कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने आज दिल्ली में एक हाई टी मीटिंग रखी. इस मीटिंग में 'इंडिया' ब्लॉक के नेता, सिविल सोसाइटी के कार्यकर्ता और युवा प्रतिनिधि मौजूद रहे. उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन के अगले चरण की एक लंबी और ठोस रूपरेखा तैयार की.
ये मीटिंग सिर्फ एक मेल-मिलाप का मौका नहीं थी, बल्कि इसमें विरोध प्रदर्शनों को बनाए रखने पर विस्तार से बातचीत हुई. इसके साथ ही आंदोलन के दायरे को बढ़ाने और राजनीतिक दलों, नागरिक संगठनों और युवा समूहों के लिए एक साझा मंच तैयार करने पर भी चर्चा हुई.
इस बैठक में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल, सीपीआई (ML), सीपीआई (M), झारखंड मुक्ति मोर्चा, IUML, जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस, NCP - SP, शिवसेना (UBT), TVK, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक, केरल कांग्रेस (M), केरल कांग्रेस (J) और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी सहित 'इंडिया' गठबंधन के कई प्रमुख घटक दलों के शीर्ष नेता शामिल हुए.
1. एक मकसद, एक विरोध: राहुल गांधी का एकता का संदेश
बैठक से जो सबसे बड़ा संदेश सामने आया, वो राहुल गांधी का वो आह्वान था जिसमें उन्होंने कई विरोध प्रदर्शनों को एक ही छतरी के नीचे लाने की बात कही.
बैठक में मौजूद नेताओं के मुताबिक, राहुल गांधी ने इस बात पर जोर दिया कि अदालतों में कानूनी लड़ाई अपनी जगह जारी रहेगी, लेकिन असली राजनीतिक लड़ाई सड़कों पर ही लड़ी जानी चाहिए. उन्होंने इस बात की वकालत की कि शुरुआती प्रदर्शनों के बाद आंदोलन धीमा नहीं पड़ना चाहिए, बल्कि इसे लंबे समय तक जिंदा बनाए रखना जरूरी है.
2. एक ही टेबल पर जुटे 'इंडिया' ब्लॉक के दिग्गज
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी के साथ 'इंडिया' गठबंधन के तमाम बड़े नेता एक ही मेज पर बैठे नजर आए.
एक वरिष्ठ नेता ने इस माहौल को राजनीतिक एकजुटता और आपसी आत्मीयता से भरपूर बताया, जहां सभी का एक ही साझा मकसद था- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाना. इस दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा ने एक बेहतरीन मेजबान की भूमिका निभाते हुए सभी टेबल्स पर जाकर मेहमानों से मुलाकात की और उनका फीडबैक लिया.
इस आयोजन ने विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक तालमेल से आगे बढ़कर सिविल सोसाइटी और युवा संगठनों के साथ एक व्यापक गठबंधन बनाने की कोशिश को भी दिखाया.
3. रणनीति चर्चा में शामिल हुए सिविल सोसाइटी और युवा चेहरे
बैठक में एक अहम मेज पर जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवा एक्टिविस्टों ने हिस्सा लिया. इनमें योगेंद्र यादव, नेहा बोरा, प्रशांत भूषण, AISF के विराज देवांग, 'यूथ फॉर स्वराज' के प्रतिनिधि संदीप और बालाजी, आयुषी घोष, असम की कुंकी चौधरी और प्रोफेसर एन.एस.यू. कुमार शामिल थे.
राहुल गांधी एक टेबल से दूसरी टेबल पर गए और प्रतिभागियों से बातचीत कर उनके विचार जाने कि आने वाले महीनों में इस आंदोलन को कैसे धार दी जाए और इसकी क्या रणनीति होनी चाहिए. सोनिया गांधी ने भी मेहमानों के बीच जाकर उनसे बातचीत की.
4. जंतर-मंतर की वापसी: अगला बड़ा जन-आंदोलन?
चर्चा का एक मुख्य केंद्र सार्वजनिक विरोध प्रदर्शनों के लिए जंतर-मंतर को वापस हासिल करना था. राहुल गांधी ने लोगों की लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति के केंद्र के रूप में जंतर-मंतर की जगह को बहाल करने की जरूरत पर खास जोर दिया. प्रतिभागियों ने जंतर-मंतर के हेरिटेज स्टेटस से जुड़े नोटिफिकेशन पर भी चर्चा की, जिसे कुछ लोगों ने सरकार की घबराहट के रूप में देखा.
इस बात पर सहमति बनी कि जंतर-मंतर को वापस पाने के लिए लोगों को एकजुट करना इस आंदोलन के अगले बड़े कदमों में शामिल होना चाहिए. शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत ने भी पुष्टि की कि इस पर योजनाएं बनाई जा रही हैं.
संजय राउत ने कहा, 'हम जंतर-मंतर वापस लेंगे. हम इसके लिए योजना बना रहे हैं और हमारी बहुत अच्छी और सार्थक चर्चा हुई है.'
5. सभी छूट चुकी आवाजों को एक मंच पर लाना
बैठक का एक मकसद उन संगठनों और समूहों तक पहुंचना था जो पिछले दिन के 'दिल्ली चलो' आह्वान के दायरे से बाहर रह गए थे. चर्चा में CJP का मुद्दा भी सामने आया. प्रतिभागियों का मानना था कि इस आंदोलन को अपने दायरे का विस्तार करने की जरूरत है ताकि अलग-अलग संगठनों, कार्यकर्ताओं और लोकतांत्रिक आंदोलनों को एक साझा मंच पर लाया जा सके.
राहुल गांधी ने दोहराया कि सभी विरोध प्रदर्शनों को एक बड़े संघर्ष के हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए.
6. आंदोलन का एक नया मोड़: योगेंद्र यादव
सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने इस सभा को आंदोलन का संभावित मोड़ बताया. उन्होंने कहा कि विपक्षी राजनीतिक दलों का सिविल सोसाइटी संगठनों और युवा समूहों तक पहुंचना एक बहुत ही अहम कदम है.
योगेंद्र यादव ने कहा, 'मैं इसे एक टर्निंग पॉइंट कहता हूं, क्योंकि आप भविष्य में जमीन पर लोकतंत्र को बचाने के लिए एक विशाल जन आंदोलन को उभरते हुए देखेंगे.' उन्होंने कहा कि चर्चा का मुख्य केंद्र सभी लोकतांत्रिक ताकतों को एक साथ लाना और एक व्यापक आंदोलन खड़ा करना था. यादव ने इस मीटिंग की गर्मजोशी की भी तारीफ की.
7. त्योहारों के मौसम को ध्यान में रखकर बनेगी रणनीति
भविष्य के बड़े प्रदर्शनों की टाइमिंग और शेड्यूलिंग पर भी चर्चा की गई. कई प्रतिभागियों ने चेतावनी दी कि आंदोलन की योजना बहुत सावधानी से बनाई जानी चाहिए ताकि बड़े पैमाने पर होने वाले विरोध प्रदर्शनों से दुर्गा पूजा और दशहरा जैसे त्योहारों के मौसम में कोई बाधा पैदा न हो. आम सहमति ये थी कि आंदोलन का एक व्यवस्थित कैलेंडर होना चाहिए, जिसमें जन-भागीदारी और त्योहारों के शेड्यूल का पूरा ध्यान रखा जाए.
8. जब तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते, चैन से नहीं बैठेंगे: दीपांकर भट्टाचार्य
सीपीआई (ML) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने एक बार फिर दोहराया कि विपक्ष एक लंबी लड़ाई के लिए पूरी तरह तैयार है.
दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा, 'ये एक लंबी लड़ाई है और हम मिलकर लड़ने के लिए तैयार हैं. हम तभी आराम करेंगे जब ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दे देंगे.' उनके इन बयानों से चुनाव आयोग पर दबाव बनाए रखने और आंदोलन को जारी रखने के नेताओं के संकल्प का पता चलता है.
ये हाई टी बैठक विपक्ष के चल रहे विरोध प्रदर्शनों को एक बड़े राजनीतिक और नागरिक आंदोलन में बदलने की कोशिश के रूप में सामने आई है. इस पूरी मंथन प्रक्रिया से तीन मुख्य मकसद निकलकर आए हैं- अलग-अलग विरोध मंचों को एकजुट करना, जंतर-मंतर को वापस पाने के लिए लोगों को लामबंद करना और CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए दबाव बनाए रखना.
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राहुल गांधी और 'INDIA' ब्लॉक के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती इस बैठक में बनी आत्मीयता और आम सहमति को जमीन पर एक जन-आंदोलन में तब्दील करने की होगी. इस हाई टी का संदेश बिल्कुल साफ था- विपक्ष इस लड़ाई को सिर्उ संसद और अदालतों तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि सिविल सोसाइटी और युवा संगठनों को अपना मुख्य साझेदार बनाकर इसे सड़कों पर ले जाना चाहता है.
मौसमी सिंह