दिल्ली में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाने-पीने की चीजों से जुड़े कई मामलों में कार्रवाई की है. इनमें Zepto पर एक्सपायरी डेट निकल चुके बेसन के दो पैकेट डिलीवर करने की शिकायत भी शामिल है. इसके अलावा क्रीम रोल के नाम, क्रैनबेरी कैप्सूल के दावों और अनार के जूस के लेबल पर भी सवाल उठे हैं. प्राधिकरण ने अलग-अलग मामलों में कंपनियों को नोटिस जारी किए हैं या कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की मंजूरी दी है.
FSSAI के मुताबिक, इन मामलों में Zepto, बेकलाइट फूड प्रोसेसिंग, बीएमएस लाइफसाइंस, हेल्दीहे फूड्स (Healthyhey Foods LLP) और स्टोरिया फूड्स एंड बेवरेजेज के नाम शामिल हैं.
Zepto पर एक्सपायरी बेसन की शिकायत
Zepto के खिलाफ शिकायत की गई थी कि ग्राहक को बेसन के दो पैकेट उनकी इस्तेमाल करने की आखिरी तारीख निकलने के बाद डिलीवर किए गए. पैकेट पर इस्तेमाल की आखिरी तारीख 12 सितंबर 2026 लिखी थी.
इस शिकायत पर FSSAI ने कंपनी को नोटिस जारी किया है. प्राधिकरण ने Zepto से ऑर्डर, डिलीवरी, गोदाम, विक्रेता और सामान से जुड़ी जानकारी मांगी है. कंपनी को यह भी बताना होगा कि शिकायत में बताई गई चूक कैसे हुई और उसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए. जरूरत पड़ने पर सामान वापस लेने, ग्राहकों को जानकारी देने और पैसे लौटाने जैसे कदमों के बारे में भी जवाब देना होगा.
क्रीम रोल के नाम पर क्यों उठे सवाल?
दूसरा मामला 'मालपानी बेक-लाइट पुणेरी क्रीम रोल' से जुड़ा है. यह सामान ब्लिंकिट और जेप्टो पर बेचा जा रहा था. FSSAI ने इसके नाम और पैकेट पर दी गई जानकारी पर सवाल उठाए.
प्राधिकरण के मुताबिक, पैकेट पर दी गई सामग्री की सूची में गेहूं का आटा, वनस्पति फैट, मार्जरीन और चीनी का जिक्र था. इसमें दूध, क्रीम या दूध से बनी दूसरी चीजों का नाम नहीं था. ऐसे में 'क्रीम रोल' नाम से ग्राहक को उसके अंदर क्रीम होने का भ्रम हो सकता है. इस मामले में बेकलाइट फूड प्रोसेसिंग को नोटिस दिया गया.
क्रैनबेरी कैप्सूल के दावों की भी जांच
बीएमएस लाइफसाइंस के क्रैनबेरी कैप्सूल को लेकर भी FSSAI ने नोटिस जारी किया. प्राधिकरण ने कंपनी के खाद्य सुरक्षा पंजीकरण की अवधि खत्म होने, बीमारी से जुड़े दावों और खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण के लोगो के इस्तेमाल पर सवाल उठाए. आशंका जताई गई कि लोगो से ग्राहक को सामान के आधिकारिक प्रमाणन या समर्थन का गलत संकेत मिल सकता है.
हेल्दीहे फूड्स के क्रैनबेरी अर्क वाले कैप्सूल के लेबल में भी कुछ अंतर पाए गए. इसके अलावा ऐसे स्वास्थ्य संबंधी दावों पर सवाल उठे, जिनके लिए पहले मंजूरी की जरूरत हो सकती है.
अनार के जूस में सेब का रस कितना?
स्टोरिया फूड्स एंड बेवरेजेज के अनार के जूस के लेबल पर भी सवाल उठे हैं. FSSAI के मुताबिक, इस उत्पाद में 4 फीसदी अनार के जूस का गाढ़ा अर्क और 12 फीसदी सेब के जूस का गाढ़ा अर्क था. लेबल पर इसे दोबारा तैयार करने पर 100 फीसदी फ्रूट जूस के बराबर बताने वाले दावे पर सवाल उठाया गया. 'बिना अतिरिक्त चीनी' लिखने के तरीके पर भी आपत्ति जताई गई, क्योंकि उत्पाद में फलों से मिलने वाली प्राकृतिक चीनी की जानकारी भी थी. इस मामले में कंपनी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के तहत सुनवाई से जुड़ी कार्यवाही शुरू करने की मंजूरी दी गई है.
ग्राहकों के लिए क्या है जरूरी?
इन मामलों में मुख्य सवाल यह है कि पैकेट पर लिखी जानकारी और उत्पाद की असली सामग्री में कितना मेल है. ग्राहक सामान खरीदते समय नाम, सामग्री, इस्तेमाल की आखिरी तारीख और स्वास्थ्य संबंधी दावों पर भरोसा करते हैं. इसलिए इनकी सही जानकारी मिलना जरूरी है.
FSSAI ने अलग-अलग मामलों में कंपनियों से जवाब मांगा है या कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई है. अब संबंधित मामलों में आगे की कार्रवाई के बाद ही तय होगा कि आरोप साबित होते हैं या नहीं.
आशुतोष मिश्रा