लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को एंटी वुमन बताते हुए एक पोस्ट किया था. उनके इस बयान को लेकर अब बीजेपी ने पलटवार किया है. बीजेपी नेत्री स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी के बयान की निंदा करते हुए कहा कि उनके बयानों से उनकी ओछी मानसिकता साफ झलकती है.
उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने अपने बयान से खुद ही कंफर्म कर दिया है कि उन्होंने वर्दी में तैनात एक महिला पुलिस अधिकारी के साथ हाथापाई और मारपीट की थी. इससे महिलाओं के लिए उनके रवैये का असल चेहरा बेनकाब होता है.
स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, 'अगर वो बार-बार ऐसी छोटी और ओछी टिप्पणियां करते हैं, तो फिर आप उन पर महिलाओं की प्रतिक्रिया क्यों मांगते हैं? हमारी एक सामाजिक जिम्मेदारी है कि अगर राहुल गांधी महिलाओं के लिए ऐसी पिछड़ी सोच रखते हैं, तो हमारा कर्तव्य है कि ऐसे व्यक्ति को राजनीति में दरकिनार किया जाए.'
'राहुल गांधी सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसी घटिया...'
उन्होंने आगे कहा कि हमारे समाज की महिलाएं पूरी तरह सशक्त है- चाहे वो बीजेपी की सदस्य हों या आरएसएस की सेविकाएं. जब इस तरह के निचले स्तर के बयान दिए जाते हैं, तो समाज के हर वर्ग की महिलाओं का अपमान होता है. ऐसा लगता है कि नेता प्रतिपक्ष की भूमिका निभा रहे राहुल गांधी सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसी घटिया और बचकानी बातें करते हैं.
राहुल गांधी ने दिया था आरएसएस पर बयान
बता दें कि इससे पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा था, 'आरएसएस पुरुषों का एक ऐसा असंवैधानिक संगठन है जो मानता है कि महिलाएं पुरुषों की संपत्ति होती हैं. मैं शिव-शक्ति में विश्वास रखता हूं, इसलिए मुझे उनसे लड़ने में बहुत आनंद मिलता है. सबसे खूबसूरत बात ये है कि उनकी अपनी कई महिलाएं भी मेरे साथ हैं.'
विनोद तावड़े ने भी किया था पलटवार
बीजेपी नेता विनोद तावड़े ने भी राहुल गांधी के बयान पर पलटवार किया था. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विचार परिवार से जुड़ी अनगिनत महिलाएं आज संवैधानिक, संगठनात्मक और शासकीय दायित्वों के सर्वोच्च पदों तक पहुंची हैं, जिसके हमारे पास ढेरों उदाहरण मौजूद हैं.
उन्होंने याद दिलाया कि साल 1936 में प्रथम सरसंघचालक डॉ. हेडगेवार की प्रेरणा से लक्ष्मीबाई केलकर (मौसीजी) ने 'राष्ट्र सेविका समिति' की स्थापना की थी. ये पूरी तरह से एक स्वायत्त महिला संगठन है, जो संघ के समान विचारों पर चलता है लेकिन जिसकी अपनी स्वतंत्र कार्यशैली, नेतृत्व और शाखाएं हैं.
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तावड़े ने बताया था कि संघ परिवार के सभी संगठनों में महिलाएं हर स्तर पर न सिर्फ बराबर की भागीदार हैं, बल्कि अहम भूमिकाओं को भी संभाल रही हैं. राष्ट्र निर्माण, सेवा और नेतृत्व के कार्यों में महिलाओं को हमेशा से एक अहम शक्ति माना गया है.
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