मेहनत पर भारी न पड़े पेपर लीक, संसदीय समिति ने की NEET को ऑनलाइन कराने समेत कई बदलावों की सिफारिश

मई में हुए नीट परीक्षा में पेपर लीक को लेकर अब बदलाव से जुड़ी खबरें आने लगी हैं. इसे लेकर अब संसदीय समिति ने नीट परीक्षा को CBT मोड में करवाने और 1,000 सरकारी परीक्षा केंद्र बनाने की सिफारिश की है.   

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संसदीय समिति ने NEET में बदलाव के दिए कई सुझाव. संसदीय समिति ने NEET में बदलाव के दिए कई सुझाव.

अनमोल नाथ

  • नई दिल्ली,
  • 11 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:47 AM IST

NEET की तैयारी करने वाले लाखों छात्र हर साल इस उम्मीद के साथ परीक्षा देते हैं कि उनकी मेहनत के आधार पर मेडिकल कॉलेज में दाखिला मिलेगा. लेकिन जब परीक्षा के पेपर लीक होने या गड़बड़ियों की खबरें सामने आती हैं, तो छात्रों की मेहनत और परीक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता दोनों पर सवाल खड़े हो जाते हैं. NEET-UG को लेकर पिछले कुछ सालों में हुए विवादों के बाद अब परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की सिफारिश की गई है.

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राज्यसभा सांसद मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने NEET-UG को पेन-पेपर मोड से कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) में करवाने को लेकर सिफारिश की है. समिति ने इसके लिए देशभर में कम से कम 1,000 सुरक्षित सरकारी परीक्षा केंद्र बनाने और हर जिले में कम से कम एक केंद्र उपलब्ध कराने का भी सुझाव दिया है. समिति की 382वीं रिपोर्ट 9 अक्टूबर 2026 को पेश की गई थी.

NEET पेपर लीक में विवाद के बाद बदलाव? 

बता दें कि NEET-UG को लेकर विवाद साल 2024 में भी काफी चर्चा में रहा था. उस साल परीक्षा के पेपर लीक और अनियमितताओं के आरोप सामने आए. परीक्षा के परिणाम, ग्रेस मार्क्स और कुछ केंद्रों पर असामान्य रूप से अधिक नंबर मिलने को लेकर भी कई तरह के सवाल उठे. मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने कथित अनियमितताओं की जांच की. इसके बाद परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की गई और परीक्षा की सुरक्षा मजबूत करने पर जोर दिया गया. हालांकि, विवाद यहीं खत्म नहीं हुआ. इसके बाद एक बार फिर से मई 2026 में NEET-UG पेपर लीक का मामला फिर सामने आया.

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शिक्षा मंत्रालय की शिकायत के आधार पर CBI ने 12 मई 2026 को कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर एफआईआर दर्ज की. CBI की शुरुआती जांच से जुड़ी सरकारी जानकारी के मुताबिक, परीक्षा से पहले गैस पेपर लीक से जुड़ी खबरों ने तूल पकड़ा था. जांच में सामने में आया कि पेपर लीक हो गया है. NEET-UG 2026 की परीक्षा रद्द होने के बाद संसदीय समिति ने भी माना कि बायोमेट्रिक जांच, मोबाइल जैमर और AI आधारित CCTV निगरानी जैसे उपायों के बावजूद परीक्षा की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रक्रियागत और संस्थागत सुधारों की जरूरत है. 

अब कंप्यूटर पर हो सकती है NEET परीक्षा

इसे लेकर अब संसदीय समिति ने भी CBT मोड को लेकर बड़ी सिफारिश की है. समिति का मानना है कि कंप्यूटर आधारित परीक्षा से प्रश्नपत्रों की छपाई और उन्हें परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की जरूरत कम हो सकती है. इससे पेपर लीक होने की आशंका घटाने में मदद मिल सकती है. हालांकि, समिति ने यह भी कहा है कि ऑनलाइन परीक्षा शुरू करने से पहले पर्याप्त सरकारी केंद्र और तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है. खासकर ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों के छात्रों को ध्यान में रखते हुए कंप्यूटर आधारित परीक्षा की सुविधा बढ़ाने की सिफारिश की गई है. 

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समिति ने छात्रों को ऑनलाइन परीक्षा के प्रारूप से परिचित कराने के लिए डिजिटल मॉक टेस्ट की सुविधा देने जैसी बातें भी सामने रखी हैं. जिन इलाकों में फिलहाल पर्याप्त कंप्यूटर या इंटरनेट की सुविधा नहीं है, वहां अंतरिम व्यवस्था के तौर पर एन्क्रिप्टेड प्रश्नपत्र सीधे केंद्र पर भेजकर प्रिंट करने का विकल्प भी सुझाया गया है. 

दो चरणों में हो सकती है परीक्षा
 
किस फॉर्मेट में परीक्षा होगी समिति ने केवल इसकी जानकारी नहीं दी है बल्कि कितने शिफ्टों में परीक्षा का आयोजन होगा इसे लेकर भी राय दी है. समिति ने NEET-UG को दो चरणों में आयोजित करने की संभावना पर विचार करने का सुझाव भी दिया है. इसके तहत पहले एक साझा प्रारंभिक परीक्षा और फिर अलग-अलग पाठ्यक्रमों के लिए विशेष मुख्य परीक्षा आयोजित करने का विकल्प तलाशा जा सकता है.

इस प्रस्ताव का उद्देश्य MBBS में एडमिशन लेने वाले उम्मीदवारों और AYUSH, डेंटल तथा नर्सिंग जैसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले उम्मीदवारों की जरूरतों को अलग-अलग तरीके से समझना है. समिति का यह भी मानना है कि इससे अनावश्यक प्रतिस्पर्धा और छात्रों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है. इसके साथ ही समिति ने परीक्षा में क्वालिफाई करने वाले उम्मीदवारों की संख्या और उपलब्ध सीटों के बीच बेहतर तालमेल बनाने के लिए कटऑफ और क्वालिफाइंग पर्सेंटाइल की समीक्षा करने की भी सिफारिश की है. 

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पेपर लीक रोकने के लिए बनेगा सवालों का बड़ा बैंक

समिति ने सुझाव दिया है कि NTA को अलग-अलग विषयों के प्रश्नों का एक बड़ा और लगातार अपडेट होने वाला डिजिटल बैंक तैयार करना चाहिए. इसमें IIT, AIIMS और IIM जैसे प्रमुख संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद लेने की सिफारिश की गई है. प्रश्नपत्र परीक्षा के समय के करीब तैयार करने और विशेषज्ञों की पृष्ठभूमि तथा संभावित हितों के टकराव की जांच करने पर भी जोर दिया गया है. समिति ने परीक्षा से जुड़ी सेवाएं देने वाली उन कंपनियों की सार्वजनिक राष्ट्रीय सूची बनाने की सिफारिश की है, जिन्हें किसी राज्य या परीक्षा एजेंसी ने ब्लैकलिस्ट किया हो. इसका मकसद ऐसी कंपनियों को दूसरी जगह दोबारा ठेका मिलने से रोकना है. 

NTA में कर्मचारियों की कमी पर भी सवाल

रिपोर्ट में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी में कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी उठाया गया है. समिति के मुताबिक, NTA में स्वीकृत 39 पदों में से केवल 23 पदों पर ही अधिकारी तैनात थे. इसका मतलब साफ है कि करीब 41 प्रतिशत पद खाली पड़े थे. समिति ने मनोमिति, साइबर सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, आंकड़ों के विश्लेषण और परीक्षा मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले स्थायी कर्मचारियों की भर्ती करने की सिफारिश की है. साथ ही, NTA को उच्च शिक्षा में दाखिले से जुड़ी परीक्षाओं पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित करने का सुझाव दिया गया है. 

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छात्रों के लिए भी कई सुझाव

इस दौरान समिति ने परीक्षा के दौरान छात्रों को होने वाली परेशानी का भी जिक्र किया.  इसके लिए भी समिति की ओर से सुझाव दिए गए हैं. इनमें परीक्षा के बीच में जांच और साइन जैसी औपचारिकताएं कराने के बजाय उनके लिए परीक्षा से पहले या बाद में 15 मिनट का अलग समय रखने का प्रस्ताव शामिल है. समिति ने कुछ मिनट देर से पहुंचने वाले उम्मीदवारों को लिखित सहमति के बाद परीक्षा में प्रवेश देने की व्यवस्था पर विचार करने को कहा है. हालांकि, ऐसे उम्मीदवारों को अतिरिक्त समय नहीं देने का सुझाव भी दिया गया है. 

इसके अलावा, प्रशासनिक कारणों से परीक्षा रद्द होने पर प्रभावित उम्मीदवारों को मुआवजा देने, दिव्यांग छात्रों के लिए सुलभ परीक्षा केंद्र और लेखक की सुविधा उपलब्ध कराने तथा परीक्षा से जुड़े मामलों में शिकायतों के समाधान की व्यवस्था मजबूत करने की सिफारिश की गई है. 

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