एक्ट्रेस पूजा बेदी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में जारी विरोध प्रदर्शनों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे युवाओं को हिरासत में लिए जाने की आलोचना करते हुए लोगों से लोकतंत्र और अपने अधिकारों की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की और बीजेपी को भी आडे़ हाथों लिया.
पूजा बेदी ने इंस्टाग्राम पर वीडियो जारी कर बीजेपी की आलोचना की. उन्होंने कहा कि बीजेपी के खिलाफ आवाज उठाना देशविरोधी होना नहीं है, क्योंकि बीजेपी, भारत नहीं है और भारत, बीजेपी नहीं है. एक्ट्रेस ने कहा कि भारत, बीजेपी से पहले भी था और बीजेपी के बाद भी रहेगा. हमें उस सरकार से सवाल करने चाहिए, जिसे हमने अपने लोकतंत्र की रक्षा के लिए चुना है. आज हमारे अधिकार कहां हैं? देशविरोधी कौन है? अगर बीजेपी शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं को गिरफ्तार कर रही है, जबकि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना हमारा लोकतांत्रिक अधिकार है, तो देशविरोधी कौन हुआ?
पूजा ने प्रदर्शनकारियों के साथ प्रशासन के कथित रवैये पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या सरकार से जवाबदेही मांगने और अपनी नाराजगी जाहिर करने वाले लोग देशविरोधी हैं या फिर उनकी आवाज दबाने वाली सत्ता.
उन्होंने कहा कि क्या लोगों ने ऐसे लोकतंत्र के लिए वोट दिया था, जहां असहमति जताने वालों को दबाया जाए? क्या देश की जनता इसी तरह का नेतृत्व चाहती थी?
एक्ट्रेस ने प्रदर्शनकारियों को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने और गंभीर अपराधों के आरोपियों को जमानत मिलने की तुलना करते हुए कहा कि जहां अतिक्रमण के मामले में प्रदर्शनकारियों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत मिल रही है. वहीं बलात्कार और हत्या के आरोपियों को एक दिन में जमानत मिल जाती है.
पूजा ने लोगों से डर छोड़कर अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की अपील की. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अपनी राय रखना हर नागरिक का बुनियादी अधिकार है. लोगों को खुद से यह सवाल करना चाहिए कि वे लोकतांत्रिक देश चाहते हैं या तानाशाही व्यवस्था.
उन्होंने कहा कि तानाशाही में नागरिकों के अधिकार छिन जाते हैं. वे अपने बच्चों के लिए कैसा भारत छोड़ना चाहते हैं और आने वाली पीढ़ी किस देश पर गर्व कर सकेगी. ऐसी दमनकारी व्यवस्था में, जो आपकी आवाज, आपके मीडिया और आपकी सोशल मीडिया फीड को नियंत्रित करना चाहती है, अब लोकतंत्र की मशाल थामने का समय है. जागरूकता फैलाइए और उनकी बर्बरता, कानूनहीनता, मनमानी और अलोकतांत्रिक कार्रवाइयों को उजागर कीजिए.
बता दें कि हाल ही में इमरान खान ने मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था. इसके बाद मुंबई स्थित विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) ने उन्हें नोटिस जारी कर 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया.
आजतक एंटरटेनमेंट डेस्क