बीजेपी नेता स्मृति ईरानी ने विपक्ष के एंटी SIR प्रदर्शनों पर हमला बोला है. उन्होंने कहा है कि वे पारदर्शिता नहीं चाहते. वे जवाब नहीं चाहते. वे बस रिजीम चेंज चाहते हैं. उन्होंने कहा कि आखिर विपक्ष के नेता सुप्रीम कोर्ट में मार्च क्यों करते हैं. एक सामान्य भारतीय नागरिक क्या कहता है जब उसे
अदालत से इंसाफ चाहिए होता है, वो पिटीशन फाइल करता है. क्या आपने कभी सुना है कि 8000 लोग सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च कर रहे हैं.
इंडिया टुडे के साथ खास बातचीत में बीजेपी की राष्ट्रीय महामंत्री स्मृति ईरानी ने गुरुवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला. उन्होंने चुनाव आयोग के खिलाफ राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए उन्हें एक ऐसा "राजकुमार" बताया जो चुनाव जीतने के काबिल नहीं है, लेकिन एक दिन "राजा" बनने का सपना देखता है. स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी के इस रवैये को "राजनीतिक नखरा" करार दिया और कांग्रेस सांसद पर आरोप लगाया कि वे चुनाव के जरिए नहीं, बल्कि किसी और तरीके से नरेंद्र मोदी सरकार को सत्ता से हटाना चाहते हैं.
स्मृति ईरानी ने इस बात को खारिज किया कि राहुल गांधी के विरोध-प्रदर्शनों और विपक्षी दलों को एकजुट करने की उनकी कोशिशों ने सरकार को बैकफुट पर ला दिया है. उन्होंने कांग्रेस नेता पर चुनावी पारदर्शिता के बजाय सत्ता परिवर्तन की कोशिश करने का आरोप लगाया और उनके नेतृत्व, राजनीतिक रणनीति तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति उनके नजरिए पर सवाल उठाए.
ईरानी ने कहा, "हो सकता है कि उनके शब्दों का चयन अलग-अलग हो, लेकिन उनका टारगेट बिल्कुल साफ है. एक लोकतांत्रिक देश में सत्ता परिवर्तन, जहां मतदान प्रक्रिया के जरिए भारत की जनता उन लोगों को चुनती है जो संसद और सरकार में उनका प्रतिनिधित्व करते हैं. इसलिए, एक ऐसा 'राजकुमार' जिसे जनता कभी नहीं चुन सकती, लेकिन जो एक दिन 'सम्राट' बनने की उम्मीद पाले बैठा है, वह बस राजनीतिक नखरा कर रहा है और कुछ नहीं."
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह राहुल गांधी के विरोध-प्रदर्शनों को 'राजनीतिक नौटंकी' बता रही हैं, तो उन्होंने स्पष्ट किया, "मैंने कहा कि एक ऐसा 'प्रिंस इन वेटिंग' जो खुद को 'सम्राट' घोषित किए जाने की उम्मीद कर रहा है, वह राजनीतिक नखरा कर रहा है."
ईरानी ने दावा किया कि विपक्ष के कुछ नेताओं ने खुलकर कहा है कि उनका मकसद पारदर्शिता नहीं, जवाबदेही नहीं, बल्कि सत्ता परिवर्तन है. उन्होंने तर्क दिया कि लोकतंत्र में सरकार बदलने का काम केवल चुनाव के जरिए ही हो सकता है.
उन्होंने कहा, "इस देश में सरकार बदलने का एकमात्र तरीका चुनाव है. आप 90 करोड़ भारतीयों के अधिकारों को सिर्फ इसलिए नहीं छीन सकते क्योंकि प्रशांत भूषण अचानक उठकर कहें कि 'मुझे रिजीम चेंज चाहिए.' ऐसा नहीं हो सकता."
ईरानी ने कहा कि चुनाव आयोग के खिलाफ गांधी के अभियान को, भारतीय सत्ता के खिलाफ लड़ने संबंधी उनके पहले के बयानों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने 2025 में दिए गए गांधी के एक बयान का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव आयोग देश के लोकतांत्रिक ढांचे का एक अहम हिस्सा है, क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि नागरिक अपने प्रतिनिधियों को चुन सकें।
भाजपा नेता ने तर्क दिया, "यह कौन सुनिश्चित करता है कि हमारा लोकतंत्र जीवंत रहे और हम एक ऐसी सरकार चुनें जो भारत के लोगों की सोच-समझकर की गई पसंद हो? यह काम चुनाव आयोग करता है। इसलिए, राहुल गांधी ने खुद भारतीय सत्ता पर हमला करने की घोषणा कर दी है।"
भाजपा नेता ने विपक्ष के कुछ प्रदर्शनों के तौर-तरीकों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या लोकतांत्रिक विरोध के नाम पर पुलिसकर्मियों पर हमले और प्रधानमंत्री तथा सेना की आलोचना को सही ठहराया जा सकता है?
'वोट चोरी' का मुद्दा सिर्फ सुर्खियों के लिए
स्मृति ईरानी ने विपक्ष के 'वोट चोरी' के आरोपों को खारिज कर दिया. उन्होंने गांधी पर आरोप लगाया कि वे मीडिया का ध्यान खींचने के लिए इस मुद्दे का इस्तेमाल कर रहे हैं.
उन्होंने कहा, "वोट चोरी जैसे शब्दों का इस्तेमाल विपक्ष के एक ऐसे नेता ने किया है, जो न सिर्फ 'पॉलिटिकल फोटोबॉम्बिंग' में यकीन रखते हैं, बल्कि हमेशा सुर्खियां बटोरने की फिराक में भी रहते हैं."
पूर्व मंत्री ने तर्क दिया कि राजनीतिक दल और उनके प्रतिनिधि न केवल मतदाताओं के वेरिफिकेशन में, बल्कि वोटिंग और वोटों की गिनती में भी शामिल होते हैं. उन्होंने सवाल किया कि बिना किसी सबूत के चुनाव में हेराफेरी के आरोप कैसे टिक सकते हैं?
ईरानी ने बताया कि पोलिंग बूथों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के पोलिंग एजेंट मौजूद होते हैं, और वोटों की गिनती के दौरान भी उनके काउंटिंग एजेंट वहां होते हैं. उन्होंने कहा कि कांग्रेस और INDIA गठबंधन के अन्य दलों के प्रतिनिधि भी इन प्रक्रियाओं में शामिल थे.
उन्होंने केरल का जिक्र करते हुए दावा किया कि वहां के एक कांग्रेस नेता ने खुद माना है कि SIR प्रक्रिया से पारदर्शिता आई और इससे उनकी पार्टी को चुनाव जीतने में मदद मिली.
उन्होंने पूछा, "केरल कांग्रेस के नेता का कहना है कि SIR की वजह से पारदर्शिता आई और वे चुनाव जीत सके. तो क्या केरल कांग्रेस का नेतृत्व झूठ बोल रहा है?"
ईरानी ने विपक्ष के दावों को चुनौती देते हुए तेलंगाना, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक का भी उदाहरण दिया और पूछा कि इन राज्यों में किन दलों की सरकारें हैं.
उन्होंने तर्क दिया कि चुनावी प्रक्रिया में विपक्षी दलों की भागीदारी, राहुल गांधी और उनके सहयोगियों के दावों को कमजोर करती है.
aajtak.in