ज्यादातर लोग यही समझते हैं कि वायु प्रदूषण सिर्फ फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है, लेकिन इसका असर हार्ट पर भी होता है. लैंसेट कमीशन ऑन पॉल्यूशन एंड हेल्थ के अनुसार, प्रदूषण के कारण दुनियाभर में होने वाली मौतों में ज्यादातर मौतें हार्ट डिजीज, इस्केमिक हार्ट डिजीज और स्ट्रोक के कारण भी होती है. ऐसे में पॉल्यूशन से बचाव करना जरूरी है. खासतौर पर जिनको पहले से ही दिल की बीमारियां हैं उनको खास सावधानी बरतने की जरूरत है.
कैसे पहुंचता है प्रदूषण दिल तक?
प्रदूषण में मौजूद बारीक कण यानी पीएम 2.5 इतने छोटे होते हैं कि फेफड़ों में गहराई तक जाकर खून में मिल जाते हैं. इससे खून की नसों का काम बिगड़ता है, ब्लड प्रेशर बढ़ता है और दिल की धड़कन की लय बिगड़ जाती है. जिन्हें पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर की समस्या होती है उनकी परेशानी बढ़ जाती है. बीपी हाई होने से हार्ट पर प्रेशर पड़ता है और हार्ट अटैक या स्ट्रोक आ सकता है. आकाश हेल्थकेयर के सीनियर कंसल्टेंट और एचओडी रेस्पिरेटरी एंड स्लीप मेडिसिन डॉ. अक्षय बुद्धिराजा बताते हैं कि दिल्ली पहले से ही खराब हवा से जूझ रही है और दिवाली पर पटाखों का धुआं प्रदूषण और बढ़ा देता है. इससे हार्ट पर असर पड़ता है. ये हार्ट अटैक का भी कारण बन सकता है.
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किन लोगों को होता है ज्यादा खतरा
कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजेंद्र पाटिल कहते हैं कि वायु प्रदूषण का असर सिर्फ सांस लेने में दिक्कत और खांसी तक सीमित नहीं है. जब शरीर ज्यादा मात्रा में पार्टिकुलेट मैटर के संपर्क में आता है, तो शरीर में सूजन होती है, नसों की अंदरूनी परत खराब होती है और दिल पर दबाव बढ़ता है. इससे कमजोर लोगों में हार्ट अटैक, दिल की धड़कन बिगड़ने और हार्ट फेल्योर बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है. बुजुर्गों के साथ-साथ डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या कोरोनरी आर्टरी डिजीज वाले लोगों को खराब हवा में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए.
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जिम्मेदारी से मनाएं त्योहार
त्योहार परिवार के साथ मिलने का समय है, लेकिन यह हमारी सेहत की कीमत पर नहीं होना चाहिए. दिवाली पर पार्टिकुलेट प्रदूषण में भारी बढ़ोतरी होती है, जो बच्चों, बुजुर्गों और खासकर दिल व फेफड़ों के मरीजों के लिए समस्या है.बाहर के प्रदूषण को हम नियंत्रित नहीं कर सकते, लेकिन प्रदूषित हवा के संपर्क को हम जरूर कंट्रोल कर सकते हैं.
प्रदूषण के दौर में हार्ट को सेफ रखने के लिए क्या करें
पानी पीते रहें, शरीर को हाइड्रेट रखें
AQI खराब हो तो बाहर न निकलें, सुबह-शाम की सैर से बचें
भारी काम और एक्सरसाइज बाहर करने से बचें
खिड़कियां बंद रखें, संभव हो तो एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें