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नरैनी विधानसभा चुनाव 2027 (Naraini Assembly Election 2027)

नरैनी उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बांदा जिले का एक नगर पंचायत कस्बा और नरैनी तहसील का मुख्यालय है. यह राज्य के दक्षिणी किनारे पर मध्य प्रदेश की सीमा के पास स्थित है और जिला मुख्यालय बांदा से लगभग 35 से 40 किलोमीटर दक्षिण में है. यह एक महत्वपूर्ण स्थानीय प्रशासनिक और बाजार केंद्र है, जो विशेष रूप से ऐतिहासिक कालिंजर किले के निकट होने

के लिए जाना जाता है.

नरैनी के नाम पर एक विधानसभा क्षेत्र है, जो स्वतंत्र भारत में 1952 में हुए पहले चुनावों के बाद से अस्तित्व में है. यह बांदा लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा खंडों में से एक है. मूल रूप से यह सामान्य वर्ग की सीट थी, लेकिन 2008 के परिसीमन आदेश के बाद इसे अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दिया गया. इसी आदेश के तहत इसकी सीमाओं का भी पुनर्गठन किया गया. वर्तमान में इसमें नरैनी तहसील के नरैनी, करतल और कालिंजर कानूनगो सर्किल तथा अतर्रा तहसील के अतर्रा, ओरन और बदौसा कानूनगो सर्किल शामिल हैं. इसके अलावा नरैनी, अतर्रा और ओरन नगर पंचायतें भी इस विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं.

1952 के बाद से नरैनी विधानसभा क्षेत्र में हुए सभी 18 विधानसभा चुनावों में यह सीट शामिल रही है. भाजपा ने यह सीट पांच बार जीती है, जिसमें उसके पूर्ववर्ती संगठन भारतीय जनसंघ की 1962 और 1967 की दो जीत भी शामिल हैं. कांग्रेस, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने चार-चार बार जीत हासिल की है, जबकि समाजवादी पार्टी ने 1993 में यह सीट जीती थी. यह पार्टी के गठन के बाद उसका पहला विधानसभा चुनाव था. उल्लेखनीय है कि बसपा ने 1996 से 2012 के बीच लगातार चार चुनावों में जीत हासिल की और हर बार उसका उम्मीदवार अलग था.

2012 में बसपा ने लगातार चौथी बार यह सीट जीती. यह नरैनी के अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने के बाद पहला चुनाव था. बसपा के उम्मीदवार गया चरण दिनकर ने समाजवादी पार्टी के भारत लाल दीवाकर को 4,757 वोटों से हराया. तीसरे स्थान पर रही भाजपा ने 2017 में दोनों दलों को पीछे छोड़ दिया. भाजपा के उम्मीदवार राजकरण कबीर ने दीवाकर को 45,007 वोटों से हराया. 2022 में भाजपा ने मौजूदा विधायक की जगह ओममनी वर्मा को टिकट देकर सत्ता विरोधी माहौल का मुकाबला करने की कोशिश की. यह फैसला सफल रहा, हालांकि जीत का अंतर काफी कम हो गया. वर्मा को 83,263 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी की किरण वर्मा को 76,544 वोट मिले. इस तरह भाजपा ने 6,719 वोटों के अंतर से जीत हासिल की.

2009 के बाद से नरैनी विधानसभा क्षेत्र में हुए लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी और भाजपा के बीच बढ़त का मुकाबला देखने को मिला है. 2009 में समाजवादी पार्टी ने बसपा पर 8,922 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में भाजपा तीसरे स्थान से आगे बढ़कर समाजवादी पार्टी से 25,945 वोटों की बढ़त बनाने में सफल रही. 2019 में समाजवादी पार्टी पर भाजपा की बढ़त घटकर 12,877 वोट रह गई. 2024 में भाजपा की स्थिति और कमजोर हुई. बांदा लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार कृष्णा देवी शिवशंकर पटेल को 86,894 वोट मिले, जबकि भाजपा के आर. के. सिंह पटेल को 69,200 वोट मिले. इस तरह नरैनी विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी ने 17,694 वोटों की बढ़त हासिल की. बसपा के उम्मीदवार मयंक द्विवेदी को 46,003 वोट मिले और वह तीसरे स्थान पर रहे.

पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 295,509 थी, जो 2017 में बढ़कर 335,788 और 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान 343,684 हो गई. 2022 में यह संख्या मामूली रूप से घटकर 342,560 रह गई और 2024 में 350,672 थी. 2026 की अंतिम मतदाता सूची में 324,311 मतदाता दर्ज होने की जानकारी दी गई है. यह 2024 के आंकड़े से 26,361 कम है, यानी इसमें 7.52 प्रतिशत की कमी आई है.

यहां मतदान प्रतिशत आमतौर पर अधिक रहा है, हालांकि अलग-अलग चुनावों में इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. 2012 में मतदान प्रतिशत 58.63 रहा और 2017 में बढ़कर 60.77 प्रतिशत हो गया. इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में यह बढ़कर 65.19 प्रतिशत पहुंच गया. 2022 के विधानसभा चुनाव में यह घटकर 62.70 प्रतिशत और 2024 के लोकसभा चुनाव में 60.64 प्रतिशत रह गया.

नरैनी हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है. अनुमान के अनुसार, यहां मुस्लिम आबादी लगभग 7.70 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जातियों की आबादी करीब 23.09 प्रतिशत है. अन्य प्रमुख समुदायों में ब्राह्मण, लोधी, यादव, कुर्मी, निषाद, ठाकुर, वैश्य, कुम्हार या प्रजापति और पाल शामिल हैं. अनुमान के अनुसार, लगभग 85.65 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, जबकि नरैनी, अतर्रा और ओरन मिलकर शेष 14.35 प्रतिशत शहरी आबादी का हिस्सा बनाते हैं.

नरैनी कस्बा और इसके आसपास का क्षेत्र प्राचीन बुंदेलखंड का हिस्सा है. नरैनी बुंदेलखंड के पठारी क्षेत्र के दक्षिणी किनारे के पास स्थित है, जहां की भूमि विंध्य पर्वत प्रणाली की चट्टानी पहाड़ियों और ढलानों में बदल जाती है. यहां से लगभग 20 किलोमीटर दूर स्थित कालिंजर किला क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्मारकों में से एक है. चंदेल राजवंश ने इसे एक महत्वपूर्ण सैन्य गढ़ बनाया था. बाद में यह किला मुगलों और अंग्रेजों सहित कई शासकों के अधीन रहा. यहां स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों में से एक है. नरैनी के आसपास का क्षेत्र लंबे समय से कृषि प्रधान रहा है. बागेन और अन्य मौसमी नदियों का स्थानीय खेती पर प्रभाव पड़ता रहा है. औपनिवेशिक काल में नरैनी तहसील मुख्यालय के रूप में विकसित हुआ. लगभग 1935 में यहां टाउन एरिया कमेटी की स्थापना हुई, जो बाद में वर्तमान नगर पंचायत में बदल गई.

स्थानीय अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है. गेहूं, धान, दालें और सब्जियां यहां की प्रमुख फसलें हैं. लगभग 35 से 40 किलोमीटर दूर स्थित बांदा मुख्य प्रशासनिक और वाणिज्यिक केंद्र है. अतर्रा यहां से लगभग 25 से 30 किलोमीटर दूर है, जबकि चित्रकूट की दूरी करीब 60 से 70 किलोमीटर और महोबा की दूरी लगभग 90 से 100 किलोमीटर है. कानपुर लगभग 150 किलोमीटर दूर है. लखनऊ की दूरी करीब 230 से 250 किलोमीटर है, जबकि प्रयागराज लगभग 150 से 170 किलोमीटर दूर है. अयोध्या करीब 300 किलोमीटर और वाराणसी लगभग 280 से 300 किलोमीटर दूर है. मध्य प्रदेश का सतना लगभग 100 किलोमीटर और खजुराहो करीब 110 किलोमीटर दूर है. नरैनी में अपना कोई प्रमुख रेलवे स्टेशन नहीं है. यहां से लगभग 20 किलोमीटर दूर अतर्रा रेलवे स्टेशन और करीब 35 से 40 किलोमीटर दूर बांदा जंक्शन के जरिए व्यापक रेल नेटवर्क तक पहुंचा जा सकता है.

चुनावी आंकड़ों के आधार पर भाजपा अपने प्रतिद्वंद्वियों से मजबूत दिखाई देती है. 2009 के बाद से नरैनी में हुए सात प्रमुख चुनावों में भाजपा ने चार बार जीत या बढ़त हासिल की है, जबकि समाजवादी पार्टी को दो बार बढ़त मिली और बसपा ने एक बार जीत दर्ज की. हालांकि, भाजपा के घटते जीत के अंतर को पार्टी नेतृत्व के लिए चिंता का विषय माना जा सकता है. 2019 के लोकसभा चुनाव में इस विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी पर भाजपा की बढ़त 5.80 प्रतिशत अंक थी. 2022 के विधानसभा चुनाव में यह घटकर 3.14 प्रतिशत अंक रह गई. इसके बाद 2024 में समाजवादी पार्टी ने 8.32 प्रतिशत अंक की बढ़त हासिल कर ली. भाजपा लगातार दो विधानसभा चुनावों में अपनी जीत से संतुष्ट हो सकती है और यह तर्क दे सकती है कि लोकसभा चुनाव के नतीजे अपने आप विधानसभा चुनाव के परिणामों में नहीं बदलते. इसके बावजूद नरैनी में समाजवादी पार्टी की वापसी और उसके बढ़ते जनाधार से 2027 में कड़े मुकाबले के संकेत मिलते हैं. विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद मतदाताओं की संख्या में आई कमी का भी चुनाव पर प्रभाव पड़ सकता है, हालांकि उपलब्ध आंकड़ों से यह साबित नहीं होता कि किसी विशेष समुदाय के मतदाताओं की संख्या में असमान रूप से अधिक कमी आई है. दोनों दल बसपा की स्थिति पर भी नजर रखेंगे. हाल के वर्षों में उसका प्रभाव घटा है, लेकिन वह अब भी एक महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत है. पिछले तीन प्रमुख चुनावों में वह तीसरे स्थान पर रही है.

(अजय झा)

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नरैनी विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Ommani Varma

BJP
वोट83,263
विजेता पार्टी का वोट %38.9 %
जीत अंतर %3.1 %

नरैनी विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Kiran Verma

    SP

    76,544
  • Gayacharan Dinkar

    BSP

    36,871
  • Shankar Lal

    JANADIP

    6,558
  • Nota

    NOTA

    3,420
  • Dayaram

    CPI

    2,550
  • Pawan Devi

    INC

    1,806
  • Lavlesh Kumar

    ASP

    1,320
  • Ritesh Kumar

    ASPKR

    973
  • Radhe Shyam

    AAAP

    662
WINNER

Raj Karan Kabir

BJP
वोट92,412
विजेता पार्टी का वोट %45.3 %
जीत अंतर %22.1 %

नरैनी विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Bharat Lal Diwakar

    INC

    47,405
  • Gayacharan Dinkar

    BSP

    44,610
  • Nota

    NOTA

    3,655
  • Daya Ram

    CPI

    3,344
  • Mata Prasad

    IND

    2,442
  • Rameshchandra Kuril

    RLD

    2,407
  • Ramkripal

    IND

    1,899
  • Babooram Verma

    ASP

    1,503
  • Ramcharan

    IND

    1,083
  • Rajendra Kumar

    IND

    972
  • Ram Khelavan

    BMUP

    826
  • Ramkishor

    IND

    770
  • Arun Kumar

    IND

    673
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नरैनी विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

नरैनी विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में नरैनी में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के नरैनी विधानसभा चुनाव सीट पर Ommani Varma को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

नरैनी विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

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