नोएडा, दिल्ली, मेरठ, बेंगलुरु जैसे मेट्रो शहरों में आजकल बाइक टैक्सी अब जीवन का हिस्सा बन गई हैं. आप मेट्रो से उतरे, बाइक बुक की और घर पहुंच गए. कई लोग ऑफिस के बाद पार्ट टाइम या फुल टाइम भी बाइक टैक्सी चलाते हैं. लेकिन एक सवाल मन में आता है कि क्या हमारी अपनी घर की यानी पर्सनल बाइक, स्कूटी से भी हम बाइक टैक्सी चला सकते हैं? क्या यहां पर किन्हीं डॉक्यूमेंट्स, परमिट की ज़रूरत पड़ती है या नहीं!
देखिए घर की अपनी स्कूटी या मोटरसाइकिल से उबर, रैपिडो, स्विगी, जेप्टो जैसी कंपनियों पर राइडर या कैप्टन बनने के लिए ऑन-बोर्डिंग की तय प्रक्रिया पूरी करनी होती है. इसके साथ कई कानूनी नियम और दस्तावेज़ी शर्तों का पालन भी जरूरी होता है.
इस प्रक्रिया में ऐप पर रजिस्ट्रेशन, दस्तावेज़ अपलोड, वेरिफिकेशन और कुछ मामलों में ट्रेनिंग शामिल है. साथ ही व्यक्तिगत और वाहन से जुड़े कागजात, न्यूनतम आयु, ड्राइविंग अनुभव, चालान की स्थिति और काम के घंटों जैसे नियम भी लागू होते हैं.
चालान से बचना है तो ले लें परमिट
लेकिन यहां पर ही एक पॉइंट परमिट का आता है. भारत में क्यूंकि लॉ एंड ऑर्डर और ट्रैफिक से जुड़े कई परमिट की ताकत राज्य सरकार के हाथ में होती है. ऐसे में बाइक टैक्सी या कार टैक्सी को लेकर हर राज्य में अलग-अलग नियम होते हैं. जैसे आपने सुना होगा कि कभी दिल्ली में बाइक टैक्सी बैन हो जाती है या कभी बेंगलुरु में हो जाती है.
ऐसे में बेहतर है कि आप अगर अपनी पर्सनल टू-व्हीलर को बाइक टैक्सी के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं, तो ज़रूरी परमिट हमेशा बनवाएं. https://vahan.parivahan.gov.in पर जाकर आप अपना परमिट बनवा सकते हैं, इनके अलावा राज्यों की RTO साइट्स पर भी इनकी सुविधा मिलती है. परमिट बनवाकर ही बाइक टैक्सी चलाएंगे तो किसी भी तरह के चालान, जुर्माने से बचेंगे.
कंपनियों ने साफ किया है नियम
जेप्टो, उबर या रैपिडो जैसी कंपनियों के नियम और शर्तों में भी इन बातों का ज़िक्र है कि जरूरी दस्तावेजों में व्यक्तिगत और वाहन, दोनों तरह के कागजात शामिल हैं. व्यक्तिगत दस्तावेजों में ड्राइविंग लाइसेंस, प्राइवेट या कमर्शियल, पैन कार्ड, आधार कार्ड या निवास प्रमाण, और कमाई के भुगतान के लिए बैंक खाता विवरण देना होता है.
इसके अलावा वाहन के दस्तावेजों में आरसी, वैध इंश्योरेंस सर्टिफिकेट, पीयूसी सर्टिफिकेट, और एमवी एक्ट के तहत फिटनेस सर्टिफिकेट व लागू परमिट या लाइसेंस शामिल हैं. इसके अलावा उम्र, टाइमिंग, पेमेंट, जुर्माने, ट्रेनिंग या जॉइनिंग फीस को लेकर अलग-अलग नियम भी होते हैं, जिनका ज़िक्र हमने पुरानी कहानियों में किया है.
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