दिल्ली-एनसीआर में जब भी सांस लेना दूभर होने लगता है, तो सबसे पहले हमारी नजरें जिस एक चीज पर टिकती हैं, वह है-AQI (एयर क्वालिटी इंडेक्स). अखबारों की सुर्खियों से लेकर टीवी डिबेट तक, हर तरफ बस इसी बात की चर्चा होती है कि आज दिल्ली का एक्यूआई 300 पार कर गया या 400 के आंकड़े को छू रहा है.
सरकार प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए ग्रैप (GRAP) के कड़े चरण भी लागू करती है, लेकिन सवाल यह है कि आखिर यह एक्यूआई काम कैसे करता है? हमें कैसे पता चलता है कि हम जो हवा अपने फेफड़ों के भीतर खींच रहे हैं, वह जीवन दे रही है या मौत का सामान बन रही है? आइए, आज इसे बहुत सरल और वैज्ञानिक तरीके से समझते हैं.
क्या है एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI)?
नाम से ही साफ है कि यह एक ऐसा 'इंडेक्स' या पैमाना है जो एयर क्वालिटी की पूरी कुंडली हमारे सामने रख देता है. इसके जरिए यह पता चलता है कि हमारे आसपास की हवा में कौन-कौन सी गैसें और कितनी मात्रा में घुली हुई हैं. आम लोगों की समझ के लिए इस इंडेक्स को 6 प्रमुख श्रेणियों (कैटेगरीज) में बांटा गया है.
अच्छी (Good)
संतोषजनक (Satisfactory)
थोड़ा प्रदूषित (Moderately Polluted)
खराब (Poor)
बहुत खराब (Very Poor)
गंभीर (Severe / Hazardous)
किन 8 खतरनाक तत्वों से मिलकर बनता है AQI?
हवा सिर्फ ऑक्सीजन या कार्बन डाइऑक्साइड का मिश्रण नहीं है, बल्कि जब इसमें प्रदूषण घुलता है, तो एक्यूआई मुख्य रूप से 8 प्रमुख प्रदूषकों के आधार पर मापा जाता है:
PM10 और PM2.5 (धूल और सूक्ष्म कण)
NO2 (नाइट्रोजन डाइऑक्साइड)
SO2 (सल्फर डाइऑक्साइड)
CO (कार्बन मोनोऑक्साइड)
O3 (जमीनी स्तर की ओजोन)
NH3 (अमोनिया)
Pb (सीसा/लेड)
जब हवा में सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा तय किए गए सुरक्षित मानकों से ऊपर निकल जाती है, तो हवा जहरीली होने लगती है.
दिल्ली में क्यों भयानक हो जाती है स्थिति?
दिल्ली-एनसीआर की आबोहवा को बिगाड़ने में सबसे बड़ा हाथ PM 2.5 और PM 10 जैसे सूक्ष्म कणों का होता है. ये कण इतने छोटे होते हैं कि सांस के जरिए सीधे हमारे खून में उतर जाते हैं. कुछ रिपोर्ट्स तो यहां तक दावा करती हैं कि गंभीर प्रदूषण के दिनों में दिल्ली में सांस लेना रोजाना 21 सिगरेट पीने के बराबर खतरनाक धुआं शरीर के भीतर उतारने जैसा है!
ये कारण माने जाते हैं प्रदूषण के मुख्य खलनायक
हवा के बहाव (Wind Speed) में भारी कमी आना.
दीवाली के मौके पर बड़े पैमाने पर पटाखे छूटना.
पंजाब और हरियाणा के कुछ इलाकों में पराली जलाया जाना.
सड़कों पर दौड़ती गाड़ियों का बेहिसाब धुआं और अंधाधुंध पेड़ों की कटाई.
ग्लोबल वार्मिंग के चलते मौसम में आ रहे नकारात्मक बदलाव.
क्या है 'GRAP' (ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान)?
जब प्रदूषण का स्तर खतरनाक सीमा पार करने लगता है, तब हवा की गुणवत्ता को सुधारने और उसे और अधिक बिगड़ने से रोकने के लिए GRAP लागू किया जाता है. इसे 'पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण' (EPCA) द्वारा तैयार किया गया था.
इस एक्शन प्लान के तहत सर्दियों के मौसम में प्रदूषण की स्थिति को देखते हुए पाबंदियां तय की जाती हैं जैसे ट्रकों की एंट्री पर बैन, निर्माण कार्यों पर रोक, सड़कों पर पानी का छिड़काव, एंटी-स्मॉग गनों का इस्तेमाल और सार्वजनिक परिवहन (जैसे मेट्रो के अतिरिक्त फेरे) को बढ़ावा देना.
AQI सिर्फ एक नंबर या डेटा नहीं है, यह इस बात का चेतावनी भरा सिग्नल है कि हमारे फेफड़े किस दौर से गुजर रहे हैं. जब तक हम व्यक्तिगत और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर इसके कारणों को कम करने की गंभीर कोशिश नहीं करेंगे, तब तक हर साल सर्दियों में हमारा आसमान इसी तरह धुंध और जहर के साये में कैद रहेगा.
आजतक एजुकेशन डेस्क