तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर, 10 हजार सैनिक मिडिल ईस्ट भेज रहे ट्रंप, क्या ईरान पर हमले का है प्लान?

अमेरिका ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच मध्य पूर्व में तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर 'USS थियोडोर रूजवेल्ट' और 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजे हैं, जिससे क्षेत्र में 50,000 से अधिक अमेरिकी सैनिकों की तैनाती के साथ युद्ध का खतरा मंडरा रहा है.

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ये है अमेरिका एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट. (Photo: X) ये है अमेरिका एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट. (Photo: X)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 02 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 11:57 AM IST

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी गतिरोध शांत होने के बजाय एक नए और अत्यधिक विस्फोटक स्टेज में पहुंच गया है. पेंटागन ने मध्य पूर्व में अपने सैन्य बल को अत्यधिक मजबूत करते हुए एक तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप तैनात करने का निर्णय लिया है. 

सैन डिएगो से रवाना हुआ नौसेना का विमानवाहक पोत 'यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट' (USS Theodore Roosevelt) अपने स्ट्राइक ग्रुप के साथ मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है. इसके साथ ही मरीन सैनिकों से लैस 'यूएसएस मेकिन आइलैंड' (USS Makin Island) एम्फीबियस रेडी ग्रुप भी क्षेत्र में भेजा जा रहा है, जिससे इलाके में लगभग 9,000 से 10,000 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों और नौसैनिकों की तैनाती होने जा रही है.

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पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्र में यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश (USS George H.W. Bush) और यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन (USS George Washington) पहले से ही मोर्चा संभाले हुए हैं. यदि यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन क्षेत्र में बना रहता है, तो अक्टूबर के अंत तक रूजवेल्ट के पहुंचने पर एक ही समय में तीन-तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप्स की उपस्थिति दर्ज की जाएगी. 

अप्रैल 2026 के बाद यह पहला अवसर होगा जब अमेरिका ने एक साथ तीन परमाणु-संचालित युद्धपोत बेड़ों को इस संवेदनशील क्षेत्र में उतारा है. हालिया रिपोर्टों के अनुसार, मध्य पूर्व में अमेरिका के 50,000 से अधिक सैनिक और लगभग 20 अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत पहले से तैनात हैं, जो किसी भी बड़े सैन्य टकराव के लिए अमेरिका की पूर्ण युद्ध तत्परता को दर्शाते हैं.

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चौतरफा दबाव बनाने का प्रयास

अमेरिका की इस भारी सैन्य वृद्धि को ईरान पर चौतरफा दबाव बनाने और क्षेत्रीय सहयोगियों को सुरक्षा का भरोसा देने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है. फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजरानी की सुरक्षा के साथ-साथ ईरान समर्थित गुटों के किसी भी हमले को विफल करना इसका मुख्य लक्ष्य है. 

विश्लेषकों का मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर युद्धपोतों, उन्नत लड़ाकू विमानों और नौसैनिक मरीन बलों का जमावड़ा केवल सुरक्षात्मक कदम नहीं है, बल्कि यह ईरान के खिलाफ संभावित बड़े सैन्य अभियानों की पूर्व-तैयारी का संकेत भी देता है.

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दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिकी सैन्य जमावड़े के जवाब में अपने मिसाइल रक्षा प्रणालियों और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) को हाई-अलर्ट पर रख दिया है. तेहरान की ओर से चेतावनी दी गई है कि किसी भी अमेरिकी उकसावे या संप्रभुता के उल्लंघन का कड़ा और सीधा जवाब दिया जाएगा. 

इस कूटनीतिक और सैन्य खींचतान के कारण अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है और फारस की खाड़ी के माध्यम से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं. तनाव का यह नया चरण वैश्विक शांति के लिए बेहद संवेदनशील साबित हो रहा है. 

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पेंटागन द्वारा अतिरिक्त 10,000 सैनिकों की तैनाती और नौसेना की इस आक्रामक गोलबंदी ने कूटनीतिक वार्ताओं की गुंजाइश को लगभग समाप्त कर दिया है. यदि किसी भी पक्ष से छोटी सी भी रणनीतिक चूक होती है, तो यह तनाव एक भीषण क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है, जिसके गंभीर दुष्परिणाम न केवल मध्य पूर्व बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था को भुगतने पड़ सकते हैं.

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