इमरान मसूद बनाम इकरा हसन... पश्चिमी यूपी में दो मुस्लिम नेता क्यों आमने-सामने आ गए

यूपी में 2027 के चुनावों से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन की रस्साकशी अब इमरान मसूद और इकरा हसन की जुबानी जंग में बदल गई है. मसूद जहां सीटों के जल्द बंटवारे के लिए दबाव बना रहे हैं, वहीं इकरा हसन ने पलटवार कर साफ किया है कि प्रदेश में भाजपा को हराने में केवल अखिलेश यादव ही सक्षम हैं.

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इमरान मसूद बनाम इकरा हसन (Photo-ITG) इमरान मसूद बनाम इकरा हसन (Photo-ITG)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 22 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:53 AM IST

उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर चल रही शह-मात की राजनीति अब एक दिलचस्प मोड़ पर आ पहुंची है. सीट-शेयरिंग को लेकर जारी अंदरूनी घमासान में अब पश्चिमी यूपी के दो प्रमुख मुस्लिम चेहरे आमने-सामने आ गए हैं. यह मामला सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और कैराना से सपा सांसद इकरा हसन के बीच की सीधी सियासी जंग में तब्दील होता दिख रहा है.

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सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद लगातार सपा पर हमलावर रुख अपनाए हुए हैं. इतना ही नहीं, वे अखिलेश यादव की मुस्लिम पॉलिटिक्स पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं. इमरान मसूद के सियासी तेवर को देखते हुए सपा ने कैराना से सांसद इकरा हसन को फ्रंटफुट पर उतार दिया है.

सपा सांसद इकरा हसन ने इमरान मसूद पर करारा पलटवार करते हुए साफ कहा कि प्रदेश में अखिलेश यादव ही बीजेपी का मुकाबला कर पाने में सक्षम हैं. सीधे तौर पर कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए इकरा ने कहा कि कांग्रेस अकेले चुनावी मैदान में उतरने की स्थिति में कुछ न कर पाएगी. इस तरह कांग्रेस और सपा की लड़ाई इमरान मसूद बनाम इकरा हसन में तब्दील हो गई है.

इमरान मसूद का दबाव और 'अकेले लड़ने' का दांव

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उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के छह सांसद हैं, लेकिन सबसे मुखर इमरान मसूद ही नजर आते हैं. सपा के साथ गठबंधन में कांग्रेस की बार्गेनिंग पावर को मजबूत करने का बीड़ा लगता है इमरान मसूद ने अपने कंधों पर उठा रखा है. इमरान मसूद लगातार यह दबाव बना रहे हैं कि सपा अक्टूबर तक सीट-बंटवारा तय करे. उनका तर्क है कि राहुल गांधी की अगुवाई के बिना भाजपा का मुकाबला संभव नहीं है.

इमरान मसूद लगातार कह रहे हैं कि गठबंधन को लेकर जो भी होना है, उसे तुरंत फाइनल रूप दिया जाना चाहिए. देरी होने की स्थिति से नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के बिना भाजपा को नहीं हराया जा सकता है. गठबंधन में यदि अखिलेश यादव बड़ा दिल नहीं दिखाते हैं तो कांग्रेस अकेले चुनाव मैदान में उतरने से भी पीछे नहीं हटेगी. इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि हम अपने जिले की सीटों पर कोई रियायत नहीं करने वाले हैं.

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का यह आक्रामक रुख असल में कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह पश्चिमी यूपी और मुस्लिम बहुल सीटों पर सपा के सामने अपनी शर्तों पर सौदेबाजी करना चाहती है.

फ्रंटफुट पर सपा ने इकरा हसन को उतारा

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सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इमरान मसूद से सीधे खुद उलझने के बजाय अपने क्षेत्रीय जनाधार वाले युवा चेहरों को आगे किया है. इमरान मसूद की आक्रामक बयानबाजी का जवाब देने के लिए उन्होंने पश्चिमी यूपी के अपने मुस्लिम चेहरे इकरा हसन को फ्रंटफुट पर उतार दिया है. इकरा हसन ने बिना किसी हिचकिचाहट के इमरान मसूद पर पलटवार करते हुए साफ कहा कि उत्तर प्रदेश में अगर कोई नेता भाजपा को हराने में सक्षम है, तो वे सिर्फ अखिलेश यादव हैं.

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की हैसियत बताते हुए इकरा हसन ने कहा कि अगर कांग्रेस अपने दम पर अकेले चुनाव लड़ती है तो वह कुछ नहीं कर पाएगी. कांग्रेस-सपा गठबंधन को लेकर उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए और चेतावनी भरे लहजे में कहा कि गठबंधन रहा तो अच्छा है, वरना इसका नुकसान केवल और केवल कांग्रेस को होगा, सपा को नहीं. इकरा हसन का यह बयान राज्य में सपा और कांग्रेस के रिश्तों को लेकर नई सियासत गरमा रहा है.

इमरान मसूद बनाम इकरा हसन क्यों हो गया?

इमरान मसूद के सामने इकरा हसन का यह दांव सपा की एक सोची-समझी रणनीति के तहत देखा जा रहा है. इमरान मसूद और इकरा हसन दोनों ही पश्चिमी यूपी के कद्दावर मुस्लिम सियासी घरानों से आते हैं. मसूद के हमलों का जवाब देने के लिए इकरा को आगे करके सपा ने यह संदेश दिया है कि मुस्लिम मतदाताओं का पहला भरोसा आज भी सपा का 'पीडीए' (PDA) मॉडल ही है.

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इमरान मसूद और इकरा हसन के बीच की यह जुबानी जंग सिर्फ दो नेताओं का बयान भर नहीं है, बल्कि यह सपा-कांग्रेस के बीच चल रही गहरी रस्साकशी का नतीजा है. कांग्रेस जल्द से जल्द अपनी सीटें पक्की करके प्रचार में उतरना चाहती है, ताकि बाद में अखिलेश यादव के रहमों-करम पर न निर्भर रहना पड़े.

सपा पहले अपने जमीनी समीकरण दुरुस्त करना चाहती है और कांग्रेस को उसकी जमीनी ताकत (संगठन के अभाव) का अहसास कराकर कम से कम सीटें देना चाहती है. इमरान मसूद बनाम इकरा हसन के इस नए सियासी चैप्टर ने यह साफ कर दिया है कि 2027 का गठबंधन भले ही ऊपरी तौर पर तय दिख रहा हो, लेकिन धरातल पर सीटों और सियासी दबदबे की यह लड़ाई अभी और तीखी होने वाली है.

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