सुबह मार्च, शाम को धरना और रात में हिरासत... CEC पर राहुल के मेगा प्रोटेस्ट में क्या-क्या हुआ?

6 अक्टूबर को राहुल गांधी की अगुवाई में INDIA ब्लॉक ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद से चुनाव आयोग तक मार्च निकाला. लेकिन राहुल का काफिला आकाशवाणी भवन के पास ही रुक गया. राहुल गांधी दिन भर इस प्रदर्शन के केंद्र में रहे. नेता प्रतिपक्ष ने पुलिस बैरिकेड पर चढ़कर तिरंगा लहराया और CEC की इस्तीफे की हुंकार भरते हुए कहा- ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो... करीब 8 घंटे बाद राहुल-प्रियंका समेत कई नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया.

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राहुल गांधी और प्रियंका 8 घंटे तक आकाशवाणी भवन में धरने पर बैठे रहे.  (Photo: ITG) राहुल गांधी और प्रियंका 8 घंटे तक आकाशवाणी भवन में धरने पर बैठे रहे. (Photo: ITG)

मौसमी सिंह / ऐश्वर्या पालीवाल

  • नई दिल्ली,
  • 06 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:15 PM IST

नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को नई दिल्ली स्थित आकाशवाणी भवन से दिल्ली पुलिस ने रात आठ बजे के लगभग हिरासत में ले लिया. राहुल गांधी समेत INDIA ब्लॉक के कई नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने की मांग को लेकर मंगलवार सुबह 11 बजे से प्रदर्शन कर रहे थे. INDIA ब्लॉक SIR में कथित गड़बड़ियों की मांग को लेकर देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है. 

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मंगलवार को रात 8 बजे के लगभग दिल्ली पुलिस ने आकाशवाणी भवन में कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लेना शुरू किया. सबसे पहले दीपेन्दर हुड्डा, पवन खेड़ा और चरणजीत सिंह चन्नी को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया और उन्हें एक बस में ले गई. कांग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस पहले ही उठा उठाकर बस में डालने लगी. 

इसके बाद पुलिस ने TMC सांसद महुआ मोइत्रा, डेरेक ओ ब्रायन को भी हिरासत में लकर बस में बिठा दिया. 

इसके बाद दिल्ली पुलिस की टीम ने प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी हिरासत में लिया. तस्वीरों में पुलिस नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बस में ले जाते हुए दिख रही है. बाद में गांधी को बस की खिड़की से बाहर झांकते हुए देखा गया, जब पुलिसकर्मियों की एक बड़ी संख्या ने गाड़ी को घेर रखा था.

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ताजा जानकारी के अनुसार राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को दिल्ली पुलिस किंग्सवे कैंप लेकर गई है. यहां कुछ देर के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें रिहा कर दिया गया. इसके बाद राहुल-प्रियंका अपनी कार में बैठकर रवाना हो गए.

बैरिकेड पर राहुल, हाथ में तिरंगा

मंगलवार को राहुल गांधी विपक्ष के सड़क पर हो रहे विरोध प्रदर्शन के केंद्र में रहे. उन्होंने सैकड़ों समर्थकों और विपक्षी सांसदों के साथ पास ही स्थित चुनाव आयोग के दफ्तर की ओर मार्च करने की कोशिश की. इस दौरान राहुल के साथ अखिलेश यादव, अभिषक बनर्जी, जया बच्चन, महुआ मोइत्रा जैसे दिग्गज नेता शामिल थे. इस दौरान पार्लियामेंट स्ट्रीट पर पूरी तरह से आवाजाही बंद हो गई.

इस दौरान राहुल के हाथ में एक तख्ती थी, जिस पर लिखा- ज्ञानेश इट्स डन ब्रो.

यह भी पढ़ें: 'ज्ञानेश, इट्स डन ब्रो...', Gen-Z अंदाज में राहुल गांधी का CEC पर तंज

तभी पुलिस सक्रिय हुई. विपक्ष के नेताओं को बसों में बिठाया जा रहा था, कुछ कांग्रेस नेता जा चुके थे और मंगलवार को चुनाव आयोग की ओर INDIA गठबंधन का विरोध मार्च लगभग खत्म हो चुका था. सब कुछ एक तय तरीके से हो रहा था. लेकिन फिर कुछ अलग हुआ.

दोपहर के करीब कांग्रेस नेता राहुल गांधी नीति आयोग के दफ्तर के पास एक बैरिकेड पर चढ़े और तिरंगा लहराया, जबकि कैमरे उनकी तस्वीरें ले रहे थे. फिर वे नीचे उतरे, और पुलिस ने उन सांसदों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया जो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मार्च रोके जाने के बाद सड़क पर बैठ गए थे.

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राहुल ने ऐसे बदला मौहाल

लेकिन राहुल गांधी जिन्हें अभी बस में नहीं बिठाया गया था ने जल्द ही माहौल बदल दिया. 

राहुल ने बस के अंदर बैठी अपनी बहन प्रियंका गांधी वाड्रा से बात की. इसके बाद, वे दोपहर करीब 12:20 बजे आकाशवाणी भवन के रिसेप्शन गेट की ओर तेजी से बढ़े, जिससे कई विपक्षी सांसद, जिनमें उनकी अपनी पार्टी के कुछ सांसद भी शामिल थे, हैरान रह गए.

तब तक सारी हलचल संसद मार्ग पर हो रही थी, जहां सुरक्षाकर्मियों ने संसद भवन परिसर से चुनाव आयोग के मुख्यालय की ओर जा रहे मार्च को रोक दिया था.

प्रियंका गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन और महुआ मोइत्रा, और CPI(M) के सांसद जॉन ब्रिटास उन लोगों में शामिल थे जिन्हें बसों में बिठाया गया था.

आकाशवाणी भवन के अंदर धरने पर राहुल-प्रियंका (Photo: PTI)

कई नेताओं के हिरासत में लिए जाने और दूसरों के चले जाने के कारण, इस बात का कोई संकेत नहीं था कि विरोध प्रदर्शन आकाशवाणी के परिसर में जाने वाला है.

आकाशवाणी भवन के गेट नंबर 3 के पास रिसेप्शन गेट पर, कर्मचारियों ने राहुल गांधी को अंदर जाने से रोकने की कोशिश की, जिससे तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई. आखिरकार वे अपने सुरक्षाकर्मियों के साथ अंदर चले गए.

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दोपहर करीब 12:30 बजे, प्रियंका गांधी बस से उतरीं, गेट की ओर गईं और अपने भाई के साथ प्रदर्शन में शामिल हो गईं. 

दोनों गेट नंबर 4 के पास एक बरगद के पेड़ के नीचे बैठ गए. तभी ब्रॉडकास्टिंग हाउस के कर्मचारी बाहर हो रहे इस घटनाक्रम को देखने के लिए बाहर दौड़े.

राहुल के साथ सेल्फी

सुरक्षाकर्मियों द्वारा रोके जाने से पहले कई लोगों ने गांधी के साथ सेल्फी ली. कुछ लोग नज़ारा देखने के लिए इमारत की छत पर चढ़ गए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें नीचे आने के लिए कहा. बाहर, कांग्रेस नेता रिसेप्शन के गेट पर जमा होने लगे और गांधी से अंदर मिलने की कोशिश करने लगे.

लेकिन आकाशवाणी भवन के गेट पर पुलिस का सख्त पहरा था. 

दोपहर करीब 12:45 बजे, पार्टी के जनरल सेक्रेटरी के.सी. वेणुगोपाल और राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा गेट पर पहुंचे और अंदर जाने की इजाज़त मांगी. नई दिल्ली के डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (DCP) सचिन शर्मा मौके पर पहुंचे और नेताओं से बातचीत की, जिसके बाद वे अंदर चले गए.

ग्रिल के अंदर प्रशसंकों से मिलते हुए राहुल गांधी (Photo: PTI)

कांग्रेस सांसद प्रणति शिंदे, दीपेंद्र हुड्डा और चरणजीत सिंह चन्नी, और सेवा दल के प्रमुख श्रीनिवास बी.वी. भी वहां मौजूद थे. गांधी के स्टाफ़ मेंबर अलंकार सवाई और श्रीवत्सा भी अंदर थे. 

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इधर जॉन ब्रिटास समेत कई सांसद हिरासत से रिहा होने के बाद विरोध प्रदर्शन वाली जगह पर लौट आए. जिन नेताओं को बसों में ले जाया गया था, वे भी वापस आ गए. आकाशवाणी भवन में कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं की भीड़ जमी रही.

तबतक राहुल गांधी ने बरगद के पेड़ के नीचे प्रदर्शन का पक्का प्लान बना लिया था. दोपहर तक पेड़ के नीचे ज़मीन पर मैट बिछाए गए, फिर गद्दे मंगाए गए और राहुल की मंडली वहां बैठ गई. 

राहुल गांधी ज़्यादातर बैठे रहे, जबकि प्रियंका गांधी पुलिस से बातचीत करती रहीं. 

आलू के चिप्स, भुजिया और चॉकलेट के पैकेट

अंदर मौजूद लोगों के लिए खाने-पीने की चीज़ें आने लगीं. 

नीति आयोग के बाहर एक दुकान से कांग्रेस कार्यकर्ता आलू के चिप्स, भुजिया और चॉकलेट के पैकेट, साथ ही पानी की बोतलें और सॉफ्ट ड्रिंक्स ले आए. पटेल चौक से डाइट कोक और मशहूर खान चाचा ईटरी से रोल मंगाए गए.

सूरज ढलने के बाद भी वे लगभग घंटे से ज़्यादा समय तक AIR परिसर के अंदर डटे रहे और पुलिस के साथ आमना-सामना करते रहे. पुलिस प्रदर्शनकारियों को चुनाव आयोग के दफ्तर तक पहुंचने से रोकने के लिए शांति से लेकिन मजबूती से डटी रही.

बाद में कांग्रेस नेता श्रीनिवास को उस जगह के आस-पास इस्तेमाल किए गए पैकेट साफ़ करते देखा गया जहां नेता जमा हुए थे. शाम को मच्छर भगाने वाली क्रीम  भी अंदर लाई गई.

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एक समय आकाशवाणी भवन के बाहर भीड़ बढ़ गई क्योंकि कांग्रेस कार्यकर्ता जमा हो गए और राहुल गांधी के समर्थन में नारे लगाने लगे.

दोपहर करीब 2:30 बजे जब गांधी अंदर से पत्रकारों से बात कर रहे थे तो उन्होंने ग्रिल के ज़रिए अपने माइक्रोफ़ोन आगे बढ़ाए.

यह देशद्रोह है- राहुल गांधी

उन्होंने कहा, "मुझे परवाह नहीं कि बीजेपी क्या कहती है. मैं यहां लोकतंत्र की रक्षा के लिए खड़ा हूं."

गांधी ने आरोप लगाया, "देश के साथ जो किया गया है, वह देशद्रोह है. चाहे पीएम मोदी हों, शाह हों, आरएसएस प्रमुख हों या ज्ञानेश कुमार, किसी को बख्शा नहीं जाएगा." 

दो घंटे बाद गांधी ने फिर से पत्रकारों से बात की और साफ़ किया कि जब तक चुनाव आयोग 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन के सभी सांसदों के साथ बैठक करने का वादा नहीं करता, तब तक वे वहां से नहीं हटेंगे.

इधर चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि उन्हें किसी भी राजनीतिक दल से बैठक के लिए कोई अनुरोध नहीं मिला है. 

चुनाव आयोग ने कहा कि उन्हें मीडिया के माध्यम से यह पता चला कि कुछ सांसद अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ आयोग से मिलना चाहते हैं. मंगलवार के घटनाक्रम के संबंध में आयोग यह स्पष्ट करना चाहता है कि मंगलवार शाम 4 बजे तक किसी भी राजनीतिक दल ने अपने प्रतिनिधियों के माध्यम से निर्वाचन आयोग से बैठक के लिए समय नहीं मांगा था. इसके बाद शाम लगभग 4 बजे दिल्ली पुलिस से सूचना मिली कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसदों का एक प्रतिनिधिमंडल आयोग से मिलना चाहता है और ज्ञापन सौंपना चाहता है. चुनाव आयोग ने कहा है कि दोनों पक्षों की आपसी सहमति से तय किए गए समय पर ही मुलाकात होगी. 

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SIR पर खुलासे के बाद शुरू हुआ प्रदर्शन

 INDIA ब्लॉक का यह मार्च नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं के उन विरोध प्रदर्शनों की कड़ी में एक और कदम था, जो मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. यह मांग 25 सितंबर को 'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के बाद शुरू हुई थी, जिसमें SIR प्रक्रिया में गड़बड़ियों और चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेदों का संकेत दिया गया था.

विपक्ष का आरोप है कि CEC कुमार सरकार के इशारे पर काम कर रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चुनाव प्रक्रिया सत्ताधारी पार्टी के पक्ष में हो. 
 

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