दक्षिण भारत में जल्द ही मौसम का मिजाज बदलने वाला है. अगले 2 से 3 दिनों में दक्षिणी प्रायद्वीप पर पूर्वोत्तर मानसून की शुरुआत होने वाली है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार को जानकारी दी है.
मौसम विभाग ने बताया है कि देश के बाकी हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की प्रक्रिया लगातार जारी है. पूर्वोत्तर मानसून के आने के साथ ही अगले पांच से छह दिनों के दौरान दक्षिणी प्रायद्वीप में लंबे समय तक बारिश का दौर जारी रह सकता है.
IMD के मुताबिक, 15 से 18 अक्टूबर के दौरान केरलम, माहे, तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तमिलनाडु, पुड्डूचेरी, कराईकल और तटीय आंध्र प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश होने की उम्मीद है.
इसके अलावा, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक में 17 और 18 अक्टूबर को, जबकि रायलसीमा क्षेत्र में 15 और 16 अक्टूबर को ऐसी ही भारी बारिश का अनुमान जताया गया है.
भारत में मानसून के दो रूप
भारत में दो तरह के मानसून होते हैं. पहला दक्षिण-पश्चिम मानसून है, जो जून से सितंबर तक रहता है. ये जून के आसपास दक्षिण-पश्चिमी तट पर केरलम में दस्तक देता है और फिर पूरे देश में फैलता है. ये भारत को प्रभावित करने वाला मुख्य मानसून है, जो न सिर्फ गर्मी से राहत दिलाता है बल्कि देश की पारिस्थितिकी और कृषि (खासतौर से खरीफ फसलों) के लिए बेहद जरूरी है.
दूसरा पूर्वोत्तर मानसून है, जिसे लौटता हुआ मानसून भी कहा जाता है. ये अक्टूबर से दिसंबर तक रहता है और प्रायद्वीपीय भारत को प्रभावित करता है. ये दक्षिण-पश्चिम मानसून जितना तीव्र नहीं होता, लेकिन रबी फसलों की पैदावार के लिए बहुत जरूरी माना जाता है.
अल नीनो के कारण कम हुई बारिश
इस साल का दक्षिण-पश्चिम मानसून 759.4 मिमी बारिश के साथ खत्म हुआ, जो सामान्य 868.6 मिमी से 12.6 प्रतिशत कम रहा. बारिश में इस कमी की वजह भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में बनी अल नीनो की स्थिति रही, जो जून में शुरू हुई थी और तब से लगातार मजबूत हो रही है.
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विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) जैसी वैश्विक एजेंसियों ने भविष्यवाणी की है कि इस साल अल नीनो दिसंबर 2026 में अपने चरम पर पहुंच सकती है, जो 1950 में रिकॉर्ड शुरू होने के बाद से सबसे मजबूत हो सकती है. अनुमान है कि एल नीनो की स्थिति फरवरी 2027 तक बनी रह सकती है.
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