हवाई यात्रा में सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ खास कोड तय किए गए हैं. इन्हें स्क्वॉक कोड कहा जाता है. पायलट अपने ट्रांसपॉन्डर यानी विमान के सिग्नल भेजने वाले उपकरण पर ये कोड सेट करते हैं. इससे एयर ट्रैफिक कंट्रोल और अन्य विमान तुरंत समझ जाते हैं कि कोई आपात स्थिति है.
दुबई से तेल अवीव जा रहे एक फ्लाईदुबई विमान ने ऐसे ही कोड भेजे. पहले 7700 और फिर 7500. इससे हाईजैकिंग की आशंका फैल गई. इजरायली वायुसेना के लड़ाकू विमान तुरंत उतारे गए और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्यूाह और रक्षा मंत्री ने आपात बैठकें कीं. विमान सऊदी अरब के ऊपर मुड़ गया और वहां उतरने की उम्मीद जताई गई.
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स्क्वॉक कोड क्या होते हैं और क्यों जरूरी हैं?
स्क्वॉक कोड चार अंकों वाले खास नंबर होते हैं जो विमान का ट्रांसपॉन्डर रेडार सिस्टम पर भेजता है. सामान्य उड़ान में विमान को एक कोड दिया जाता है. लेकिन आपात स्थिति में पायलट तीन मुख्य इमरजेंसी कोड में से कोई एक सेट कर सकते हैं. ये कोड पूरी दुनिया में एक जैसे हैं ताकि किसी भी देश का एयर ट्रैफिक कंट्रोल तुरंत प्रतिक्रिया दे सके. 7700 कोड सामान्य आपात स्थिति के लिए होता है.
जैसे इंजन खराब होना, मेडिकल इमरजेंसी, आग लगना या कोई तकनीकी खराबी. इस कोड से कंट्रोलर समझ जाते हैं कि विमान को प्राथमिकता देनी है और लैंडिंग के लिए रास्ता साफ करना है. 7600 कोड रेडियो खराब होने पर इस्तेमाल होता है. जब पायलट जमीन से बात नहीं कर पा रहे हों.
सबसे गंभीर कोड 7500 है. इसका मतलब है हाईजैकिंग या विमान में अवैध दखल. यानी कोई व्यक्ति या समूह जबरन कंट्रोल लेने की कोशिश कर रहा है. 7500 कोड भेजते ही सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर चली जाती हैं.
दुबई-तेल अवीव फ्लाइट में क्या हुआ
फ्लाईदुबई का विमान दुबई से तेल अवीव जा रहा था. उड़ान ट्रैकिंग डेटा के अनुसार पहले उसने 7700 कोड भेजा, जो सामान्य इमरजेंसी का संकेत है. थोड़ी देर बाद 7500 कोड सेट कर दिया गया. यह बदलाव चिंता का विषय बना क्योंकि 7500 सीधे हाईजैकिंग की ओर इशारा करता है.
विमान सऊदी अरब के ऊपर मुड़ गया और वहां उतरने की संभावना जताई गई. इजरायली सुरक्षा सूत्रों के अनुसार वायुसेना के फाइटर जेट्स को विमान की ओर भेजा गया. हिब्रू मीडिया ने बताया कि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री आपात परामर्श कर रहे हैं.
क्षेत्र में पहले से तनाव होने के कारण यह घटना और संवेदनशील हो गई. अमेरिका के इराक से सैनिकों की वापसी और ईरान के समूहों की सक्रियता की पृष्ठभूमि में ऐसी घटनाएं अतिरिक्त चिंता पैदा करती हैं.
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7500 कोड की गंभीरता
जब कोई विमान 7500 कोड भेजता है तो एयर ट्रैफिक कंट्रोल तुरंत सुरक्षा एजेंसियों को सूचना देता है. पास के देशों की वायुसेना को अलर्ट किया जाता है. विमान को सुरक्षित जगह पर उतारने की कोशिश की जाती है जहां सुरक्षा बल तैयार हों. पायलट अगर संभव हो तो कोड के साथ और जानकारी भी भेज सकते हैं, लेकिन कई बार दबाव में सिर्फ कोड ही सेट किया जाता है.
इस मामले में विमान का सऊदी अरब की ओर मुड़ना सुरक्षा दृष्टि से समझदारी भरा कदम हो सकता है क्योंकि वहां लैंडिंग और सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध है. इजरायली विमानों का उड़ना क्षेत्रीय सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत सामान्य प्रतिक्रिया है.
ऐसे मामलों में जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाता. कभी-कभी तकनीकी गलती या गलत कोड सेट होने की भी संभावना रहती है, लेकिन 7500 को हमेशा गंभीरता से लिया जाता है.
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क्षेत्रीय तनाव और व्यापक प्रभाव
मध्य पूर्व में विमानन सुरक्षा पहले से संवेदनशील मुद्दा है. तेल अवीव जैसे गंतव्य पर उड़ानें विशेष निगरानी में रहती हैं. इस घटना ने एक बार फिर याद दिलाया कि हवाई यात्रा में आपात स्थितियां कितनी तेजी से उभर सकती हैं. स्क्वॉक कोड की व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि बिना देरी के मदद पहुंच सके.
यात्रियों की सुरक्षा सबसे ऊपर है. घटना की पूरी जांच के बाद ही असल वजह सामने आएगी कि वाकई हाईजैक की कोशिश हुई या कोई अन्य इमरजेंसी थी. फिलहाल विमान की सुरक्षित लैंडिंग और यात्रियों की कुशलता ही मुख्य प्राथमिकता है. ये कोड विमानन सुरक्षा की मजबूत कड़ी हैं जो दुनिया भर में एक जैसी भाषा बोलते हैं.
ऋचीक मिश्रा