आधार कार्ड बनवाने के लिए लोग सेंटर के चक्कर लगाते हैं. कभी नाम में गलती सुधरवानी होती है, कभी पता बदलवाना होता है. फिर इंतजार होता है कि कार्ड घर तक पहुंचे. लेकिन सोचिए, जिस कार्ड को डाक के जरिए घर पहुंचना था, वह कई किलोमीटर दूर कूड़े के ढेर में पड़ा मिले? यह मामला तमिलनाडु के तिरुप्पुर जिले का है.
यहां पल्लडम के पास अरिवोली नगर इलाके में सड़क किनारे पड़े कूड़े से 300 से ज्यादा मूल आधार कार्ड मिले हैं. इनमें ज्यादातर कार्ड स्कूली बच्चों के नाम पर बताए जा रहे हैं. कई कार्ड बुजुर्गों और महिलाओं के भी हैं.
कार्डों के साथ डाक के लिफाफे भी मिले हैं. यानी जिन दस्तावेजों को उनके असली मालिकों तक पहुंचना था, वे कूड़े के ढेर में पड़े थे. मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने राजस्व विभाग को इसकी सूचना दी. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इतने सारे आधार कार्ड यहां पहुंचे कैसे?
घटना पल्लडम के पास अरिवोली नगर इलाके की है. स्थानीय लोग वहां से गुजर रहे थे, तभी उनकी नजर सड़क किनारे जमा कूड़े में बिखरे आधार कार्डों और डाक के लिफाफों पर पड़ी. पहले कुछ कार्ड दिखाई दिए, लेकिन पास जाकर देखने पर बड़ी संख्या में कार्ड नजर आए.
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बताया गया कि वहां 300 से ज्यादा आधार कार्ड पड़े थे. इसके बाद लोगों ने मामले की जानकारी राजस्व विभाग को दी. यह कोई एक-दो कार्डों के खो जाने का मामला नहीं था. इतनी बड़ी संख्या में पहचान दस्तावेजों का एक ही जगह मिलना अपने आप में सवाल खड़े करता है. कूड़े में मिले ज्यादातर आधार कार्ड स्कूली बच्चों के नाम पर जारी किए गए बताए जा रहे हैं. इनके अलावा महिलाओं और बुजुर्गों के कार्ड भी मिले हैं.
कूड़े में मिले आधार कार्डों पर अविनाशी और उसके आसपास के इलाकों के पते दर्ज हैं. ये इलाके तिरुप्पुर जिले में ही आते हैं, लेकिन पल्लडम के अरिवोली नगर से अलग हैं. यानी कार्डों पर दर्ज पते एक इलाके के हैं, जबकि वे मिले दूसरे इलाके में. उनके साथ डाक के लिफाफे मिलने से यह सवाल और अहम है कि डिलीवरी में आखिर हुआ क्या था.
क्या कार्ड डाक विभाग के जरिए लोगों तक पहुंचाए जाने थे और बीच में कहीं लापरवाही हुई? क्या उन्हें किसी दूसरी जगह से लाकर यहां फेंका गया? या इसके पीछे कोई और वजह है? इन सवालों के जवाब जांच से ही सामने आ सकेंगे. स्थानीय लोगों ने कार्ड मिलने की सूचना राजस्व विभाग को दी है. मामले में आगे की जांच से ही पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी.
अपूर्वा जयचंद्रन