पंजाब विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मी के बीच कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने पद छोड़ने की पेशकश की है. कांग्रेस ने गुटबाजी को खत्म करने के लिए एक नया फार्मूला तैयार किया है. कांग्रेस हाईकमान चाहता है कि प्रदेश संगठन की कमान ऐसे चेहरे को सौंपी जाए, जो राजा वड़िंग और पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी के दोनों खेमों को एक साथ साध सके.
अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने अभी तक औपचारिक रूप से इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन उन्हें एक दिन पहले कांग्रेस के दिल्ली मुख्यालय से फ़ोन आया था, जिसमें उन्हें बताया गया कि लगभग साढ़े चार साल तक अध्यक्ष रहने के बाद अब नेतृत्व में बदलाव किया जा रहा है.
पंजाब कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और केंद्रीय पर्यवेक्षकों (समेत सचिन पायलट और भूपेश बघेल) ने हाल के समय में राज्य के वरिष्ठ नेताओं, सांसदों, विधायकों और संगठन से जुड़े पदाधिकारियों से अलग-अलग स्तर पर गहन संवाद किया. इस व्यापक मंथन के बाद तैयार की गई रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी को सौंपी गई. माना जा रहा है कि इसी रिपोर्ट के आधार पर पार्टी ने यह फैसला लिया है.
पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बदलने का प्लान
कांग्रेस हाईकमान का मानना है कि 2027 के चुनावों में उतरने से पहले दोनों गुटों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाना ही पार्टी की जीत की कुंजी है. ऐसे में कांग्रेस ने राजा वडिंग को बदलने का प्लान बनाया है. सूत्रों का कहना है कि राजा वडिंग की राहुल गांधी के साथ बैठक तय है, जहां वे दिल्ली जाकर अपनी बात रखेंगे.
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, इस्तीफा देने का कोई तय कानूनी या सरकारी प्रोटोकॉल नहीं होता, बल्कि वर्तमान अध्यक्ष नए अध्यक्ष को ज़िम्मेदारी सौंपते हैं. पूरी संभावना है कि कांग्रेस उनके कार्यकाल के लिए धन्यवाद देते हुए एक पत्र जारी करेगी और नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा करेगी. ऐसे में पंजाब कांग्रेस में राजा वडिंग की जगह जल्द ही किसी नए नाम का ऐलान हो सकता है.
कांग्रेस की गुटबाजी खत्म करने का दांव
वरिष्ठ नेताओं द्वारा तैयार रिपोर्ट में वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के खिलाफ पार्टी के भीतर पनप रहे असंतोष और सभी गुटों को एक मंच पर लाने में आ रही व्यावहारिक चुनौतियों का प्रमुखता से उल्लेख किया गया है.
रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी के चलते संगठन का कामकाज प्रभावित हो रहा है, जिससे 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले नेतृत्व परिवर्तन और एक नए सर्वमान्य चेहरे को कमान सौंपना आवश्यक बताया गया है. पंजाब कांग्रेस में जारी इस खींचतान के बीच अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने इस्तीफे की पेशकश कर नए अध्यक्ष का रास्ता साफ कर दिया है.
पंजाब कांग्रेस का नया अध्यक्ष कौन होगा?
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस अध्यक्ष बदलने का दांव चलने जा रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि प्रदेश संगठन की कमान अब किसे सौंपी जाएगी और कौन 2027 के चुनाव में पार्टी की अगुवाई करेगा. कांग्रेस हाईकमान का मुख्य मकसद एक ऐसे चेहरे को कमान सौंपना है जो वड़िंग और चन्नी दोनों गुटों को साध सके.
प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए पूर्व मंत्री विजय इंदर सिंगला का नाम तेजी से चर्चा में है. सिंगला को पंजाब में एक हिंदू चेहरे और केंद्रीय नेतृत्व के करीबी के रूप में देखा जा रहा है. हाईकमान का मानना है कि उनका तटस्थ रुख दोनों खेमों के बीच जारी अंदरूनी खींचतान को खत्म कर राज्य इकाई में एकजुटता ला सकता है. इसके अलावा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के नाम की भी चर्चा है.
सिंगला और बाजवा के अलावा पूर्व ओलंपियन परगट सिंह, पूर्व अध्यक्ष सुखजिंदर सिंह रंधावा, राणा केपी सिंह और सुखबिंदर सिंह सरकारिया के नाम भी रेस में हैं. पंजाब में कांग्रेस नेतृत्व को ऐसे नेता की तलाश है जो जाट सिख, दलित और हिंदू समुदायों के बीच एक बेहतर सामाजिक और राजनीतिक संतुलन स्थापित कर सके.
पंजाब में कांग्रेस कैसे होगी एकजुट?
पंजाब में कांग्रेस कई गुटों में बंटी हुई है, जिसे खत्म करने के लिए बैठकों का दौर जारी है. नई दिल्ली में शीर्ष नेताओं की हुई बैठक में इस बात पर सर्वसम्मति बनी है कि जब तक वड़िंग और चन्नी समर्थकों के बीच खींचतान बंद नहीं होगी, तब तक आम आदमी पार्टी और अन्य विरोधी दलों का मुकाबला करना आसान नहीं होगा. ऐसे में संगठन में ऐसे नेतृत्व को प्राथमिकता दी जा रही है जो न केवल दोनों वरिष्ठ नेताओं के प्रभाव को संतुलित रखे, बल्कि कार्यकर्ताओं में भी एकजुटता का संदेश दे सके.
पिछले दिनों पंजाब में 'हर बूथ, कांग्रेस मजबूत' जैसे सांगठनिक कार्यक्रमों के दौरान वड़िंग और चन्नी समर्थकों के बीच तीखी बयानबाजी और नारेबाजी देखने को मिली थी. केंद्रीय नेताओं के दौरों के बाद भी जब गुटबाजी शांत नहीं हुई, तब हाईकमान ने नए सिरे से कमान सौंपने का फैसला लिया. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि हाईकमान का यह नया प्रयोग 2027 के रण से पहले पंजाब कांग्रेस को कितना एकजुट रख पाता है.
कमलजीत संधू / कुबूल अहमद