'महिला को थाने में टांगकर पीटा, प्राइवेट पार्ट छुए...' झारखंड पुलिस पर आरोप, SC-ST एक्ट के तहत एक्शन की मांग

झारखंड के लातेहार में एक आदिवासी महिला के साथ पुलिसकर्मियों के मारपीट का मामला सामने आया है. आदिवासी संगठनों ने इस मामले में SC-ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने की मांग की है. वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी इस घटना का संज्ञान लेते हुए लातेहार पुलिस को तुरंत जांच और कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

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सीएम हेमंत सोरेन ने इस मामले पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. (Photo- X/Jharkhand Janadhikar Mahasabha) सीएम हेमंत सोरेन ने इस मामले पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए. (Photo- X/Jharkhand Janadhikar Mahasabha)

सत्यजीत कुमार

  • रांची,
  • 11 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:07 AM IST

झारखंड के लातेहार में एक आदिवासी महिला के साथ पुलिसकर्मियों के मारपीट का मामला सामने आया है. इस घटना को लेकर आदिवासी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है. इस मामले पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने खुद इसका संज्ञान लिया है और लातेहार पुलिस को तुरंत जांच कर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.

झारखंड जनाधिकार महासभा की ओर से सोशल मीडिया पर दी गई जानकारी के मुताबिक, 5 अक्टूबर की दोपहर को हेरंज गांव की रहने वाली पुनिया देवी खेत में बकरी चरा रही थीं. तभी बरियातू थाना के SHO तीन पुलिसकर्मियों के साथ सादे कपड़ों में वहां पहुंचे.

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आरोप है कि इस दौरान पुलिसकर्मियों ने महिला के साथ मारपीट की और रास्ते में भी उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया. महासभा ने आरोप लगाया है कि पुनिया देवी को जबरन थाने ले जाया गया, जहां उन्हें टांगकर पीटा गया, उनके स्तन छुए और जातिसूचक गालियां दी गईं. बताया जा रहा है कि महिला को अगले दिन रात में रिहा किया गया. 

मामले का तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर प्रतिक्रिया दी. मुख्यमंत्री ने लातेहार पुलिस को निर्देश देते हुए लिखा, 'लातेहार पुलिस तुरंत संज्ञान लें, जांच करें और कड़ी कार्रवाई करते हुए सूचना दें. ये बर्दाश्त नहीं है.'

SC-ST एक्ट के तहत मामला दर्ज करने की मांग

कई आदिवासी संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है. संगठनों का कहना है कि इस मामले में सिर्फ विभागीय जांच काफी नहीं है, बल्कि दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी SC-ST एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए. कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही न्याय नहीं मिला, तो राज्य स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा.
 

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