देश्य न्यायपालिका पर दबाव बनाना था.
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक्साइज़ पॉलिसी केस से जुड़े बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट पर अरविंद केजरीवाल समेत 5 AAP नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्रवाई शुरू की. वीडियो में जानें शराब केस से क्यों अलग हुईं जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा? एक्साइज़ पॉलिसी केस में अब तक कहां का रुख करेगा ये मामला.
अरविंद केजरीवाल फिलहाल कानूनी, राजनीतिक और चुनावी मोर्चों पर एक साथ जूझ रहे हैं. राघव चड्ढा से मिले जोर के झटके से उबरने की कोशिश तो है ही, दिल्ली शराब घोटाला केस की सुनवाई के मामले में भी सत्याग्रह कर रहे हैं. चुनौती दिल्ली की राजनीति में बने रहने के साथ ही, पंजाब की सत्ता बचाए रखने की भी है.
अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता के साथ विवाद को लेकर सत्याग्रह का रास्ता अपनाने का फैसला लिया है. इसकी शुरुआत उन्होंने आप नेताओं के साथ दिल्ली के राजघाट पहुंचकर की. केजरीवाल ने कहा कि वो न्यायपालिका का सम्मान करते हैं जिसने उन्हें बेल दिलाई और आरोपों से मुक्त किया, लेकिन अब उन्हें 'सत्याग्रह' करना पड़ रहा है.
जस्टिस स्वर्णकांता विवाद को लेकर अरविंद केजरीवाल ने राजघाट पर सत्याग्रह शुरू किया. मनीष सिसोदिया समेत आप नेताओं के साथ उन्होंने बापू को श्रद्धांजलि दी और कहा कि न्यायपालिका का सम्मान करते हुए शांतिपूर्ण विरोध किया जा रहा है.
आम आदमी पार्टी के नेता जैसमीन शाह ने जस्टिस वर्णकांता शर्मा पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होनें खुद माना है कि वह केवल एक बार नहीं बल्कि चार बार आरएसएस से जुड़े संगठन के कार्यक्रमों में गई हैं. उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा है कि जब भी वह इन कार्यक्रमों में जाती हैं, उन्हें प्रमोशन मिलता है.
आज का दंगल दिल्ली में शराब घोटाले पर शुरू हुई सियासत को लेकर है जो अब अदालत के हुक्मउदूली तक पहुंच गई है. केजरीवाल दिल्ली के सीएम रहते जेल गए थे और जेल से सरकार चलाई थी. अब केजरीवाल ने शराब घोटाले में दिल्ली हाईकोर्ट की जज के सामने सुनवाई का बहिष्कार कर दिया है. केजरीवाल ने कहा है कि वो जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में सुनवाई के दौरान पेशी पर ही नहीं जाएंगे. क्योंकि केजरीवाल को शक है कि जस्टिस स्वर्णकांता की अदालत में उन्हें इंसाफ नहीं मिलेगा. केजरीवाल को शक इसलिए है क्योंकि जस्टिस आरएसएस से जुड़े विचारधारा वाले संगठन के मंच पर जाती हैं और उनके बच्चे केंद्र सरकार के वकीलों के पैनल में हैं. केजरीवाल ने पहले जस्टिस स्वर्णकांता से ही अनुरोध किया कि सुनवाई से हट जाएं, फिर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा कि जस्टिस स्वर्णकांता के कोर्ट से केस हटा दें. फिर चीफ जस्टिस ने भी मना कर दिया तो एक रिट सुप्रीम कोर्ट में डाला. लेकिन आज ऐलान किया कि उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता को चिट्ठी लिखकर कह दिया है कि वो सुनवाई का बहिष्कार करेंगे.
अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र लिखकर कहा है कि 'वह खुद या वकील के जरिये उनके सामने पेश नहीं होंगे. उन्होंने यह भी कहा है कि मेरी जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उम्मीद टूट गई है. इसलिए मैंने महात्मा गांधी के सत्याग्रह की राह पर चलने का फैसला लिया है.' इस पूरे मामले में वरिष्ठ वकील सतीष टम्टा ने अपनी राय दी है.
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शराब घोटाले से जुड़े मामले में बेंच बदलने के लिए याचिका दाखिल की थी. यह याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने अब पेश ही नहीं होने का ऐलान कर दिया है. केजरीवाल ने कहा है कि वह फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार रखते हैं.
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को राउज एवेन्यू कोर्ट ने शराब घोटाला मामले में बरी किया था, लेकिन सीबीआई ने इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील की. केजरीवाल ने जज बदलने की मांग सुप्रीम कोर्ट में की, जिसे खारिज कर दिया गया.
शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच के सामने पेश न होने का फैसला लिया. बेंच बदलने की याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने ‘सत्याग्रह’ की बात कही और सुप्रीम कोर्ट जाने का संकेत दिया.
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की कोर्ट में पेश नहीं होने, सत्याग्रह का ऐलान किया है. उन्होंने अब अपने इस फैसले के पीछे की वजह भी बताई है.
कहा जा रहा है कि राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी तोड़ दी है, और दो तिहाई राज्यसभा सांसदों के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं. लेकिन, अरविंद केजरीवाल को सबसे बड़ा सरप्राइज दिया है संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने. संदीप तो आप विचारधारा और संगठन के पुराने आदमी थे. दूसरे, अशोक मित्तल को राघव चड्ढा की जगह राज्यसभा में डिप्टी लीडर बनाया गया था.
दिल्ली हाई कोर्ट की जज स्वर्णकांता शर्मा का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसे ये कहकर शेयर किया जा रहा है कि वो खुद ये मान रही हैं कि वो जब-जब आरएसएस के कार्यक्रमों में जातीं हैं, उनका प्रमोशन हो जाता है. अब वायरल वीडियो का फैक्ट चेक करने पर पता चला कि वीडियो महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के एक कार्यक्रम का है और इसका आरएसएस से कोई लेना-देना नहीं है.
दिल्ली आबकारी नीति मामले में आप के संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सबूतों के अभाव में रिहा हो गए, उनकी रिहाई को CBI ने हाई कोर्ट में चुनौती दी जिसकी सुनवाई जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा कर रही हैं. केजरीवाल ने याचिका सुन रही जज ने भी आरोप लगाया और कहा कि जस्टिस शर्मा के आदेशों में एक पैटर्न दिखता है, जिसमें ED और CBI के हर तर्क को स्वीकार किया जाता है.
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा इन दिनों सुर्खियों में बनी हुई हैं. इसकी वजह है दिल्ली शराब नीति मामले में उनका वह कड़ा रुख, जिसमें उन्होंने पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल की उस अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्हें केस से हटने को कहा गया था. जस्टिस शर्मा का कहना है कि एक राजनेता यह तय नहीं कर सकता कि कौन सा जज उसका केस सुनेगा. ऐसे में आइए जानते हैं उस जज की कहानी जो अपनी कलम और तेवर दोनों के लिए मशहूर हैं.
दिल्ली हाई कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल की उस मांग को खारिज कर दिया है जिसमें दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से दिल्ली एक्साइज पॉलिसी केस की सुनवाई से रिक्युज यानी अलग होने की गुजारिश की थी. हाई कोर्ट ने कहा कि महज आशंका या संदेह के आधार पर जज की निष्पक्षता पर सवाल नहीं उठाए जा सकते.
दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल की याचिका खारिज करते हुए खुद को शराब नीति मामले की सुनवाई से अलग करने से इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि बिना ठोस साक्ष्य के लगाए गए आरोप केवल कयास हैं और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं कर सकते.
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट में जज पर पक्षपात और विपक्ष के मामलों में तेजी से सुनवाई का आरोप लगाते हुए एक्साइज केस में निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने रीक्यूजल मामले में अपना पक्ष अदालत के सामने रख लिया है.
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शराब नीति मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में एक अतिरिक्त हलफनामा (अतिरिक्त एफिडेविट) दाखिल कर सनसनी मचा दी है. केजरीवाल ने सीधे तौर पर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के बच्चों के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ पेशेवर संबंधों का हवाला देते हुए पक्षपात की गंभीर आशंका जताई है.