तमिलनाडु में सरकार बनाने को लेकर पेच फंसता ही जा रहा है. सूबे में किसी भी दल या गठबंधन के पास बहुमत का नंबर नहीं होने के कारण अभी तक सरकार बनाने का रास्ता साफ नहीं हुआ है. ऐसे में दक्षिण भारत के इस राज्य की राजनीति में एक ऐसा घटनाक्रम देखने को मिल रहा है, जिसकी कल्पना पिछले 50 वर्षों में किसी ने नहीं की थी.
अभिनेता से नेता बने विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) तमिलनाडु में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन बहुमत का नंबर पूरा नहीं हो रहा. कांग्रेस ने जरूर विजय की टीवीके को समर्थन दे रखा हो, लेकिन उसके बाद भी सरकार बनाने के लिए बहुमत का जादुई आंकड़ा नहीं पूरा हो रहा.
तमिलनाडु में बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ने वाले AIADMK अब एनडीए से बाहर निकालने की तैयारी में है. ऐसे में सवाल उठता है कि बीजेपी से गठबंधन तोड़ने के बाद AIADMK तमिलनाडु में टीवीके और डीएमके में किसके साथ हाथ मिलाएगी?
बीजेपी से अलग होने जा रही AIADMK
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में AIADMK ने बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी से आगे नहीं नहीं निकल सकी. राज्य में टीवीके को 108 सीटें मिली हैं, लेकिन सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन चाहिए.
कांग्रेस ने जरूर विजय की पार्टी को अपना समर्थन दिया है, जिसे मिलकर 113 का नंबर ही हो रहा है. विजय ने सरकार बनाने के लिए राज्यपाल से दो बार मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन राज्यपाल ने अभी तक उन्हें मंजूरी नहीं दी. राज्यपाल ने विजय से 118 विधायकों के समर्थन की लिस्ट मांगी है.
वहीं, जयललिता के निधन के बाद लगातार चार चुनाव हार चुकी AIADMK अपनी राजनीतिक वजूद बचाने के लिए इस गठबंधन पर विचार कर रही है. ऐसे में बीजेपी के साथ होने के चलते AIADMK के साथ विजय भी हाथ मिलाने के लिए तैयार नहीं है. ऐसे में सूत्रों की माने तो AIADMK ने एनडीए से अलग होने का फैसला कर सकती है, जिसके लिए मंथन भी शुरू हो गया है.
AIADMK किसके साथ मिलाएगी हाथ
तमिलनाडु में विजय और कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने के दांव से डीएमके नाराज है तो बीजेपी भी खुश नहीं है. सूत्रों का कहना है कि बीजेपी की रणनीति कांग्रेस को सत्ता से दूर रखने की है तो ़AIADMK अलग रणनीति पर काम कर रही है. AIADMK अगर एनडीए से अलग होती है तो फिर तमिलनाडु में किसके साथ जाएगी.
बीजेपी के साथ AIADMK का गठबंधन होने के चलते विजय की पार्टी टीवीके समर्थन लेने से बच रहे हैं. इसके पीछे वजह यह है कि चुनाव के दौरान विजय ने साफ कहा था कि डीएमके उनकी राजनीतिक विरोधी है तो बीजेपी उनकी वैचारिक विरोधी है. ऐसे में बीजेपी से गठबंधन टूटने के बाद विजय को AIADMK के साथ मिलकर सरकार बनाने में कोई दिक्कत नहीं होगी.
अब सवाल यही है कि AIADMK क्या विजय की पार्टी के साथ मिलकर सरकार बनाएगी या फिर उसे सत्ता में आने से रोकने का दांव चलेगी? हालांकि, विजय के बढ़ते सियासी प्रभाव को रोकने के लिए राज्य के दो सबसे बड़े कट्टर प्रतिद्वंद्वी डीएमके और एआईएडीएमके हाथ मिला सकते हैं.
बीजेपी क्या पर्दे के पीछे से चल रही दांव
तमिलनाडु की सियासत में कांग्रेस और विजय की दोस्ती बीजेपी को रास नहीं आ रही है. कहा जा रहा है कि बीजेपी नहीं चाहती है कि कांग्रेस के साथ मिलकर विजय सरकार बनाएं. ऐसे में पर्दे के पीछे से डीएमके और AIADMK गठबंधन का तानाबाना बुन रही है.
हालांकि, डीएमके के प्रमुख एमके स्टालिन और पुराने नेता इस अजीब प्रयोग से डरे हुए हैं. उन्हें डर है कि इस बेमेल गठबंधन से समर्थकों के बीच भारी आक्रोश पैदा हो सकता है. इसीलिए डीएमके की तरफ से कहा गया है कि विजय को सरकार बनाने के लिए राज्यपाल को इजाजत देनी चाहिए, विजय के अगुवाई वाली सरकार को छह महीने तक का टाइम देना चाहते हैं.
विजय अलग ही चल रहे सियासी चाल
तमिलनाडु में जैसे ही डीएमके और AIADMK के बीच संभावित गठबंधन की खबरें फैलीं, विजय की पार्टी टीवीके ने बड़ा दांव चल दिया है. टीवीके ने घोषणा की है कि यदि DMK-AIADMK गठबंधन सरकार बनाने का दावा पेश करता है, तो उनके सभी 108 विधायक सामूहिक इस्तीफा दे देंगे।.यह कदम जनता और प्रशंसकों को सड़कों पर उतारने की एक सोची-समझी रणनीति मानी जा रही है.
तमिलनाडु विधानसभा में नंबर क्या है?
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है. तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन चाहिए. फिलहाल विजय की पार्टी टीवीके के पास सबसे अधिक 108 सीटें हैं.
वहीं, डीएमकी गठबंधन के पास 74 विधायक हैं, इनमें डीएमके 59, कांग्रेस पांच और अन्य पार्टी के 10 विधायक हैं. कांग्रेस के पास विधायक हैं, जिन्होंने टीवीके को समर्थन दे रखा है, लेकिन डीएमके के साथ लेफ्ट और मुस्लिम लीग का समर्थन बना हुआ है.
तमिलनाडु में एआईएडीएमके गठबंधन के पास यहां 53 सीटें हैं तो अन्य के पास 6 विधायक हैं. विजय को बहुमत के लिए 118 विधायक चाहिए. कांग्रेस के समर्थन के बाद भी टीवीके को 5 विधायकों का अतरिक्त समर्थन चाहिए. इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए वामपंथी दलों और वीसीके की सहमति जरूरी है. विजय ने पहले ही इन पार्टियों से संपर्क साधा है, लेकिन वे फिलहाल वेट एंड वॉच की स्थिति में हैं.
प्रमोद माधव