यूक्रेन की 'सप्लाई लाइन' पर रूस का वार, ब्लैक सी के बंदरगाहों को बना रहा निशाना

मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच ब्लैक सी के बंदरगाह क्यों बने रूस की रणनीति का हिस्सा? क्योंकि इनसे जुड़ा है यूक्रेन का एक्सपोर्ट, इकोनॉमी और दुनिया का अनाज बाजार.

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रूस अब लगातार ब्लैक सी में मौजूद बंदरगाहों को निशाना बना रहा है ताकि यूक्रेन की सप्लाई लाइन काट सके. (Photo: ITG) रूस अब लगातार ब्लैक सी में मौजूद बंदरगाहों को निशाना बना रहा है ताकि यूक्रेन की सप्लाई लाइन काट सके. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 02 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 5:19 PM IST

यूक्रेन के ब्लैक सी पोर्ट्स इन दिनों रूस-यूक्रेन युद्ध का अहम हिस्सा बन गए हैं. ये पोर्ट सिर्फ सामान भेजने के रास्ते नहीं हैं, बल्कि यूक्रेन की अर्थव्यवस्था और अनाज व्यापार के लिए बेहद जरूरी हैं. यहां से गेहूं, मक्का, सूरजमुखी तेल और दूसरे कृषि उत्पाद दुनिया के कई देशों तक पहुंचते हैं.

इसी वजह से इन पोर्ट्स पर बढ़ते हमलों ने यूक्रेन की चिंता बढ़ा दी है. रूस ने यूक्रेन के ओडेसा समेत कई तटीय इलाकों में ड्रोन और मिसाइल हमले तेज किए हैं. इन हमलों का असर समुद्री व्यापार, अनाज निर्यात और यूक्रेन की कमाई पर पड़ रहा है.

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यूक्रेन के कुल सामान निर्यात में कृषि उत्पादों की हिस्सेदारी करीब 60 फीसदी है. ऐसे में अगर पोर्ट्स से सामान भेजने में परेशानी आती है तो इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. वहीं, हमलों के खतरे के कारण कई शिपिंग कंपनियां भी यूक्रेन के बंदरगाहों पर जाने से बच रही हैं.

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ब्लैक सी पोर्ट्स क्यों हैं इतने अहम?

यूक्रेन के ब्लैक सी पोर्ट्स देश के सबसे बड़े व्यापारिक रास्तों में शामिल हैं. यहां से बड़ी मात्रा में गेहूं, मक्का, सूरजमुखी तेल और दूसरे सामान दूसरे देशों में भेजे जाते हैं.

रूस इन पोर्ट्स पर दबाव बनाकर यूक्रेन के एक्सपोर्ट सिस्टम को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है. अगर समुद्री रास्तों से सामान भेजना मुश्किल होता है तो यूक्रेन की विदेशी कमाई कम हो सकती है और युद्ध के दौरान उसकी आर्थिक परेशानियां बढ़ सकती हैं.

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हमलों के बढ़ते खतरे के कारण जहाज कंपनियां भी सावधानी बरत रही हैं. रिपोर्ट के मुताबिक करीब 90 फीसदी जहाज ऑपरेटरों ने यूक्रेन के पोर्ट्स पर अपनी आवाजाही कम कर दी है. इसकी बड़ी वजह युद्ध का खतरा और बढ़ता बीमा खर्च है.

यूक्रेन के लिए एयर डिफेंस बड़ी चुनौती

यूक्रेन के सामने एक बड़ी समस्या मिसाइल हमलों से बचाव की है. रूस लगातार ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहा है. इन्हें रोकने के लिए यूक्रेन अमेरिकी पैट्रोइट एयर डिफेंस सिस्टम पर काफी निर्भर है, लेकिन इनकी संख्या सीमित है.

अगर यूक्रेन इन सिस्टम को पोर्ट्स की सुरक्षा में ज्यादा लगाता है तो दूसरे शहरों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है. यही वजह है कि यूक्रेन को कई जगहों पर सुरक्षा बनाए रखने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.

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दुनिया के अनाज बाजार पर असर

यूक्रेन दुनिया के बड़े अनाज निर्यातक देशों में शामिल है. उसके गेहूं और दूसरे कृषि उत्पादों की सप्लाई कई देशों की जरूरत पूरी करती है. यूक्रेन इजीप्ट की गेहूं जरूरत का करीब 25 फीसदी हिस्सा पूरा करता है. वहीं इंडोनेशिया भी यूक्रेन से गेहूं खरीदता है. इसके अलावा यूरोपीय संघ के लिए यूक्रेन मक्का का बड़ा सप्लायर है.

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अगर यूक्रेन का निर्यात लंबे समय तक प्रभावित रहता है तो इसका असर दुनिया के कुछ हिस्सों में अनाज की कीमतों पर पड़ सकता है.

2022 में संयुक्त राष्ट्र की मदद से रूस और यूक्रेन के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके बाद यूक्रेन के पोर्ट्स से अनाज भेजना आसान हुआ था. लेकिन अब उस व्यवस्था की वापसी मुश्किल नजर आ रही है. यूक्रेन फिलहाल रोमानिया के पोर्ट्स और रेल रास्तों का इस्तेमाल कर रहा है, लेकिन ये रास्ते समुद्री मार्गों की तुलना में ज्यादा महंगे और धीमे हैं.

रूस-यूक्रेन वॉर में ब्लैक सी पोर्ट्स अब सिर्फ व्यापार के रास्ते नहीं रह गए हैं, बल्कि रणनीतिक तौर पर भी बेहद महत्वपूर्ण बन चुके हैं. इन पर बढ़ते हमलों से यूक्रेन के एक्सपोर्ट, इकोनॉमी और अनाज सप्लाई पर दबाव बढ़ रहा है. आने वाले समय में इन पोर्ट्स की स्थिति युद्ध की दिशा और वैश्विक खाद्य सप्लाई दोनों पर असर डाल सकती है.

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