'परिसीमन बिल बिल्कुल स्वीकार्य नहीं...', डिलिमिटेशन पर राहुल गांधी की दो टूक

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से कहा कि परिसीमन बिल विपक्ष के लिए स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की.

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राहुल गांधी ने परिसीमन बिल को स्वीकार नहीं किया है( Photo: ITG) राहुल गांधी ने परिसीमन बिल को स्वीकार नहीं किया है( Photo: ITG)

मौसमी सिंह

  • नई दिल्ली,
  • 06 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 2:34 PM IST

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से कहा है कि परिसीमन (Delimitation) बिल विपक्ष को स्वीकार नहीं है. राहुल गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि सरकार राजनीतिक दलों से अलग-अलग मुलाकात करने के बजाय इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक क्यों नहीं बुला रही है. सूत्रों के मुताबिक, किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से उनके कक्ष में मुलाकात की थी. इस दौरान राहुल गांधी ने विपक्ष की दो प्रमुख मांगें- गृह मंत्री का बयान और राम मंदिर मुद्दे पर चर्चा दोहराते हुए कहा कि इन दोनों मांगों के पूरा होने पर ही संसद सुचारु रूप से चल सकती है.

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संसद के मॉनसून सत्र का हर दिन लगातार हंगामे की भेंट चढ़ता जा रहा है. बुधवार को भी जब यही स्थिति रही तो संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की थी. इस दौरान उन्हें सरकार की तरफ से कांग्रेस समेत विपक्ष को विशेष सत्र का प्रस्ताव दिया गया था.

सरकार ने कांग्रेस से कहा था कि 'सरकार 16,17,18 से संसद का विशेष सत्र परिसीमन बिल पर बुलाना चाहती है. सरकार के इस प्रस्ताव पर कांग्रेस ने कहा था की पार्टी और विपक्ष के दूसरे दलों से चर्चा करके बताएंगे.' 

क्या थी राहुल गांधी की दो मांगें?

इसके साथ ही यह खबर भी आई थी, कि राहुल गांधी व संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने मुलाकात कर डिलिमिटेशन बिल पर चर्चा की है. लेकिन राहुल गांधी ने दो मांगें रखी हैं. उन्होंने साफ किया कि अमित शाह के स्टेटमेंट और चढ़ावा चोरी पर चर्चा के बिना सदन की कार्यवाही नहीं चलेगी. इसके साथ ही कांग्रेस ने कहा कि आगे वह डिलिमिटेशन बिल पर अपना रुख जल्दी ही सरकार के साथ शेयर करेगी.

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ऐसा कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार परिसीमन बिल पर चर्चा के लिए संसद में विशेष सत्र बुला सकती है. मौजूदा मॉनसून सत्र 13 अगस्त को खत्म होगा, लेकिन इसके बाद सत्रावसान (प्रोरोगेशन) नहीं किया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर जल्द ही संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सके, हालांकि सरकार इसी प्लान पर चल रही है, ऐसा स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है.

बताया जा रहा है कि सरकार संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए दोनों सदनों में जरूरी दो-तिहाई बहुमत सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रही है. सूत्रों का कहना है कि जैसे ही पर्याप्त समर्थन का भरोसा मिलेगा, 16 अगस्त से तीन दिन का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है. हालांकि, इस संबंध में सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.

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