धरना, वार्ता और हिरासत... PM आवास के बाहर 6 घंटे तक चले सियासी घमासान की पूरी टाइमलाइन

नीट विवाद और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में पीएम आवास के बाहर विपक्ष का बड़ा धरना हुआ. दिनभर चले घटनाक्रम में सरकार से बातचीत, तीखी बयानबाजी, पुलिस कार्रवाई और नेताओं की हिरासत तक क्या-क्या हुआ, पढ़िए पूरी टाइमलाइन.

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पीएम आवास के बाहर सड़क पर बैठे राहुल गांधी को जबरन उठाती दिल्ली पुलिस. (Photo: PTI) पीएम आवास के बाहर सड़क पर बैठे राहुल गांधी को जबरन उठाती दिल्ली पुलिस. (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 11:46 PM IST

नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के खिलाफ मंगलवार को दिल्ली की सड़कों पर जबरदस्त सियासी हंगामा देखने को मिला. मौका कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे  के जन्मदिन का था, लेकिन उन्होंने खुद ऐलान किया कि यह जश्न का नहीं बल्कि सरकार से जवाबदेही मांगने का दिन है. इसके बाद दोपहर के वक्त लोक कल्याण मार्ग पर जब गाड़ियों की आवाजाही सामान्य रूप से चल रही थी, तभी अचानक प्रधानमंत्री आवास के पास खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव समेत देश के कई बड़े नेता एक साथ सड़क पर धरने पर बैठ गए.

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जन्मदिन के ही दिन खड़गे की अगुआई में निकले इस अचानक मार्च से पुलिस-प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया. केंद्रीय मंत्री से बातचीत के दौर, शर्तों पर तकरार, सड़क पर जोर-आजमाइश से लेकर देर रात सोनिया गांधी की सरप्राइज एंट्री तक, लगभग 6 घंटे चले इस पूरे हाई-वोल्टेज ड्रामे की कहानी बेहद दिलचस्प है

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत दोपहर करीब 3:30 बजे हुई. मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास के बाहर अचानक हलचल बढ़ी, फिर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की अगुआई में विपक्षी सांसदों का बड़ा काफिला बाहर निकला. पिछले दिन जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में यह मार्च निकाला गया था. यह काफिला बिना किसी पूर्व सूचना के सीधे प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ गया. जब तक सुरक्षा में तैनात पुलिस बल स्थिति को समझ पाता, तब तक तो तमाम दिग्गज नेता लोक कल्याण मार्ग की सड़क पर बैठ चुके थे. देखते ही देखते इस वीवीआईपी इलाके में गाड़ियों का आना-जाना पूरी तरह थम गया और चारों तरफ से नारेबाजी होने लगी.

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कांग्रेस की 5 मांगें और मौके पर RAF की तैनाती

सड़क पर बैठते ही कांग्रेस ने सरकार के सामने अपनी 5 प्रमुख मांगें रख दीं. इनमें पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा थी. इसके अलावा गृह मंत्री का संसद के दोनों सदनों में बयान, परीक्षा प्रणाली और धांधली पर सीधी चर्चा, प्रदर्शनकारी छात्रों की बात सुनना और एक दिन पहले हुए लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच शामिल थी. इलाके में बढ़ता तनाव देखकर दिल्ली पुलिस के साथ-साथ लाठियों से लैस रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों को तैनात कर दिया गया. मौके पर मौजूद विपक्षी नेताओं ने एक-दूसरे का हाथ मजबूती से थामकर एक इंसानी घेरा बना लिया, ताकि पुलिस उन्हें आसानी से वहां से हटा न सके.  कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि यह प्रदर्शन विपक्ष की मजबूत एकजुटता को दिखाता है.

सरकार की तरफ से वार्ता की कोशिश, पर शर्त पर फंसा पेच

वीवीआईपी ज़ोन में सुरक्षा के साथ-साथ आवाजाही के संकट को देखते हुए सरकार की ओर से बातचीत की पहल हुई. शाम करीब 4:32 बजे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन खुद धरना स्थल पहुंचे. उन्होंने खड़गे और राहुल गांधी से बात करते हुए आग्रह किया कि यह जगह सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं है, इसलिए प्रदर्शन समाप्त किया जाए.

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वार्ता के दौरान राहुल गांधी ने कहा कि अगर सरकार संसद में नीट के मुद्दे पर चर्चा कराने को तैयार होती है, तो वे धरना खत्म कर देंगे. जितेंद्र सिंह ने गृह मंत्री अमित शाह से परामर्श करने के बाद राहुल गांधी को आश्वस्त किया कि सरकार संसद में इस विषय पर चर्चा कराने को पूरी तरह तैयार है. हालांकि, जैसे ही सरकार ने चर्चा का भरोसा दिया, राहुल गांधी ने इसके साथ केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की शर्त भी जोड़ दी. जब उनसे कहा गया कि वे अपनी बात बदल रहे हैं, तो उन्होंने साफ कहा कि यह उनकी मर्जी है. इस नई शर्त पर बात बिगड़ गई और वार्ता बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गई.

वार्ता विफल होने के बाद सरकारी सूत्रों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई. सरकार ने कहा कि कांग्रेस ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन करके एक बहुत गलत और खतरनाक परंपरा की शुरुआत की है. यह सिर्फ सुरक्षा के लिए खतरा नहीं है, बल्कि ऐसी दुर्भावनापूर्ण राजनीति परिपक्व लोकतंत्र की पहचान नहीं हो सकती. सरकारी सूत्रों ने यह भी याद दिलाया कि पड़ोसी देशों में तब क्या हुआ था, जब नेताओं के आवासों को विरोध-प्रदर्शन का निशाना बनाया गया था.

अखिलेश यादव की एंट्री और सड़क पर धक्का-मुक्की

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शाम करीब 6:37 बजे इस सियासी ड्रामे में नया मोड़ आया, जब अखिलेश यादव भी मौके पर पहुंचे और नेताओं के साथ जमीन पर बैठ गए. इसके तुरंत बाद पुलिस ने रास्ता खाली कराने की कार्रवाई शुरू कर दी. जब पुलिसकर्मी राहुल गांधी को उठाने पहुंचे, तो वे सड़क पर ही लेट गए. कांग्रेसी कार्यकर्ता उन्हें चारों तरफ से घेरकर सुरक्षा देने की कोशिश कर रहे थे. सुरक्षा बलों ने जब उन्हें बलपूर्वक हटाने की कोशिश की, तो जवानों और कार्यकर्ताओं के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई. इस खींचतान के दौरान राहुल गांधी की आंख और नाक के पास हल्की चोट भी आई.

हिरासत में लेने के दौरान हुई धक्का-मुक्की में चोटिल हुए राहुल गांधी (Photo: PTI)

शाम 7 बजे तक भारी पुलिस बल ने पूरे धरना स्थल को खाली करा लिया. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और अखिलेश यादव समेत तमाम नेताओं को पुलिस की अलग-अलग बसों में बिठा दिया गया. हिरासत में लिए जाने के दौरान प्रियंका गांधी के तेवर काफी सख्त नजर आए. वे चलती हुई बस के दरवाजे को पकड़कर खड़ी दिखीं और उन्होंने सीधे तौर पर कहा, "वे कायर हैं, वे डरे हुए हैं. हम उनसे नहीं डरते, बल्कि वे हमसे डरते हैं." दूसरी ओर, अखिलेश यादव ने बस की खिड़की से समर्थकों की तरफ हाथ हिलाया. इसी दौरान बस के अंदर से उनका एक वीडियो भी वायरल हुआ, जिसमें वे पुलिसकर्मियों से मुस्कुराते हुए पूछ रहे थे. "कहां ले जा रहे हो पुलिस भाई?"

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सोनिया गांधी की सरप्राइज एंट्री

पुलिस की बसें राहुल गांधी और अन्य समर्थकों को लेकर दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम पहुंचीं, जबकि प्रियंका गांधी वाड्रा और दीपेंद्र हुड्डा को मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया. जैसे ही कार्यकर्ताओं को अपने नेताओं के थाने में होने की जानकारी मिली, बड़ी संख्या में लोग मंदिर मार्ग थाने के बाहर जमा होकर नारेबाजी करने लगे. रात में इस पूरे आंदोलन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब सोनिया गांधी अचानक मंदिर मार्ग थाने पहुंच गईं.  नीट विवाद और छात्रों के आंदोलन में यह सोनिया गांधी की पहली सीधी मौजूदगी थी. वे थाने के अंदर गईं, प्रियंका गांधी से मुलाकात की, उनका हाल जाना और फिर बिना मीडिया से बात किए बाहर निकल गईं.

दिल्ली के बाद लखनऊ तक फैला गुस्सा

दिल्ली में नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबर जैसे ही फैली, इसका असर उत्तर प्रदेश में भी देखने को मिला. लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर समाजवादी पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता सड़क पर उतर आए. कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अखिलेश यादव की हिरासत को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया. मौके पर पहुंची पुलिस ने उग्र प्रदर्शन कर रहे सपा कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया, जिसके बाद चौराहे की सुरक्षा बढ़ा दी गई.

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आखिरकार, रात करीब 9 बजे के आसपास दिल्ली पुलिस ने छत्रसाल स्टेडियम और मंदिर मार्ग थाने से सभी वरिष्ठ नेताओं को रिहा कर दिया. रिहा होने के बाद राहुल गांधी और अन्य नेता अपने आवास की ओर रवाना हो गए, जिसके बाद लगभग 6 घंटे चला यह सियासी घटनाक्रम शांत हुआ.
 

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