पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान कई भारतीय फाइटर जेट को मार गिराने का दावा किया था. इसकी जीत का जश्न भी मनाया. लेकिन बाद में सामने आई जानकारियों से पता चला कि ये दावे वास्तविक नहीं थे. असल में पाकिस्तान जिसे राफेल समझ रहा था, वो डिकॉय यानी नकली टारगेट थे.
भारतीय वायुसेना के राफेल विमान एक्स-गार्ड नामक टोड डिकॉय सिस्टम के साथ उड़ान भर रहे थे. यह इजरायली फाइबर-ऑप्टिक सिस्टम है जो राफेल के स्पेक्ट्रा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट का हिस्सा है. यह सिस्टम असली विमान की तरह व्यवहार करता है. रडार गाइडेड मिसाइलों को असली जेट से दूर खींच लेता है.
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एक्स-गार्ड एक हल्का सिस्टम है जो करीब 30 किलोग्राम वजन का होता है. इसे विमान से 100 मीटर लंबे फाइबर-ऑप्टिक केबल पर टो कर यानी खींचकर ले जाया जाता है. यह 500 वॉट की 360 डिग्री जैमिंग सिग्नल छोड़ता है जो असली राफेल के रडार क्रॉस सेक्शन और डॉपलर शिफ्ट की नकल करता है.
दुश्मन के रडार या मिसाइल सिस्टम को लगता है कि यही असली विमान है. जब पाकिस्तानी एयर डिफेंस सिस्टम या जेट लॉक करते हैं तो वे डिकॉय पर निशाना साधते हैं जबकि असली राफेल कहीं और सुरक्षित उड़ रहा होता है. यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सिग्नल को लगातार बदलता रहता है ताकि दुश्मन के सेंसर कन्फ्यूज रहें.
जेन्स डिफेंस वीकली की जांच और पाकिस्तानी रडार की गलती
जेन्स डिफेंस वीकली ने अपनी जांच में पाया कि पाकिस्तान के कई दावा किए गए हिट वास्तव में एक्स-गार्ड डिकॉय पर लगे थे न कि असली भारतीय जेट पर. पाकिस्तान के जे-10सी फाइटर्स पर लगे केएलजे-7ए एईएसए रडार भी डिकॉय को असली विमान समझ बैठे.
इन रडारों ने डिकॉय को लॉक किया और मिसाइलें उसी पर चली गईं. नतीजतन पाकिस्तान को लगा कि उसने भारतीय फाइटर्स मार गिराए हैं जबकि असल में उसके मिसाइल नकली टारगेट पर जाकर नष्ट हो गए. इसके बाद जीत का जश्न मनाया गया लेकिन वास्तविकता कुछ और थी.
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ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में भारत द्वारा पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर किए गए सटीक हमलों का नाम था. इसमें भारतीय राफेल विमानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. एक्स-गार्ड जैसे आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम ने दिखाया कि आज के हवाई युद्ध में सिर्फ मिसाइल और रडार ही नहीं बल्कि धोखाधड़ी और छलावा की तकनीक भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. यह सिस्टम विमान की सर्वाइवबिलिटी को काफी बढ़ा देता है. दुश्मन की महंगी मिसाइलें बेकार चली जाती हैं और असली प्लेटफॉर्म सुरक्षित रह जाता है.
दावों और हकीकत के बीच का अंतर
पाकिस्तान के दावों में असली समस्या यह थी कि उन्होंने डिकॉय को असली विमान मान लिया. आधुनिक युद्ध में इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर्स और डिकॉय सिस्टम बहुत प्रभावी साबित हो रहे हैं. भारत की तरफ से इस्तेमाल किया गया यह इजरायली सिस्टम स्पेक्ट्रा सूट के साथ मिलकर बहुस्तरीय सुरक्षा देता है.
विशेषज्ञों ने इसे बेहतरीन स्पूफिंग और डिसेप्शन का उदाहरण बताया. इससे साफ है कि सिर्फ किल क्लेम करने से जीत नहीं होती. वास्तविक सबूत और स्वतंत्र जांच ही सच सामने लाते हैं. यह घटना याद दिलाती है कि हवाई युद्ध अब सिर्फ गोलीबारी तक सीमित नहीं रहा. तकनीक, छलावा और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर निर्णायक भूमिका निभाते हैं. पाकिस्तान के जश्न के बावजूद जेन्स जैसी रिपोर्ट्स ने दिखाया कि कई क्लेम्ड किल्स वास्तव में डिकॉय पर आधारित थे. भारतीय राफेल सुरक्षित लौटे और मिशन पूरा किया.
ऋचीक मिश्रा