सुप्रीम कोर्ट की चिंता और फटकार के बीच दिए गए आदेश के बाद आंध्र प्रदेश में भी हत्या, यौन उत्पीड़न के आरोपों और उत्पीड़न के मामले थमे नहीं है. इन मामलों ने महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था की प्रभावशीलता पर एक नई बहस छेड़ दी है.
विपक्षी दल YSRCP ने TDP के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार पर महिलाओं की रक्षा करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया है. हालांकि सरकार का कहना है कि दर्ज अपराधों में गिरावट आई है और सुरक्षा के नए उपाय लागू किए गए हैं.
हाल की कई घटनाओं में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा के आरोप सामने आए हैं, जिनमें विजयवाड़ा, ओंगोल, रेलवे कोडूर और राज्य के दूसरे हिस्सों की घटनाएं शामिल हैं. ये मामले जांच के अलग-अलग चरणों में हैं और आरोपियों के खिलाफ लगे आरोप कानून की उचित प्रक्रिया के अधीन हैं.
पुलिस ने बताए आंकड़े
4 अक्टूबर को, विजयवाड़ा के न्यू राजराजेश्वरीपेट में संबंधों में तनाव के बाद 22 साल के एक युवक ने 19 साल की युवती महालक्ष्मी की हत्या कर दी. पुलिस ने बताया कि आरोपी ने उस पर चाकू से हमला किया और बाद में पास की एक इमारत से कूदकर अपनी जान दे दी. पुलिस जानकारी पर आधारित रिपोर्टों में कहा गया है कि विवादों के बाद युवती ने उससे दूरी बना ली थी.
ओंगोल क्षेत्र के एक और मामले में, बीसी कल्याण हॉस्टल की दो नाबालिग लड़कियों को एक सेवानिवृत्त कर्मचारी के आवास पर ले जाया गया. पुलिस ने मामला दर्ज कर उन परिस्थितियों की जांच शुरू कर दी है जिनमें लड़कियों को हॉस्टल से बाहर ले जाया गया था. आंध्र प्रदेश राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने जिला अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है और कहा है कि वो घटना की जांच करेगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, पोक्सो अधिनियम के तहत एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है. दूसरे दर्ज मामलों में रेलवे कोडूर में 10 साल की बच्ची के साथ बलात्कार, विजयवाड़ा की वाम्बे (VAMBAY) कॉलोनी में एक महिला के साथ मारपीट और एक महिला सब-इंस्पेक्टर के परिवार के साथ यात्रा के दौरान उत्पीड़न की शिकायत शामिल हैं.
ऐसे मामलों में लगे आरोपों की जांच और अदालतों का फैसला दिया जाना बाकी है. अनकापल्ली में एक लड़की की हत्या से जुड़ी शिकायत पर कार्रवाई में देरी को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. दूसरे रिपोर्टों में हिंदुपुर में यौन हिंसा और गृह मंत्री वंगलापुडी अनिता के निर्वाचन क्षेत्र में महिलाओं पर हमले की घटनाएं शामिल हैं. इन घटनाओं ने पुलिस की प्रतिक्रिया, जांच और पीड़ित सहायता की ज्यादा गहराई से जांच की मांगों को जन्म दिया है.
20 सितंबर को, मैलावरम में एक महिला ने जन सेना के एक नेता पर अश्लील व्यवहार करने, गाली-गलौज करने और धमकी देने का आरोप लगाया. ये आरोप फिलहाल जांच और कानूनी कार्यवाही का विषय हैं. ये हालिया मामले एक राजनीतिक मुद्दा बन गए हैं, जहां YSRCP का तर्क है कि ये घटनाएं महिलाओं की सुरक्षा से निपटने में सरकार की कमियों को दिखाती हैं. हालांकि, पुलिस की ओर से जारी अपराध के आंकड़े एक मिला-जुला चित्र पेश करते हैं.
आंध्र प्रदेश के DGP हरीश कुमार गुप्ता की ओर से पेश आंकड़ों के मुताबिक, महिलाओं के खिलाफ अपराध 2024 में 16,994 से घटकर 2025 में 16,347 हो गए, जो लगभग 3.8% की गिरावट है. इसी अवधि के दौरान पोक्सो के मामले 2,120 से घटकर 1,879 हो गए. पुलिस ने 2025 के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराधों और पोक्सो मामलों में 510 दोषसिद्धि (सजा) की भी जानकारी दी।. सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए कई नए उपाय भी शुरू किए हैं.
आंध्र प्रदेश पुलिस का महिला और बाल सुरक्षा विंग 'शक्ति' (SHAKTHI) प्रणाली का संचालन करता है, जो SOS सहायता, शिकायत रिपोर्टिंग, यात्रा ट्रैकिंग और दूसरे सेवाएं देता है. पुलिस का कहना है कि SOS कॉल त्वरित प्रतिक्रिया के लिए करीबी पुलिस स्टेशन को सौंप दिए जाते हैं. सरकार ने इन उपायों की तुलना पिछली 'दिशा' प्रणाली से की है.
2025 में, गृह मंत्री वंगलापुडी अनिता ने एक नए महिला और बाल संरक्षण विंग और एक सुरक्षा एप्लिकेशन की घोषणा की, और कहा कि सरकार ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' का नजरिया अपनाया है. हालांकि, विपक्ष ने इस कदम की आलोचना करते हुए इसे दिशा प्रणाली को बदलने या कमजोर करने की कोशिश करार दिया।.
YSRCP का सरकार पर हमला
YSRCP की प्रवक्ता नागमल्लेश्वरी ने TDP के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार पर महिलाओं और बच्चों को पर्याप्त सुरक्षा देने में विफल रहने का आरोप लगाया है. उन्होंने गठबंधन के शासन को महिलाओं की सुरक्षा के लिए हानिकारक बताया. उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार ने पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए पर्याप्त कदम उठाए हैं.
उन्होंने 2025 में दर्ज महिलाओं के खिलाफ 16,347 अपराधों और 1,879 पोक्सो मामलों के आंकड़ों का हवाला दिया. नागमल्लेश्वरी ने ये भी मांग की कि गृह मंत्री वंगलापुडी अनिता अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने के सरकार के ट्रैक रिकॉर्ड को स्पष्ट करें. उन्होंने मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू, उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण और मंत्री नारा लोकेश की भी आलोचना की. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार प्रचार पर ध्यान केंद्रित कर रही है जबकि पीड़ित परिवार मदद का इंतजार कर रहे हैं.
नागमल्लेश्वरी ने दिशा प्रणाली की तुलना में सरकार की नई महिला-सुरक्षा पहलों की प्रभावशीलता पर भी सवाल उठाया. उन्होंने पुलिस और सरकार से ज्यादा जवाबदेही की मांग की. ये दावे विपक्ष के राजनीतिक दावे हैं और इन्हें अंतर्निहित अपराध आंकड़ों से अलग देखा जाना चाहिए. YSRCP के उद्धृत 2025 के पुलिस आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 की तुलना में महिलाओं के खिलाफ अपराधों और पोक्सो मामलों, दोनों में गिरावट आई है.
सरकार का कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा उसकी प्राथमिकता बनी हुई है और उसने अपराध में दर्ज गिरावट, सजा की दरों और नई पुलिसिंग और तकनीकी पहलों का हवाला दिया है. इसके साथ ही, वर्तमान में जांच के अधीन व्यक्तिगत मामले इस बात पर जोर देते हैं कि प्रभावी रोकथाम, शिकायतों के तुरंत पंजीकरण, पेशेवर जांच और पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए लगातार मदद की जरूरत बनी है.
मामलों और दावों के बीच कई सवाल
इसलिए, ये मामले सरकार और विपक्ष दोनों के सामने सवाल खड़े करते हैं: क्या कुल अपराध में दर्ज गिरावट जमीनी स्तर पर अधिक सुरक्षा में बदल रही है, क्या व्यक्तिगत शिकायतों पर पुलिस की प्रतिक्रिया पर्याप्त है, और क्या मौजूदा सुरक्षा तंत्र उन महिलाओं और बच्चों तक पहुंच रहे हैं जिन्हें तुरंत सुरक्षा की जरूरत है?
संजय शर्मा