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बबेरू विधानसभा चुनाव 2027 (Baberu Assembly Election 2027)

बबेरू उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में बांदा जिले की एक नगर पंचायत और बबेरू तहसील का मुख्यालय है. यह बांदा जिला मुख्यालय से लगभग 40 से 45 किलोमीटर पूर्व में स्थित है और आसपास के कृषि प्रधान ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों को पूरा करने वाला एक महत्वपूर्ण स्थानीय प्रशासनिक और वाणिज्यिक केंद्र है.

1957 के चुनावों से पहले स्थापित बबेरू

एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है और बांदा लोकसभा सीट के पांच विधानसभा खंडों में से एक है. 2012 के चुनावों से प्रभावी हुए परिसीमन आदेश, 2008 के तहत बबेरू में पूरी बबेरू तहसील शामिल है, जिसमें लगभग 188 गांव और बबेरू कस्बा आता है. इस विधानसभा क्षेत्र का स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है, जबकि शहरी क्षेत्र का हिस्सा छोटा है.

बबेरू में अपने गठन के बाद से अब तक 17 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. यहां के मतदाताओं की राजनीतिक पसंद में अक्सर बदलाव देखने को मिला है. 1969 से 1977 के बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की लगातार तीन जीत को छोड़ दें, तो किसी भी दल ने लगातार दो से अधिक कार्यकाल तक जीत हासिल नहीं की है. कुल मिलाकर कांग्रेस ने यह सीट चार बार जीती है, लेकिन 1989 के बाद से उसे यहां जीत नहीं मिली है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी ने तीन-तीन बार जीत दर्ज की है. भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवारों ने दो-दो बार इस सीट पर जीत हासिल की है.

बसपा के गया चरण दिनकर और समाजवादी पार्टी के विशंभर सिंह यादव ने तीन-तीन बार जीत दर्ज की है, जबकि देव कुमार यादव ने बबेरू का चार बार प्रतिनिधित्व किया. उन्होंने दो बार भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, एक बार निर्दलीय उम्मीदवार और एक बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीता.

2012 में विशंभर सिंह यादव ने अपनी सीट बरकरार रखी. उन्होंने 2007 में पहली बार समाजवादी पार्टी के टिकट पर यह सीट जीती थी. 2012 में उन्होंने बसपा के बृज मोहन सिंह को 1,148 वोटों के मामूली अंतर से हराया. भाजपा 2012 के चुनाव में चौथे स्थान पर रही थी, लेकिन 2017 में उसने अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए जीत हासिल की. भाजपा के उम्मीदवार चंद्रपाल कुशवाहा ने बसपा की किरण यादव को 22,301 वोटों से हराया. समाजवादी पार्टी के मौजूदा विधायक तीसरे स्थान पर रहे.

2022 में समाजवादी पार्टी ने फिर वापसी की. विशंभर सिंह यादव को 79,614 वोट मिले, जबकि भाजपा के अजय कुमार पटेल को 72,221 वोट मिले. इस तरह विशंभर सिंह यादव ने 7,393 वोटों से जीत दर्ज की. चुनावों के बीच भाजपा द्वारा अपने उम्मीदवार को बदलने का फैसला अब तक समाजवादी पार्टी के स्थापित स्थानीय नेतृत्व को हटाने में सफल नहीं हुआ है. 2017 की हार के बाद विशंभर सिंह यादव ने फिर से विधानसभा में वापसी की.

बबेरू विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के संघर्ष का असर लोकसभा चुनावों में भी दिखाई देता है, जहां हाल के चुनावों में समाजवादी पार्टी ने अपनी मजबूत स्थिति स्थापित की है. 2009 में समाजवादी पार्टी ने बसपा पर 8,017 वोटों की बढ़त बनाई थी, जबकि भाजपा तीसरे स्थान पर रही थी. 2014 में भाजपा और समाजवादी पार्टी की स्थिति बदल गई. उस चुनाव में भाजपा ने बसपा पर 11,851 वोटों की बढ़त बनाई, जबकि समाजवादी पार्टी तीसरे स्थान पर रही. 2019 में समाजवादी पार्टी ने वापसी करते हुए भाजपा को 17,325 वोटों से पीछे छोड़ दिया और 2024 में अपनी बढ़त और बढ़ा ली. समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार कृष्णा देवी शिवशंकर पटेल को 91,252 वोट मिले, जबकि भाजपा के आर. के. सिंह पटेल को 61,512 वोट मिले. इस तरह बबेरू विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी पार्टी को 29,740 वोटों की बढ़त मिली. बसपा को 41,465 वोट मिले.

पंजीकृत मतदाताओं की संख्या 2012 में 305,982 से बढ़कर 2017 में 327,885 और 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान 336,081 हो गई. 2022 में यह संख्या 338,630 और 2024 में 344,754 थी. 2026 के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में 315,583 मतदाता दर्ज किए गए. यह 2024 के आंकड़े से 29,171 कम है, यानी मतदाताओं की संख्या में 8.46 प्रतिशत की कमी आई है.

यहां मतदान प्रतिशत आमतौर पर मध्यम रहा है, हालांकि अलग-अलग चुनावों में इसमें उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. 2012 में मतदान प्रतिशत 56.32 रहा, जो 2017 में बढ़कर 59.14 प्रतिशत हो गया. इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में यह बढ़कर 60.99 प्रतिशत हो गया. 2022 के विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत मामूली रूप से घटकर 60.77 प्रतिशत रहा और 2024 के लोकसभा चुनाव में यह और कम होकर 59.43 प्रतिशत रह गया.

बबेरू हिंदू बहुल विधानसभा क्षेत्र है. यहां मुस्लिम आबादी का अनुमान लगभग 7.70 प्रतिशत है, जबकि अनुसूचित जातियों की आबादी करीब 22.13 प्रतिशत है. अन्य प्रमुख समुदायों में यादव, कुर्मी, कुशवाहा, लोध, ब्राह्मण और ठाकुर शामिल हैं. इनके अलावा वैश्य और अन्य पिछड़े समुदाय भी यहां रहते हैं. अनुमान के अनुसार, लगभग 96.84 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, जबकि बबेरू कस्बे का शहरी हिस्सा शेष 3.16 प्रतिशत है.

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, बबेरू नाम का संबंध बारबर या बाबर नाम के एक पूर्व शासक से है. औपनिवेशिक काल के दौरान भी यह कस्बा एक तहसील का मुख्यालय था. यहां के पैतृक भू-स्वामी बैस राजपूत थे, जिन्होंने 1857 के विद्रोह में शामिल होने के बाद अपने अधिकार खो दिए थे. इसके बाद यह गांव फतेहपुर के एक बनिया परिवार को दे दिया गया, जो पहले यहां शोरा बनाने का कारखाना चलाता था. बबेरू मध्य-20वीं सदी में बने मड़िदाई का मंदिर के लिए जाना जाता है. यह यमुना और बागैन नदियों से प्रभावित उपजाऊ क्षेत्र में स्थित है. कृषि स्थानीय अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार है. यहां विशेष रूप से गेहूं, चावल, दालों और सब्जियों की खेती की जाती है.

बबेरू सड़क मार्ग से बांदा और बुंदेलखंड क्षेत्र के अन्य कस्बों से जुड़ा हुआ है. बांदा यहां से लगभग 40 से 45 किलोमीटर दूर है, जबकि अतर्रा की दूरी करीब 30 से 35 किलोमीटर और चित्रकूट की दूरी लगभग 50 से 60 किलोमीटर है. फतेहपुर लगभग 50 से 60 किलोमीटर और हमीरपुर करीब 80 किलोमीटर दूर है. कानपुर की दूरी लगभग 110 से 120 किलोमीटर है, जबकि सड़क मार्ग से लखनऊ करीब 170 किलोमीटर दूर है. प्रयागराज की दूरी लगभग 130 से 135 किलोमीटर है. बबेरू में अपना कोई प्रमुख रेलवे स्टेशन नहीं है. यहां से लगभग 30 से 35 किलोमीटर दूर अतर्रा रेलवे स्टेशन और करीब 40 से 45 किलोमीटर दूर बांदा जंक्शन के जरिए रेल नेटवर्क तक पहुंचा जा सकता है.

2014 के लोकसभा चुनाव और 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा से मिली लगातार दो हार के बाद समाजवादी पार्टी ने बबेरू में अपनी स्थिति मजबूत की है. 2017 के बाद हुए तीनों चुनावों में समाजवादी पार्टी अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे रही है. 2009 के बाद से इस विधानसभा क्षेत्र में हुए सात प्रमुख चुनावों में समाजवादी पार्टी ने दो विधानसभा चुनाव जीते और तीन लोकसभा चुनावों में बढ़त बनाई. इसके मुकाबले भाजपा ने एक विधानसभा चुनाव जीता और एक लोकसभा चुनाव में बढ़त हासिल की. इन आंकड़ों से समाजवादी पार्टी को 2027 में बबेरू सीट बरकरार रखने की उम्मीद मिलती है. विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद मतदाताओं की संख्या में आई कमी 2022 और 2024 में समाजवादी पार्टी की जीत के अंतर से अधिक है. हालांकि, ऐसा कोई आधिकारिक जातिवार या समुदायवार आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, जिससे पता चल सके कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण से किन समूहों पर अनुपातहीन रूप से अधिक प्रभाव पड़ा. समाजवादी पार्टी को अपनी स्थिति मजबूत लगने के कई कारण हैं, लेकिन वह भाजपा की चुनौती को हल्के में नहीं ले सकती, क्योंकि इस विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की राजनीतिक पसंद में पहले भी कई बार बदलाव हो चुका है.

(अजय झा)

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बबेरू विधानसभा चुनाव के पिछले नतीजे

2022
2017
WINNER

Vishambhar Singh Yadav

SP
वोट79,614
विजेता पार्टी का वोट %38.8 %
जीत अंतर %3.6 %

बबेरू विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Ajay Kumar

    BJP

    72,221
  • Ramsevak Shukla

    BSP

    37,009
  • Ashok Kumar

    JANADIP

    4,458
  • Nota

    NOTA

    3,047
  • Gajendra Singh Patel

    INC

    2,112
  • Simmi Burman

    ASPKR

    1,944
  • Dr. Ram Chandra Saras

    CPI

    1,589
  • Samta Devi

    BMUP

    817
  • Jiyalal Dhuriya

    BSCP

    804
  • Rajbahadur Kushwaha

    RVLP

    749
  • Jagroop Bhaskar

    ASP

    585
  • Jaypal

    BSHP

    504
WINNER

Chandrapal Kushwaha

BJP
वोट76,187
विजेता पार्टी का वोट %39.3 %
जीत अंतर %11.5 %

बबेरू विधानसभा चुनाव के अन्य उम्मीदवार

  • नाम
    पार्टी
    वोट
  • Kiran Yadav

    BSP

    53,886
  • Bishambhar Singh

    SP

    51,693
  • Nota

    NOTA

    3,559
  • Rajbahadur

    IND

    2,881
  • Haseeb Ali

    CPI

    2,788
  • Shiv Sharan

    JANADIP

    1,941
  • Jagroop Bhaskar

    ASP

    965
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बबेरू विधानसभा चुनाव सीट 2027 से जुड़े सवाल जवाब (FAQs)

बबेरू विधानसभा क्षेत्र के वर्तमान (2022) विधायक कौन हैं?

2022 में बबेरू में विजयी उम्मीदवार का वोट प्रतिशत कितना था?

2022 के बबेरू विधानसभा चुनाव सीट पर Vishambhar Singh Yadav को कितने वोट मिले थे?

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 कब आयोजित होंगे?

पिछला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव किस पार्टी ने जीता था?

बबेरू विधानसभा चुनाव परिणाम 2027 कब घोषित होंगे?

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