हूतियों पर हमले के लिए PAK कौन सा फाइटर जेट इस्तेमाल कर रहा है? F-16 पर तो अमेरिका का प्रतिबंध है

पाकिस्तान हूतियों के खिलाफ अमेरिकी F-16 फाइटर जेट का इस्तेमाल नहीं कर सकता, क्योंकि उसपर प्रतिबंध है. लेकिन एक ऐसे देश का फाइटर जेट है, जिससे वो हमला कर सकता है.

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ये है पाकिस्तानी एयरफोर्स का JF-17 थंडर फाइटर जेट. (Photo: X/PAF) ये है पाकिस्तानी एयरफोर्स का JF-17 थंडर फाइटर जेट. (Photo: X/PAF)

ऋचीक मिश्रा

  • नई दिल्ली,
  • 09 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:45 PM IST

मिडिल ईस्ट में यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है. पाकिस्तान ने अपने चीन निर्मित JF-17 थंडर लड़ाकू विमानों को हूतियों के खिलाफ मिशन में शामिल कर लिया है. पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौते के तहत समर्थन कर रहा है. 

अगर ये रिपोर्ट्स सही हैं तो यह क्षेत्रीय संघर्ष में पाकिस्तान की भूमिका को नया रूप दे सकता है. JF-17 फाइटर जेट अमेरिकी F-16 की तरह प्रतिबंधों से मुक्त हैं इसलिए इन्हें आसानी से तैनात किया जा सकता है. सऊदी अरब अभी भी मुख्य हवाई समर्थन दे रहा है जिसमें करीब 100 जेट्स शामिल बताए जा रहे हैं. अब देखना ये है कि तुर्की और पाकिस्तान के और शामिल होने से हूती कितने समय तक टिक पाएंगे.

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JF-17 थंडर पाकिस्तान और चीन का संयुक्त उत्पादन है. यह विमान जमीनी ठिकानों पर बम, रॉकेट और निर्देशित हथियारों से हमला कर सकता है. नए ब्लॉक-3 वर्जन में AESA रडार लगा है जो सटीक हमलों के लिए बेहतर है. रिपोर्ट्स के अनुसार पाकिस्तान ने सऊदी अरब में JF-17 स्क्वॉड्रन तैनात किया है. 

ये विमान किंग अब्दुल अजीज एयर बेस जैसे स्थानों पर रखे गए हैं. अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण F-16 को कुछ इलाकों में इस्तेमाल करने पर पाबंदी होती है लेकिन JF-17 पर ऐसी कोई सीमा नहीं है. इसलिए पाकिस्तान इनका इस्तेमाल कर सकता है. 

पाकिस्तानी अधिकारियों ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि नहीं की है कि ये विमान हूतियों पर सीधे हमले कर रहे हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स में दावा किया गया था लेकिन पाकिस्तान के सूचना मंत्रालय ने इसे फर्जी और मनगढ़ंत बताया.

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सऊदी मिशन और सहयोगी देशों की भूमिका

सऊदी अरब यमन सरकार की मदद से हूतियों के खिलाफ जवाबी मिशन चला रहा है. हूती समूह सऊदी शहरों, हवाई अड्डों और तेल सुविधाओं पर मिसाइल व ड्रोन हमले कर रहे हैं. इन हमलों में जानें भी गई हैं. सऊदी के नेतृत्व में करीब 100 लड़ाकू विमान हवाई समर्थन दे रहे हैं. पाकिस्तान और तुर्की मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत सऊदी की मदद कर रहे हैं. इस समझौते में एक पर हमला सभी पर हमला माना जाता है. 

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने पुष्टि की है कि पाकिस्तानी फौज सऊदी में मौजूद है लेकिन उन्होंने इसे समर्थन वाली भूमिका बताया है. रक्षा मंत्री ने कहा कि लड़ाई मुख्य रूप से सऊदी सेना कर रही है जबकि पाकिस्तान और तुर्की टोही और सर्विलांस जैसी सहायता दे रहे हैं. पाकिस्तान पहले भी सऊदी में सैनिक तैनात कर चुका है लेकिन अब संघर्ष बढ़ने से दबाव बढ़ गया है

पाकिस्तान की संभावित भागीदारी क्षेत्रीय संतुलन को प्रभावित कर सकती है. पाकिस्तान ईरान से भी अच्छे संबंध रखता है और मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है. अगर वह सीधे हूतियों के खिलाफ कार्रवाई में शामिल होता है तो ईरान के साथ उसके संबंध प्रभावित हो सकते हैं. हूती समूह ईरान समर्थित माना जाता है. लाल सागर में नौवहन को बाधित करने की क्षमता रखता है. 

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सऊदी अरब तेल निर्यात और पवित्र स्थलों की सुरक्षा के लिए चिंतित है. अगर तुर्की और पाकिस्तान और ज्यादा सक्रिय होते हैं तो हूतियों पर दबाव बढ़ेगा. लेकिन जमीनी लड़ाई में शामिल होने से पाकिस्तान घरेलू विरोध का सामना कर सकता है जैसा 2015 में हुआ था जब संसद ने यमन में सैनिक भेजने से इनकार कर दिया था. अभी पाकिस्तान रक्षात्मक भूमिका पर जोर दे रहा है.

कितना टिकेंगे हूती?

हूती समूह कठिन इलाकों में लड़ने और मिसाइल-ड्रोन हमलों में माहिर हैं. सऊदी के बड़े हवाई मिशन के बावजूद वे हमले जारी रखे हुए हैं. पाकिस्तान के JF-17 जैसे विमान अगर सटीक हमले करते हैं तो हूती ठिकानों को नुकसान पहुंच सकता है. लेकिन लंबे संघर्ष में राजनीतिक और आर्थिक लागत भी आएगी. 

पाकिस्तान को भारत सीमा और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों का भी सामना है. सऊदी अरब फंडिंग कर रहा है लेकिन संघर्ष लंबा खिंचने से सभी पक्ष थक सकते हैं. पाकिस्तान आधिकारिक इनकार कर रहा है इसलिए स्थिति स्पष्ट नहीं है. फिर भी रक्षा समझौते के सक्रिय होने से मिडिल ईस्ट का सुरक्षा समीकरण बदल रहा है. हूती कितने समय तक टिक पाएंगे यह सहयोगियों की एकजुटता और कूटनीतिक प्रयासों पर निर्भर करेगा.

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