दिल्ली पुलिस की एक टीम शुक्रवार दोपहर सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके के ठहरने वाले घर पहुंची. अधिकारी उन्हें कुछ दस्तावेज देने गए थे और बताया गया है कि दिपके को दिल्ली पुलिस एक्ट के तहत नोटिस दिया गया है. पूरी मुलाकात शांत माहौल में हुई. दिपके कंधे पर तिरंगा लपेटे सोफे पर बैठे थे और उन्होंने पुलिसवाले को कोल्ड ड्रिंक और पानी ऑफर किया. यह मुलाकात उनकी आज शाम की तिरंगा यात्रा से ठीक पहले हुई और इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
पुलिस टीम एनसीपी-एससीपी के प्रवक्ता अनीश गवांडे के घर पहुंची थी. दिपके इसी घर में ठहरे हुए हैं. वे कुछ ही देर में कनॉट प्लेस के लिए रवाना होने वाले थे.
वायरल वीडियो में पुलिस अधिकारी और दिपके आमने सामने बैठे दिख रहे हैं. टेबल पर कोका कोला की बोतल और कागजात रखे हैं. अधिकारी बैठकर बातचीत कर रहे हैं. दिपके हाथ गाल पर रखकर उनकी बातें सुनते दिखते हैं. वे बीच बीच में हाथ जोड़ लेते हैं और कभी कभी पानी पीते नजर आते हैं. पूरा माहौल काफी शांत दिखता है.
अब पूरे मामले को समझ लेते हैं. पार्टी ने एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में आंदोलन का ऐलान किया था. इसी सिलसिले में सीजेपी कार्यकर्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका तिरंगा लेकर जंतर-मंतर के पास पहुंचे थे. पुलिस ने उन्हें पहले हिरासत में लिया और फिर गिरफ्तार कर लिया.
यह भी पढ़ें: दिपके के घर पहुंची पुलिस, दिल्ली में 'तिरंगा यात्रा' से पहले एक्शन, देखें VIDEO
दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल में हैं. इन्हीं गिरफ्तारियों के विरोध में दिपके ने आज शाम सेंट्रल पार्क में तिरंगा यात्रा निकालने की घोषणा की थी.
इससे पहले दिपके ने दावा किया था कि बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियां उनका पीछा कर रही हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इंटेलिजेंस ब्यूरो के कर्मचारी उनके घर की निगरानी कर रहे हैं. उन्हें आशंका थी कि दिल्ली पुलिस आज सुबह उन्हें हिरासत में ले सकती है. हालांकि वीडियो में दोनों के बीच बातचीत का माहौल शांत दिखता है.
दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 29 क्या कहती है?
दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 29 के तहत पुलिस कमिश्नर और इंस्पेक्टर रैंक से नीचे न होने वाले अधिकारी सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए लोगों को मौखिक या लिखित निर्देश दे सकते हैं. ये निर्देश कानून के दायरे में होने चाहिए.
पुलिस जुलूस और सभाओं में लोगों के व्यवहार को नियंत्रित कर सकती है. वह जुलूस का रूट और समय तय कर सकती है. सड़कों, धार्मिक स्थलों और भीड़भाड़ वाली जगहों पर रुकावट भी रोक सकती है. संगीत, ढोल और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर भी नियंत्रण किया जा सकता है. इसलिए प्रदर्शन के दौरान रास्ता तय करना, भीड़ संभालना और अवरोध रोकना इस धारा के दायरे में आ सकता है. हालांकि धारा 29 का पाठ अपने आप यह नहीं कहता कि पुलिस किसी भी प्रदर्शन पर बिना शर्त रोक लगा सकती है या जंतर-मंतर को स्थायी रूप से प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा सकती है. ऐसे कदमों की वैधता संबंधित आदेश, लागू दूसरे कानूनों और अदालत के निर्देशों के आधार पर देखनी होगी.
शिवानी शर्मा / अरविंद ओझा