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पूड़ी-सब्जी और मिठाई... मेरठ में पालतू कुत्ते 'टफ्फू' की तेरहवीं; मालिक के घर तीन दिन तक नहीं बना था खाना

मेरठ में 12 साल तक परिवार का हिस्सा रहे पालतू कुत्ते 'टफ्फू' की मौत के बाद सुनील यादव के परिवार ने उसकी इंसानों की तरह तेरहवीं की. बेटी वर्षा उसे भाई मानती थी. सदमे में तीन दिन चूल्हा नहीं जला. परिवार ने हवन कराकर रिश्तेदारों और पड़ोसियों को प्रसाद बांटा और टफ्फू को श्रद्धांजलि दी.

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मेरठ में पालतू कुत्ते 'टफ्फू' की तेरहवीं (Photo- Screengrab)
मेरठ में पालतू कुत्ते 'टफ्फू' की तेरहवीं (Photo- Screengrab)

यूपी के मेरठ में 12 साल तक परिवार का हिस्सा रहे पालतू कुत्ते 'टफ्फू' की मौत के बाद परिवार ने इंसानों की तरह उसकी तेरहवीं की. इसके वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं. टफ्फू के जाने से परिवार इस कदर दुखी हुआ कि तीन दिन तक घर में खाना तक नहीं बना. बीते रविवार को परिवार ने घर में हवन कराया और रिश्तेदारों व पड़ोसियों को प्रसाद बांटा. तेरहवीं पर टफ्फू की तस्वीर लगाई गई और उसकी पसंद के लड्डू भी बनवाए गए.

मूल रूप से रायबरेली के रहने वाले सुनील यादव पिछले करीब 16 वर्षों से मेरठ में रह रहे हैं और डीएन इंटर कॉलेज में माली हैं. परिवार में उनकी पत्नी सुनीता, 18 वर्षीय बेटी वर्षा और 17 वर्षीय बेटा शिवम हैं. करीब 12 साल पहले डीएन कॉलेज में एक देसी नस्ल की डॉग ने बच्चे को जन्म दिया था. सुनील उस पिल्ले को अपने घर ले आए. बेटी वर्षा ने उसका नाम टफ्फू रखा. इसके बाद टफ्फू परिवार का अभिन्न हिस्सा बन गया.

वर्षा टफ्फू को अपना भाई मानती थी और हर रक्षाबंधन पर उसे राखी बांधती थी. इस बार भी उन्होंने टफ्फू को राखी बांधी थी. परिवार के मुताबिक, टफ्फू घर के हर सदस्य की आवाज पहचानता था और यह भी समझ जाता था कि कौन परिवार का सदस्य है और कौन बाहरी व्यक्ति. परिवार में किसी का जन्मदिन हो या कोई त्योहार, टफ्फू हर खुशी में शामिल रहता था. वर्षा कहती हैं कि उनके दो भाई हैं, एक टफ्फू और दूसरा शिवम. शिवम भी बचपन से टफ्फू के साथ बड़ा हुआ और दोनों ने करीब 12 साल साथ बिताए.

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शुक्रवार 11 सितंबर को अचानक टफ्फू की तबीयत बिगड़ गई. परिवार उसे डॉक्टर के पास लेकर गया. डॉक्टर ने दोबारा शाम को घर आने की बात कही थी, लेकिन इससे पहले ही टफ्फू ने दम तोड़ दिया. उसकी मौत की खबर से परिवार में मातम छा गया. परिजनों के अनुसार, तीन दिन तक घर में खाना तक नहीं बना. टफ्फू की कमी परिवार को लगातार महसूस हो रही है.

परिवार ने उसे सिर्फ पालतू जानवर नहीं, बल्कि घर का सदस्य माना. इसी वजह से उसकी मौत के बाद इंसानों की तरह तेरहवीं करने का फैसला लिया गया. रविवार को घर में हवन कराया गया. इसमें परिवार के साथ रिश्तेदार भी शामिल हुए. हवन के बाद पड़ोसियों और रिश्तेदारों को प्रसाद बांटा गया. टफ्फू की पसंद के लड्डू भी बनवाए गए और उसकी तस्वीर रखकर उसे याद किया गया.

टफ्फू की मौत के बाद परिवार ने उसे डीएन इंटर कॉलेज के ग्राउंड में दफना दिया. परिजनों का कहना है कि 12 साल तक घर की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा रहे टफ्फू के जाने के बाद घर का माहौल बदल गया है और उसकी कमी हर पल महसूस होती है.

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