स्टूडेंट, अंधभक्त, इड‍ियट... कुछ यूं राहुल गांधी ने एजुकेशन-एग्जाम स‍िस्टम पर रखीं ये 5 बातें, संसद में मचा हंगामा!

राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत एक छात्रा से हुई बातचीत का हवाला देकर की. उन्होंने कहा कि जब उन्होंने उस छात्रा से पूछा कि सच्चा 'स्टूडेंट' कौन होता है, तो उसने बहुत ही सटीक जवाब दिया. उसने कहा कि सच्चा स्टूडेंट वह होता है जिसका दिमाग और दिल हमेशा नया सीखने के लिए खुला रहता है. उसमें यह स्वीकार करने की विनम्रता होती है कि उसे सब कुछ नहीं पता और वह हर किसी के ज्ञान का सम्मान करता है.

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Rahul Gandhi speaks in Lok Sabha Rahul Gandhi speaks in Lok Sabha

आजतक एजुकेशन डेस्क

  • नई दिल्ली,
  • 29 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 2:18 PM IST

संसद के मॉनसून सत्र के दौरान 29 जुलाई 2026 को लोकसभा का माहौल उस वक्त बेहद गरमा गया, जब 'पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल 2026' पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी बोलने खड़े हुए. देश की चरमराती शिक्षा व्यवस्था और लगातार हो रहे पेपर लीक के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरते हुए राहुल गांधी ने ऐसे तीखे तंज कसे कि पूरे सदन में हंगामा खड़ा हो गया. अपने भाषण के दौरान उन्होंने शिक्षा के बढ़ते वित्तीय बोझ, एग्जाम सिस्टम में जारी धांधली और संस्थागत कमियों पर 5 बेहद तीखे सवाल और मुद्दे सामने रखे.

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आइए जानते हैं कि संसद में राहुल गांधी ने एजुकेशन और एग्जाम सिस्टम को लेकर कौन सी 5 मुख्य बातें रखीं:

1. देश में तीन तरह के लोग: 'स्टूडेंट, इडियट और अंधभक्त'
राहुल गांधी ने अपने भाषण की शुरुआत एक छात्रा से हुई बातचीत का हवाला देकर की. उन्होंने कहा कि जब उन्होंने उस छात्रा से पूछा कि सच्चा 'स्टूडेंट' कौन होता है, तो उसने बहुत ही सटीक जवाब दिया. उसने कहा कि सच्चा स्टूडेंट वह होता है जिसका दिमाग और दिल हमेशा नया सीखने के लिए खुला रहता है. उसमें यह स्वीकार करने की विनम्रता होती है कि उसे सब कुछ नहीं पता और वह हर किसी के ज्ञान का सम्मान करता है.

राहुल गांधी ने कहा कि दूसरी कैटेगरी उन लोगों की है जो मानते हैं कि उन्हें दुनिया का सारा ज्ञान है, वे घमंडी होते हैं और किसी की नहीं सुनते. छात्र ऐसे ही सोच वाले लोगों को 'इडियट' कहते हैं. फिर तीसरी कैटेगरी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 'अंधभक्त' वे लोग हैं जो बिना सोचे-समझे व्यवस्था की कमियों पर पर्दा डालते हैं और देश की शिक्षा व्यवस्था की जड़ों को अंदर ही अंदर खोखला कर रहे हैं. इस शब्दावली पर सत्ता पक्ष ने तुरंत हंगामा शुरू कर दिया.

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2. शिक्षा की भारी लागत 
राहुल गांधी ने शिक्षा और परीक्षाओं पर होने वाले भारी-भरकम वित्तीय बोझ का मुद्दा जोर-शोर से उठाया. उन्होंने कहा कि आज देश में पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी इतनी महंगी हो चुकी है कि गरीब और मध्यमवर्गीय माता-पिता अपनी पूरी जिंदगी की जमापूंजी, जमीन या गहने गिरवी रखकर बच्चों की कोचिंग और फॉर्म की फीस भरते हैं. सरकार भी एक-एक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा (जैसे NEET या CUET) आयोजित कराने में करदाताओं के करोड़ों-अरबों रुपये खर्च करती है.

जब इतने भारी आर्थिक खर्च और सरकारी बजट के बावजूद ऐन मौके पर पेपर लीक हो जाता है, तो न केवल देश का पैसा पानी में बह जाता है बल्कि उन लाखों परिवारों की वित्तीय कमर भी टूट जाती है.

3. '150 से ज्यादा पेपर लीक और जीरो सजा', लीक प्रूफ क्यों नहीं है सिस्टम?
एग्जाम सिस्टम की सबसे बड़ी नाकामी पर सवाल उठाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि पिछले कुछ सालों में देश में 150 से अधिक राष्ट्रीय व राज्य स्तरीय परीक्षाओं के पेपर लीक हो चुके हैं. इससे करीब 7.5 करोड़ छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है. उन्होंने सीधा सवाल पूछा कि जब हर बड़ी परीक्षा का पेपर बाजार में बिक रहा है, तो सरकार का एग्जाम मैकेनिज्म पूरी तरह फेल क्यों साबित हो रहा है? इतने बड़े पैमाने पर धांधली के बावजूद अब तक कितने मुख्य सरगनाओं को कड़ी सजा मिली है?

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4. संस्थानों में राजनीतिक दखल और कुलपतियों की नियुक्ति पर सवाल
राहुल गांधी ने उच्च शिक्षा संस्थानों की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा किया. उन्होंने कहा कि देश के प्रमुख विश्वविद्यालयों, कुलपतियों (VCs) और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों (जैसे NTA) के शीर्ष पदों पर योग्यता के बजाय खास विचारधारा से जुड़े लोगों को बैठाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि जब तक संस्थानों में राजनीतिक निष्पक्षता (Political Neutrality) नहीं होगी और मेरिट के आधार पर नियुक्तियां नहीं होंगी, तब तक परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा वापस कायम नहीं किया जा सकता.

5. मॉडर्न टेक्नोलॉजी और SAT/GMAT की तर्ज पर क्यों नहीं होते एग्जाम?
एग्जाम सिस्टम में सुधार का खाका रखते हुए राहुल गांधी ने पूछा कि भारत जैसी बड़ी अर्थव्यवस्था में हम अब तक पारदर्शी और आधुनिक परीक्षा तकनीक क्यों लागू नहीं कर पाए हैं? उन्होंने सुझाव दिया कि दुनिया की प्रमुख परीक्षाओं जैसे GMAT या SAT की तर्ज पर भारत में भी 'रैंडमाइज्ड क्वेश्चन पेपर्स' (हर छात्र के लिए स्क्रीन पर अलग और रैंडम प्रश्न) और सुरक्षित डिजिटल मूल्यांकन तकनीक अपनाई जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि जब तक तकनीक का सही इस्तेमाल नहीं होगा, तब तक पेपर लीक माफिया को रोकना नामुमकिन है.

संसद में क्यों हुआ हंगामा?
राहुल गांधी द्वारा 'इडियट' और 'अंधभक्त' जैसे शब्दों का इस्तेमाल किए जाने पर केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू तुरंत अपनी सीट पर खड़े हो गए. उन्होंने इन शब्दों को अमर्यादित और असंसदीय बताते हुए कड़ा ऐतराज जताया और स्पीकर से इन्हें संसद के रिकॉर्ड से हटाने की मांग की. वहीं राहुल गांधी ने पलटवार करते हुए कहा कि जब भी शिक्षा व्यवस्था के बुनियादी सच और छात्रों के हक की बात उठाई जाती है, तो सरकार हंगामा करके मुख्य मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश करती है.

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