उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में स्थित बांदा जिला अपने ऐतिहासिक किलों, नदियों, धार्मिक स्थलों और विशिष्ट शजर पत्थर के लिए जाना जाता है. यहां का कालिंजर किला इतिहास और स्थापत्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, जबकि केन नदी से मिलने वाला शजर पत्थर जिले को देश के दूसरे क्षेत्रों से अलग पहचान देता है. इस पत्थर का इस्तेमाल आभूषण बनाने में किया जाता है और इससे स्थानीय कारीगरों को आजीविका मिलती है.
बांदा उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के पूर्वी हिस्से में स्थित है. बांदा शहर जिले का मुख्यालय होने के साथ चित्रकूटधाम मंडल का मुख्यालय भी है. जिले की सीमाएं फतेहपुर, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट जिलों से मिलती हैं. यहां की भौगोलिक पहचान में केन, यमुना और बागै नदी का महत्वपूर्ण स्थान है. बांदा और आसपास का क्षेत्र प्राचीन काल से ऐतिहासिक गतिविधियों का केंद्र रहा है. जिला प्रशासन के इतिहास संबंधी विवरण में इस क्षेत्र के प्राचीन अवशेषों, चंदेल शासकों और कालिंजर के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख मिलता है. बाद के दौर में बुंदेलों, मराठों और स्थानीय नवाबों का भी इस क्षेत्र के इतिहास में योगदान रहा. कालिंजर किला इस विरासत का प्रमुख प्रतीक है. जिले के इतिहास में ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष और 1857 के विद्रोह का भी उल्लेख मिलता है. बांदा के नवाब अली बहादुर द्वितीय ने उस दौर में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष किया था.
इस लिए खास है कालिंजर किला
कालिंजर किला बांदा जिले की सबसे प्रमुख ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है. इसकी पहचान प्राचीन स्थापत्य, पहाड़ी स्थिति और धार्मिक महत्व से जुड़ी है. जिला प्रशासन की वेबसाइट इसे जिले के प्रमुख ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व वाले स्थलों में गिनती है. किले का इतिहास बुंदेलखंड के राजनीतिक और सांस्कृतिक अतीत को समझने का अवसर देता है. बांदा की एक खास पहचान शजर पत्थर है. जिला प्रशासन के एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) पेज के अनुसार, यह पत्थर केन नदी में पाया जाता है. इसकी खासियत यह है कि इसके भीतर प्राकृतिक आकृतियां पाई जाती हैं, जो पत्तियों या पेड़ों जैसी दिखाई दे सकती हैं. इसी कारण इससे बने आभूषण आकर्षक माने जाते हैं. शजर पत्थर की कटाई, तराशने और आभूषण बनाने का काम स्थानीय कारीगरों की आजीविका से जुड़ा है. इसे जिले के एक जिला-एक उत्पाद कार्यक्रम में भी शामिल किया गया है.
बांदा के प्रमुख धार्मिक स्थल
बांदा में मां महेश्वरी देवी मंदिर, संकट मोचन मंदिर, मां काली देवी मंदिर और वामदेवेश्वर मंदिर जैसे धार्मिक स्थल प्रमुख है. ये स्थान स्थानीय धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक जीवन का हिस्सा हैं. बांदा को महर्षि वामदेव से जोड़ने वाली मान्यताएं भी जिले की स्थानीय पहचान में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं. बांदा जिले का भूभाग ऊंचे-नीचे पठारी हिस्सों, मैदानी क्षेत्रों और नदी घाटियों से मिलकर बना है. जिला प्रशासन के भूगोल संबंधी विवरण के अनुसार, बागै नदी जिले में दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व की ओर बहती है. केन और यमुना नदियां भी जिले के भूगोल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. नदियों के आसपास की भूमि और जल व्यवस्था स्थानीय कृषि तथा ग्रामीण जीवन को प्रभावित करती है.
बांदा की चार विधानसभा सीटें
बांदा जिले में चार विधानसभा क्षेत्र हैं: बांदा, तिंदवारी, बबेरू और नरैनी
तिंदवारी सीट : यहां पिछले चुनाव में भाजपा छोड़ सपा में गए बृजेश कुमार प्रजापति को पार्टी बदलने का नुकसान हुआ.इस सीट से बीजेपी के रामकेश निषाद ने 28,425 वोट से जीत हासिल की है. उन्हें कुल 86,812 वोट हासिल हुए . जबकि बृजेश कुमार प्रजापति 58,387 वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे.वहीं बहुजन समाज पार्टी के जयराम सिंह 39,450 वोट के साथ तीसरे नंबर पर रहे .
बांदा सीट: इस सीट पर बीजेपी के प्रकाश द्विवेदी ने 15,214 वोट से जीत हासिल की. प्रकाश द्विवेदी को 81,557 वोट मिले. जबकि सपा की मंजुला सिंह को 66,343 वोट मिले.इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी के धीरज प्रकाश 38,284 वोट के साथ तीसरे नंबर पर रहे.
बबेरू सीट: बबेरू सीट पर सपा प्रत्याशी विशंभर सिंह यादव ने 7,393 वोट से जीत हासिल की.विशंभर सिंह यादव को 79,614 वोट मिले हैं. जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी बीजेपी के अजय कुमार को 72,221 वोट मिले.इस सीट पर बसपा प्रत्याशी रामसेवक शुक्ला 37,009 वोट के साथ तीसरे नंबर पर रही.
नरैनी सीट : यहां भाजपा के ओम्मानी वर्मा ने 6,719 वोट से जीत हासिल की. उन्हें 83,263 वोट मिले.जबकि 76,544 वोट के साथ सपा प्रत्याशी किरन वर्मा दूसरे स्थान पर रहे. इस सीट पर बहुजन समाज पार्टी गयाचरण दिनकर 36,871 वोट के साथ तीसरे नंबर थे.
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