रूस ने एक दिन में यूक्रेन पर दागे 1567 ड्रोन, पूरे साल में हुए हमलों से ज्यादा

रूस ने यूक्रेन पर 24 घंटे में 1567 ड्रोन दागे. यह संख्या सितंबर 2022 से जुलाई 2023 के पूरे 11 महीनों में दागे गए ड्रोन से ज्यादा है. युद्ध की प्रकृति अब पूरी तरह बदल गई है.

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रूस के ड्रोन हमलों के बाद यूक्रेन की राजधानी कीव की ध्वस्त इमारत में बचाव कार्य करते राहतकर्मी. (Photo: Reuters) रूस के ड्रोन हमलों के बाद यूक्रेन की राजधानी कीव की ध्वस्त इमारत में बचाव कार्य करते राहतकर्मी. (Photo: Reuters)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 15 मई 2026,
  • अपडेटेड 12:33 PM IST

रूस ने यूक्रेन पर एक 24 घंटे में 1567 ड्रोन दाग दिए. यह संख्या इतनी बड़ी है कि इसे समझना मुश्किल है. यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने खुद यह आंकड़ा दिया. इस हमले में ड्रोन के साथ मिसाइलें भी शामिल थीं. रूस का टारगेट यूक्रेन की हवाई सुरक्षा को कमजोर करना, बिजली व्यवस्था को नष्ट करना. आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाना था. यह हमला हाल के सालों में सबसे भारी हमलों में से एक माना जा रहा है.

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इस हमले को समझने के लिए पुरानी तुलना देखते हैं. सितंबर 2022 से जुलाई 2023 तक के पहले 11 महीनों में रूस ने कुल मिलाकर जितने ड्रोन दागे, उससे भी ज्यादा ड्रोन उसने अब एक दिन में दाग दिए.  

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यह दिखाता है कि रूस अब ड्रोन बनाने और इस्तेमाल करने में बहुत आगे बढ़ चुका है. शुरुआती दिनों में रूस कुछ दर्जन ड्रोन भेजता था. अब सैकड़ों या हजारों ड्रोन एक साथ भेजे जा रहे हैं. इसका मकसद यूक्रेन की एयर डिफेंस सिस्टम को ओवरलोड करना है, ताकि कुछ ड्रोन बचकर अपने टारगेट तक पहुंच सकें.

युद्ध अब पहले जैसा नहीं रहा

2022 में जब युद्ध शुरू हुआ था तो यह मुख्य रूप से टैंकों, तोपों और सैनिकों की लड़ाई था. अब 2026 में यह पूरी तरह बदल चुका है. ड्रोन युद्ध का सबसे बड़ा हथियार बन गए हैं. दोनों तरफ सस्ते और बड़े पैमाने पर ड्रोन बनाए जा रहे हैं. रूस ईरान और चीन जैसी मदद से शाहेद जैसे ड्रोन बड़े पैमाने पर तैयार कर रहा है.

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एक दिन में 1567 ड्रोन दागना सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि युद्ध की रणनीति का बदलाव दिखाता है. रूस अब लगातार हमले कर यूक्रेन की अर्थव्यवस्था, बिजली प्लांट, रेलवे और शहरों को निशाना बना रहा है. इससे यूक्रेन की सेना और लोगों पर दबाव बहुत बढ़ गया है.

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हमले का असर - यूक्रेन की चुनौतियां

इस हमले में कई जगहों पर विस्फोट हुए. कीव समेत कई शहरों में हवाई सायरन बजे. यूक्रेन की एयर डिफेंस ने बहुत से ड्रोन गिराए, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में हमले रोकना आसान नहीं. नागरिकों की मौत और घायल होने की खबरें आईं. बिजली की लाइनें और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा.

यूक्रेन के पास अच्छी हवाई सुरक्षा है, लेकिन इतने सारे ड्रोन भेजकर रूस उसे थका रहा है. हर ड्रोन सस्ता होता है, लेकिन उसे गिराने के लिए महंगे मिसाइल इस्तेमाल करने पड़ते हैं. यह यूक्रेन के लिए महंगा साबित हो रहा है.

क्यों बढ़ रहे हैं ड्रोन हमले?

रूस अब ड्रोन उत्पादन बहुत तेज कर चुका है. पहले महीने में कुछ हजार ड्रोन बनते थे. अब संख्या बहुत बढ़ गई है. रूस दिन में भी ड्रोन हमले कर रहा है, जो पहले मुख्य रूप से रात में होते थे. इसका मकसद यूक्रेन को हर समय अलर्ट पर रखना और उसकी अर्थव्यवस्था को कमजोर करना है. दूसरी तरफ यूक्रेन भी अपने ड्रोन बना रहा है. रूस के अंदर हमले कर रहा है. लेकिन रूस की संख्या और संसाधन अभी ज्यादा हैं. 

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आगे क्या होगा?

यह हमला दिखाता है कि युद्ध लंबा खिंचने वाला है और ड्रोन इसकी दिशा बदल रही है. दोनों देश अब ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर और मिसाइलों पर ज्यादा जोर दे रहे हैं. यूक्रेन को अपनी हवाई सुरक्षा मजबूत करने और ज्यादा ड्रोन बनाने की जरूरत है.

दुनिया के लिए भी यह सबक है कि आधुनिक युद्ध में छोटे-छोटे ड्रोन कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं. 1567 ड्रोन एक दिन में दागना इस युद्ध को पहले से पूरी तरह अलग बना देता है. अब यह सिर्फ जमीन की लड़ाई नहीं, बल्कि आसमान की भी लड़ाई बन चुकी है.

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