गुजरात के अहमदाबाद में स्थित नरेंद्र मोदी स्टेडियम और दूसरे ठिकानों को बम से उड़ाने की झूठी धमकियों के मामलों में एक बड़ा खुलासा हुआ है. साइबर क्राइम ब्रांच ने एक प्रेस रिलीज में बताया है कि धमकियां भेजने के लिए इस्तेमाल किए गए ईमेल अकाउंट्स बांग्लादेश और पाकिस्तान से चलाए जा रहे थे.
इस जांच से हैक किए गए ईमेल अकाउंट्स की खरीद-फरोख्त करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भी पर्दाफाश हुआ है. साइबर सेल के मुताबिक, इससे पहले इसी तरह की धमकियों की जांच के दौरान गुजरात पुलिस ने पश्चिम बंगाल से एक आरोपी को गिरफ्तार किया था.
जांच में सामने आया था कि उस शख्स ने हैक किए गए जीमेल अकाउंट्स बांग्लादेश के एक व्यक्ति को बेचे थे. इसके बाद बांग्लादेशी हैंडलर ने उन अकाउंट्स को पाकिस्तान के किसी शख्स को क्रिप्टोकरेंसी के बदले बेच दिया था.
पाकिस्तान में बैठे संदिग्ध देश में त्योहारों और बड़े आयोजनों से पहले दहशत फैलाने के लिए इन फर्जी ईमेल का इस्तेमाल कर रहे थे.
पहला मामला: 7 अक्टूबर को 16 ठिकानों को बनाया गया था निशाना
पहली घटना 7 अक्टूबर को सामने आई थी. तब दो अलग-अलग ईमेल आईडी से शहर के 16 ठिकानों पर बम धमाके की धमकी भरे मेल भेजे गए थे. इन ठिकानों में 10 स्कूल, गुजरात हाईकोर्ट, अहमदाबाद की दूसरी अदालतें और नरेंद्र मोदी स्टेडियम शामिल थे. इन ईमेल्स में खालिस्तान का जिक्र किया गया था और गायक दिलजीत दोसांझ के 1 नवंबर को दिल्ली और 21 नवंबर को अहमदाबाद के मोदी स्टेडियम में होने वाले शो में धमाके करने की धमकी दी गई थी.
तकनीकी जांच और ईमेल 'हेडर्स' से पता चला कि इन अकाउंट्स को बांग्लादेश और पाकिस्तान के रावलपिंडी से चलाया गया था.
दूसरा मामला: 27 अक्टूबर को फिर मिली धमकी
दूसरा मामला 27 अक्टूबर 2026 को दर्ज किया गया, जब एक दूसरी ईमेल आईडी से 19 स्थानों को निशाना बनाते हुए धमकी भरा संदेश भेजा गया. इसमें 14 स्कूल, सरकारी कार्यालय, अदालतें और एक बार फिर नरेंद्र मोदी स्टेडियम शामिल था. इस संदेश में भी खालिस्तान का हवाला देते हुए लोगों को 21 नवंबर को होने वाले दिलजीत दोसांझ के शो में न जाने की चेतावनी दी गई थी.
जीमेल से मिली जानकारी और जांच के मुताबिक, इस अकाउंट को बांग्लादेश के रंगपुर और पाकिस्तान के लाहौर से ऑपरेट किया गया था.
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फिलहाल, अहमदाबाद की साइबर क्राइम ब्रांच केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर इस पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की छानबीन कर रही है ताकि इसके पीछे के असली साजिशकर्ताओं तक पहुंचा जा सके.
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