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बुलेट ट्रेन चलने वाली है... उसकी पटरियां कैसी होंगी? नॉर्मल ट्रैक से एकदम अलग

कुछ सालों में भारत में भी बुलेट ट्रेन दौड़ती हुई नजर आएगी. इसका काम काफी स्पीड से चल रहा है. ऐसे में जानते हैं कि आखिर बुलेट ट्रैन का ट्रैक कितना अलग होगा?

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बुलेट ट्रेन का ट्रैक मेट्रो और नॉर्मल रेल से काफी अलग होगा. (Photo: PIB)
बुलेट ट्रेन का ट्रैक मेट्रो और नॉर्मल रेल से काफी अलग होगा. (Photo: PIB)

देश की पहली 'बुलेट ट्रेन' का काम बड़ी स्पीड से चल रहा है. कुछ ही सालों में स्वदेशी बुलेट ट्रेन पटरियों पर दौड़ती नजर आएगी. बताया जा रहा है कि भारत की इस स्पीड ट्रेन की मैक्सिमम स्पीड 280 है, लेकिन ये पटरी पर 250 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकेगी. अभी तक भारत में वंदे भारत 180 की स्पीड से चलती है. ऐसे में सवाल है कि ये ट्र्रेन क्या सामान्य पटरियों पर ही चलेगी या इसके लिए खास तरह की पटरियां डिजाइन होंगी. 

क्या उस ट्रैक में भी नीचे पत्थर रखे जाएंगे और उसके बीच का गैप कितना होगा? साथ ही उस पटरी के बीच में लकड़ी या सीमेंट के ब्लॉक भी लगे होंगे या नहीं. तो समझते हैं जिस ट्रैक पर 250 की स्पीड से ट्रेन चलेगी, वो ट्रैक कैसा होगा और उसमें क्या खास होगा...

कैसी होगी बुलेट ट्रेन की पटरी?

ये नॉर्मल ट्रैक से काफी अलग होगी. इसमें सबसे बड़ा अंतर यह है कि पटरियों के नीचे गिट्टी (पत्थर) बिछाने के बजाय कंक्रीट की मजबूत स्लैब बनाई जाएगी. इसी वजह से इसे बैलेस्टलैस ट्रैकयानी बिना गिट्टी वाला ट्रैक कहा जाता है. मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर में जापान की शिंकानसेन तकनीक पर आधारित जे-स्लैब ट्रैक बनाया जाएगा. भारत में पहली बार इस तरह का जे-स्लैब सिस्टम इस्तेमाल हो रहा है. 

railway track

कई लेयर में बनेगा ट्रैक?

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  • इस खास ट्रैक में पहले नीचे काफी मजबूत बेस बनाया जाता है और उसके बाद उस पर पटरियां बिछाई जाती हैं. सबसे नीचे मजबूत कंक्रीट का बेस तैयार किया जाता है. यह ट्रैक को सहारा देता है. 
  • फिर उसके बाद कंक्रीट बेस के ऊपर एक खास तरह का सीमेंट और डामर से तैयार मिश्रण इस्तेमाल होता है, इसे सीएएम कहा जाता है. इससे स्लैब सही लेवल और पोजिशन में रहता है.
  • फिर उसके ऊपर इसके ऊपर फैक्ट्री में पहले से तैयार की गई कंक्रीट की बड़ी-बड़ी स्लैब बिछाई जाती हैं. इन्हें मौके पर ढालने के बजाय फैक्ट्री में तय माप के अनुसार तैयार किया जाता है. 
  • इसके बाद लोहे की दो पटरियां लगाई जाती हैं. इन्हें विशेष फास्टनर की मदद से कंक्रीट स्लैब से जोड़ा जाता है. इन्हीं पटरियों पर बुलेट ट्रेन दौड़ेगी. 

इसके अलावा बुलेट ट्रेन की पटरी की चौड़ाई भी अलग होगी. रेलवे में दो पटरियों के बीच की दूरी को गेज कहते हैं. भारत में सामान्य रेलवे में ज्यादातर ब्रॉड गेज का इस्तेमाल होता है. इसकी चौड़ाई 1,676 मिलीमीटर यानी करीब 5.5 फीट होती है. लेकिन मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर में स्टैंडर्ड गेज का इस्तेमाल होगा. इसकी चौड़ाई 1,435 मिलीमीटर यानी करीब 4.7 फीट होती है. 

Bullet train

मेट्रो से मिलती जुलती होगी पटरी

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मेट्रो में भी एलिवेटेड और अंडरग्राउंड सेक्शन में अक्सर कंक्रीट के बेस पर बिना गिट्टी वाला ट्रैक बनाया जाता है. इसलिए देखने में यह बुलेट ट्रेन के ट्रैक जैसा लग सकता है. लेकिन, इसमें जे-स्लैब सिस्टम लगाया जाएगा और मजबूती के मामले में भी मेट्रो से काफी अलग होगा. बुलेट ट्रेन की पटरी में एक और खास बात है. इसमें पटरियों को सामान्य छोटे-छोटे टुकड़ों में जोड़कर नहीं छोड़ा जाएगा.

इसमें रेल सेक्शन को फ्लैश बट वेल्डिंग मशीन की मदद से जोड़कर 200 मीटर लंबे पैनल बनाए जा रहे हैं. इस प्रक्रिया को फ्लैश बट वेल्डिंग कहते हैं. इसमें रेल के सिरों को गर्म करके दबाव के साथ जोड़ा जाता है. इससे मजबूत जोड़ तैयार होता है. 
 

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