'कान खोलकर सुन लो, भारत बांग्लादेश नहीं', किरेन रिजिजू ने रिजीम चेंज पर चेताया

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने रिजीम चेंज की बात करने वालों को चेतावनी देते हुए कहा कि भारत बांग्लादेश नहीं है. उनका जवाब नेहा बोरा, प्रशांत भूषण और पवन खेड़ा के बयानों के बीच आया, जबकि खेड़ा ने साफ किया कि भारत में बदलाव केवल चुनावों के जरिए होना चाहिए.

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नेहा बोरा, प्रशांत भूषण और पवन खेड़ा ने 'रिजीम चेंज' जैसी बातें की थी. (Photo- ITG) नेहा बोरा, प्रशांत भूषण और पवन खेड़ा ने 'रिजीम चेंज' जैसी बातें की थी. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 5:29 PM IST

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 'रिजीम चेंज' यानी सरकार बदलने की बात करने वालों को सख्त संदेश दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा, "बड़े आए 'रिजीम चेंज' करने वाले! कान खोलकर सुन लो, भारत बांग्लादेश नहीं है." रिजिजू ने भारतीय युवाओं को लेकर भी अपनी बात रखी और कहा कि देश के युवा भारत को बनाएंगे, उसे बर्बाद नहीं करेंगे.

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केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने अपने पोस्ट में लिखा, "भारतीय युवा मूर्ख नहीं हैं. वे भारत का निर्माण करेंगे, भारत को बर्बाद नहीं करेंगे. देश के सभी सच्चे युवा मेडल जीत रहे हैं, स्किलिंग, इनोवेशन, स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं और सांस्कृतिक आइकन बन रहे हैं."

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नेहा बोरा ने बांग्लादेश के Gen-Z आंदोलन का किया था जिक्र

किरेन रिजिजू का यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की अध्यक्ष नेहा बोरा, वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने 'रिजीम चेंज' को लेकर बयान दिए हैं. 14 अक्टूबर को सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन में नेहा बोरा ने बांग्लादेश के Gen-Z छात्र आंदोलन का जिक्र किया था.

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नेहा बोरा ने कहा था, "हम आपको सेल्यूट करते हैं. हम जानते हैं कि देश में हर जगह जो Gen-Z आंदोलन दिख रहा है, उसकी शुरुआत सबसे पहले बांग्लादेश में हुई थी. हमें रास्ता दिखाने और देश के युवाओं के साथ एकजुटता जताने के लिए आपका शुक्रिया. हम जानते हैं कि बांग्लादेश में शुरू हुआ आंदोलन लोकतंत्र और वोट के अधिकार के लिए था."

प्रशांत भूषण ने कहा- यह रिजीम चेंज की लड़ाई है

15 अक्टूबर को दिल्ली में एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने 'रिजीम चेंज' की बात कही थी. उन्होंने कहा था, "यह रिजीम चेंज की लड़ाई है. हम तानाशाही स्वीकार नहीं करेंगे. हम आज यहां खुले तौर पर कह रहे हैं कि यह रिजीम चेंज की लड़ाई है और हम इसे करके दिखाएंगे."

इस शब्द के इस्तेमाल पर सवाल पूछे जाने पर प्रशांत भूषण ने कहा था, "हम सभी रिजीम चेंज चाहते हैं. क्या इसमें कुछ गलत है?" उन्होंने सरकार बदलने की मांग को नागरिकों का लोकतांत्रिक अधिकार बताया था.

पवन खेड़ा ने कहा- चुनाव के जरिए बदलेगी सरकार

16 अक्टूबर को कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने भी 'रिजीम चेंज' शब्द का इस्तेमाल किया था. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बांग्लादेश जैसे रिजीम चेंज की साजिश वाले आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए खेड़ा ने कहा था कि कांग्रेस का मकसद इस सरकार को हराना, उसे सत्ता से हटाना और व्यवस्था बदलना है.

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राजनाथ सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए पवन खेड़ा ने कहा था, "हम खुले तौर पर कह रहे हैं कि हम रिजीम चेंज चाहते हैं. 1977 में क्या हुआ था? क्या तब रिजीम चेंज नहीं हुआ था? जब भी विपक्ष सड़कों पर उतरता है और आंदोलन होता है, तो रिजीम चेंज होता है."

खेड़ा ने यह भी स्पष्ट किया था कि भारत जैसे लोकतंत्र में सरकार बदलने का रास्ता चुनाव है. उन्होंने कहा था, "चुनाव के जरिए रिजीम बदलना ही विपक्ष का मकसद है. इसके अलावा उसका और क्या मकसद हो सकता है?" उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस का अंतिम लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि भारत बांग्लादेश के रास्ते पर न जाए.

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