भारत में गिग इकोनॉमी और 10-15 मिनट में डिलीवरी करने वाले क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे जेप्टो, स्विगी और ब्लिंकिट का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. खुद का व्हीकल और स्मार्टफोन रखने वाला कोई भी इंसान इन प्लेटफॉर्म पर डिलीवरी पार्टनर बनकर अच्छी कमाई कर सकता है.
लेकिन जिन युवाओं के पास अपनी बाइक या स्कूटी नहीं है, उनके मन में यह सवाल रहता है कि क्या बिना पेट्रोल गाड़ी के भी डिलीवरी पार्टनर बना जा सकता है. इसका सीधा जवाब हां है.
बिना अपनी गाड़ी के भी इस फील्ड में काम शुरू किया जा सकता है. साइकिल, ई-साइकिल, कंपनी की ओर से मिलने वाली साइकिल सुविधा और किराए के व्हीकल के जरिए भी काम किया जा सकता है. ऐसे मामलों में कुछ डॉक्यूमेंट्स की जरूरत कम हो जाती है, लेकिन स्मार्टफोन, बेसिक केवाईसी, ऑन-बोर्डिंग फीस और किट जैसे नियम लागू रहते हैं.
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कंपनी के नियमों के मुताबिक, डिलीवरी करने के लिए सिर्फ दो-पहिया मोटर वाहन ही एकमात्र जरिया नहीं है. अगर आपके पास अपनी बाइक या स्कूटी नहीं है, तब भी आप आसानी से डिलीवरी पार्टनर बन सकते हैं.
इसका पहला रास्ता साइकिल या ई-साइकिल का है. आप साधारण साइकिल या इलेक्ट्रिक साइकिल के जरिए भी ऑर्डर डिलीवर करना शुरू कर सकते हैं.
कुछ कंपनियां खुद भी अपने डिलीवरी पार्टनर्स को साइकिल या ई-साइकिल उपलब्ध कराती हैं. जेप्टो जैसी कंपनियों में इस स्थिति में साइकिल के रोजमर्रा के सामान्य मेंटेनेंस का ध्यान राइडर को रखना होता है, जबकि मोटर या गियर की किसी बड़ी या मैकेनिकल खराबी का खर्च कंपनी का होता है.
मेरे पास कोई भी दुपहिया नहीं है, तो क्या करूं?
अगर आप बाइक या ई-बाइक से ही डिलीवरी करना चाहते हैं, लेकिन आपके पास अपनी गाड़ी नहीं है, तो स्विगी और दूसरे प्लेटफॉर्म किराए पर व्हीकल लेने का विकल्प भी देते हैं. स्विगी जैसी कंपनियां पार्टनर्स को ऐसे थर्ड-पार्टी वेंडर्स से भी कनेक्ट करवाती हैं जो किराए पर ई-बाइक या साइकिल उपलब्ध कराते हैं. इसके लिए अपने नजदीकी ऑन-बोर्डिंग सेंटर से संपर्क किया जा सकता है.
बिना बाइक, यानी साइकिल या रेंटल ई-साइकिल से काम शुरू करने पर पेपर्स के नियमों में राहत मिलती है. अगर आप साइकिल से डिलीवरी कर रहे हैं, तो ड्राइविंग लाइसेंस, व्हीकल रजिस्ट्रेशन और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट देने की मजबूरी नहीं होती.
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ऐसे मामले में पहचान के लिए पैन कार्ड, आधार कार्ड या वोटर आईडी, पे-आउट के लिए बैंक अकाउंट डिटेल्स और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन के लिए बेसिक केवाईसी पेपर्स जमा करने होते हैं. इसके साथ एक चालू स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्शन होना अनिवार्य है, ताकि पार्टनर ऐप पर ऑर्डर एक्सेप्ट और ट्रैक किए जा सकें.
चाहे आपके पास अपनी गाड़ी हो या न हो, ऑन-बोर्डिंग के समय कुछ फीस लागू होती हैं. स्विगी पर ऑन-बोर्डिंग फीस लगभग ₹1500 के आसपास होती है, जो अलग-अलग शहरों में भिन्न हो सकती है. जेप्टो में भी ऑन-बोर्डिंग और ट्रेनिंग फीस लागू होती है.
ये पैसे जेब से तुरंत कैश में नहीं देने होते. काम शुरू करने के बाद इन्हें वीकली पे-आउट्स से किस्तों में काट लिया जाता है. इसके साथ डिलीवरी बैग, टी-शर्ट और जैकेट जैसी किट भी दे दी जाती है.
कुल मिलाकर, अगर आपके पास बाइक या ड्राइविंग लाइसेंस नहीं है, तब भी रास्ते बंद नहीं हैं. साइकिल, ई-साइकिल या रेंटल व्हीकल चुनकर 18 साल की उम्र पूरी होते ही डिलीवरी पार्टनर के तौर पर कमाई शुरू की जा सकती है.
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