14वीं JPSC (पीटी) परीक्षा में प्रश्नपत्र के लिफाफे खुले मिलने और OMR शीट गायब होने के आरोपों से शुरू हुआ बवाल अब झारखंड के इतिहास का सबसे बड़ा 'भर्ती आंदोलन' बन चुका है. लेकिन जिस तरह छात्र परीक्षाओं में शुचिता से ज्यादा जांच एजेंसी के चयन की मांग कर रहे हैं, उससे एक सवाल ये भी उठता है कि क्या ये आंदोलन सरकार की जांच एजेंसी की शुचिता पर भी सवाल उठा रहा है. आइए समझते हैं...
रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे अनशन का असर यह है कि सरकार को 4 मंत्रियों (दीपिका पांडे सिंह, चमरा लिंडा, सुदिव्य कुमार सोनू, संजय प्रसाद) और सीनियर आईएएस अजय कुमार की हाई-लेवल कमेटी बनानी पड़ी. राज्य सरकार लगातार सीआईडी जांच करा रही है, लेकिन छात्र सिर्फ एक परीक्षा रद्द कराने नहीं, बल्कि 2019 से 2026 के बीच आयोजित JPSC और JSSC की सभी 7 विवादित भर्ती परीक्षाओं की CBI जांच की मांग पर अड़े हैं.
2019 से 2026: हर साल एक नई धांधली, टूटा भरोसा?
छात्रों का आरोप है कि राज्य की एजेंसियों (CID) द्वारा 19 से अधिक गिरफ्तारियां करना खुद इस बात की मुहर है कि ओएमआर शीट बाहर आई थी और बैकडोर से 'सेटिंग' की गई थी. लेकिन सिर्फ छोटी मछलियों को पकड़कर बड़े 'मगरमच्छों' को बचा लिया जाता है. यही वजह है कि छात्र अब केंद्रीय जांच एजेंसी यानी सीबीआई की जांच चाहते हैं.
वर्ष 2019 से अब तक JPSC और JSSC की परीक्षाओं का दागदार इतिहास
2019-20 (JPSC रिजल्ट विवाद): कट-ऑफ और विवादास्पद मेरिट सूची के खिलाफ छात्र हाईकोर्ट पहुंचे.
2021 (JPSC संयुक्त सिविल सेवा): मॉडल उत्तर कुंजी (Answer Key) में गड़बड़ी और असार्वजनिक चयन प्रक्रिया पर बवाल.
2022 (JSSC विभिन्न पद): कट-ऑफ और संदिग्ध मूल्यांकन प्रणाली को लेकर राज्यव्यापी विरोध.
2023 (JSSC CGL पेपर लीक): परीक्षा से ठीक पहले प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर लीक होने का दावा; कोर्ट तक गूंज.
2024 (JGGLCCE-JSSC CGL): फर्जी अभ्यर्थी (Dummy Candidates) बैठाने और संगठित नकल गिरोह का पर्दाफाश.
2025 (JSSC अन्य भर्तियां): रिजल्ट में पारदर्शिता की कमी और चहेतों को उपकृत करने के आरोप.
2026 (14वीं JPSC PT परीक्षा): धांधली के विरोध में राज्यव्यापी छात्रों का सबसे बड़ा आमरण अनशन और CID जांच की शुरुआत.
CBI जांच की मांग क्यों? CID की कार्रवाई पर उठते सवाल
राज्य सरकार का दावा है कि CID की जांच तेजी से चल रही है और अब तक 19 से ज्यादा गिरफ्तारियां (जिनमें परीक्षा सेंटरों के संचालक, बिचौलिए और संदिग्ध शामिल हैं) हो चुकी हैं. इसके बावजूद छात्रों का कहना है कि राज्य की जांच एजेंसियां केवल निचले स्तर के 'रैकेटियर' को पकड़कर केस फाइल बंद कर देती हैं. पेपर लीक और बैकडोर एंट्री का नेटवर्क बिहार, यूपी और दिल्ली तक फैला है, जिसकी जांच केवल केंद्रीय एजेंसी (CBI) ही कर सकती है.
'अभय तिवारी' मॉडल पर भी उठे सवाल
आंदोलन में बार-बार उठ रहा नाम 'अभय तिवारी' दरअसल उस सिंडिकेट का प्रतीक बन चुका है, जिसके तहत बिना परीक्षा दिए या OMR शीट खाली छोड़कर भी लोग मेरिट लिस्ट में टॉप कर जाते हैं. अब छात्र ऐसे हर सिंंडिकेट के खिलाफ कार्रवाई पर अड़ गए हैं. यही वजह है कि 13वें दिन भी मूसलाधार बारिश में सभी बच्चे आंदोलन में टिके हुए हैं.
छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकार की 4 मंत्रियों वाली कमेटी अगर बातचीत करना चाहती है, तो उन्हें स्टेडियम के इसी खुले मंच पर आना होगा. बंद कमरों की गुप्त बैठकों पर छात्रों का भरोसा पूरी तरह उठ चुका है.
आजतक एजुकेशन डेस्क