कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की PM नरेंद्र मोदी पर पटना में की गई टिप्पणी सियासी हलचल का सबब बन गई है. खड़गे ने रविवार को पटना में एक दर्शक की बातों पर प्रतिक्रिया दी थी. जिसने कहा था कि मोदी नहीं जाएगा. इस पर कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा था कि उनका बाप भी जाएगा. इस बयान को मुद्दा बताकर बीजेपी सोमवार को देशव्यापी प्रदर्शन कर रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कांग्रेस के आपत्तिजनक बयानों को देखे तो हम पाते हैं कि निजी हमले करना कांग्रेस और उसके नेताओं को कई बार भारी पड़ता नजर आया है. ऐसे कई मौकों पर बीजेपी ने इसे पीएम मोदी की पृष्ठभूमि और उनका निजी अपमान बताया और इसे चुनावी मुद्दा बना दिया. इन विवादित बयानों के बाद हुए चुनाव में बीजेपी ने जीत हासिल की है.
ऐसे विवादित बयानों का इतिहास 2007 तक जाता है. जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और 2002 में हुए गोधरा दंगों के बाद दूसरी बार चुनाव लड़ रहे थे.
यही नहीं 2014 में मणिशंकर अय्यर के 'चाय बेचने' वाला तंज, 'नीच आदमी', राहुल गांधी के 'चौकीदार चोर है' वाले बयान तक कांग्रेस को कई चुनावों में हार का सामना करना पड़ा. हालांकि इन नतीजों के पीछे दूसरे राजनीतिक और सामाजिक कारण भी रहे. आइए, उन चुनावी प्रसंगों को समझते हैं, जब मोदी पर हमले कांग्रेस के लिए उलटे पड़ते नजर आए.
1. 2007: सोनिया गांधी का 'मौत का सौदागर' वाला बयान
गुजरात विधानसभा चुनाव 2007 में तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने नरेंद्र मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए 'मौत के सौदागर' शब्द का इस्तेमाल किया था. सोनिया गांधी ने राज्य सरकार पर 2002 के दंगों और सोहराबुद्दीन एनकाउंटर जैसे विवादों के संदर्भ में ‘मौत और भय का सौदागर’ होने का आरोप लगाया था. बीजेपी ने इसे मोदी पर व्यक्तिगत हमले के रूप में पेश किया और चुनाव प्रचार में इसका इस्तेमाल किया.
यह टिप्पणी गुजरात सरकार के संदर्भ में थी और बीजेपी ने इसे सीधे मोदी के खिलाफ मुद्दा बना दिया. मोदी ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर आतंकवाद के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया. बीजेपी ने इस बयान को गुजरात के सम्मान से जोड़कर चुनाव प्रचार में इस्तेमाल किया.
विधानसभा चुनाव के नतीजों में बीजेपी ने 182 में से 117 सीटें जीतकर सत्ता बरकरार रखी, जबकि कांग्रेस 59 सीटों पर रह गई. सोनिया गांधी के बयान को बीजेपी ने बड़ा चुनावी हथियार बनाया.
2. 2014: मणिशंकर अय्यर का चाय बेचने वाला तंज
लोकसभा चुनाव 2014 से पहले जनवरी में कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने NDA की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला किया था. नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की संभावना को खारिज करते हुए अय्यर ने कहा था कि मोदी 21वीं सदी में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते. उन्होंने यह भी कहा कि अगर मोदी चाहें तो कांग्रेस के सम्मेलन में उनके लिए चाय बेचने का इंतजाम किया जा सकता है.
अय्यर ने सीधे 'चायवाला' शब्द का इस्तेमाल करने से बाद में इनकार किया, लेकिन उनके बयान को बीजेपी ने मोदी की साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि का मजाक उड़ाने के तौर पर पेश किया. मोदी ने चाय बेचने के अपने अनुभव को चुनावी अभियान का हिस्सा बनाया और खुद को आम लोगों से जुड़ा नेता बताया.
मई 2014 में बीजेपी ने 282 सीटें जीतकर अपने दम पर बहुमत हासिल किया. कांग्रेस 44 सीटों पर सिमट गई. अय्यर का बयान बीजेपी के प्रचार में जरूर काम आया, लेकिन मोदी लहर, यूपीए सरकार के खिलाफ नाराजगी और नेतृत्व जैसे बड़े कारक भी इस चुनाव में निर्णायक रहे.
3. 2017: 'नीच आदमी' कहकर अय्यर ने फिर दिया मौका
गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 के प्रचार के दौरान मणिशंकर अय्यर ने मोदी को 'नीच आदमी' कहा. बाद में उन्होंने शब्द के अर्थ को लेकर सफाई दी और माफी भी मांगी. कांग्रेस ने अय्यर को पार्टी से निलंबित कर दिया. मोदी ने इस टिप्पणी को गुजरात और अपनी सामाजिक पृष्ठभूमि के अपमान के रूप में पेश किया. उन्होंने चुनावी सभाओं में कहा कि जनता वोट के जरिए इसका जवाब देगी.
इस चुनाव के नतीजों में बीजेपी ने फिर जीत हासिल की. बीजेपी 99 सीटें जीतकर सरकार बनाने में सफल रही, जबकि कांग्रेस को 77 सीटें मिलीं. ये मुकाबला 2007 की तुलना में कहीं ज्यादा करीबी था, लेकिन अय्यर के बयान ने कांग्रेस को रक्षात्मक स्थिति में जरूर ला दिया.
4. 2019: राहुल गांधी का 'चौकीदार चोर है' बनाम 'मैं भी चौकीदार'
2019 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी ने राफेल लड़ाकू विमान के सौदे को लेकर मोदी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए. इसी अभियान के दौरान राहुल ने 'चौकीदार चोर है' का नारा दिया है.
बीजेपी ने इसका जवाब 'मैं भी चौकीदार' अभियान से दिया. मोदी समर्थकों ने सोशल मीडिया पर अपने नाम के आगे 'चौकीदार' लिखना शुरू किया और बीजेपी ने इस नारे को ईमानदारी और देश की सुरक्षा से जोड़ने की कोशिश की.
2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने प्रचंड जीत हासिल की. पार्टी को 303 सीटें मिली. जबकि कांग्रेस को सिर्फ 52 सीटें मिलीं. राफेल सौदे पर कांग्रेस का अभियान मोदी सरकार को सत्ता से हटाने में सफल नहीं हुआ. हालांकि चुनावी नतीजों को केवल इस नारे से जोड़ना सही नहीं होगा. बालाकोट हमला, राष्ट्रीय सुरक्षा, मोदी की लोकप्रियता और विपक्ष की रणनीति भी इस चुनाव के नतीजों को तय करने में अहम कारक रहे.
5. 2025: बिहार चुनाव में मां पर टिप्पणी का विवाद
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राहुल गांधी की अगुवाई वाली 'वोटर अधिकार यात्रा' के दौरान दरभंगा में प्रधानमंत्री मोदी और उनकी दिवंगत मां को लेकर कथित तौर पर अपमानजनक नारे लगाए गए. इस घटना पर बीजेपी ने कांग्रेस से माफी की मांग की. राहुल गांधी उस समय मंच पर मौजूद नहीं थे, लेकिन विवाद ने कांग्रेस और RJD के नेतृत्व वाले महागठबंधन को असहज स्थिति में डाल दिया.
इसके बाद बिहार कांग्रेस के सोशल मीडिया अकाउंट से प्रधानमंत्री और उनकी मां को लेकर एक AI वीडियो पोस्ट किया गया. बीजेपी ने इसे अपमानजनक बताते हुए विरोध किया, जबकि कांग्रेस ने वीडियो का बचाव किया. इस विवाद ने चुनावी माहौल में निजी टिप्पणियों को लेकर नई बहस छेड़ दी.
बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे महागठबंधन के लिए बेहद निराशाजनक रहे. NDA ने 202 सीटें जीत लीं. बीजेपी को 89 और JDU को 85 सीटें मिलीं. दूसरी ओर RJD 25 सीटों और कांग्रेस महज 6 सीटों पर सिमट गई.
इन घटनाओं में एक समान राजनीतिक पैटर्न दिखाई देता है. कांग्रेस के नेताओं के बयान बीजेपी को मोदी की साधारण पृष्ठभूमि, गुजरात के सम्मान और प्रधानमंत्री के व्यक्तिगत अपमान जैसे मुद्दों से जोड़ दिया और पलटवार किया.
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