MQ-20 एवेंजर जनरल एटॉमिक्स द्वारा विकसित जेट इंजन वाला बिना पायलट वाला फाइटर जेट है. यह विमान 741 km/hr की गति से उड़ सकता है. 50,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंच सकता है. करीब 20 घंटे हवा में रह सकता है. अमेरिकी नौसेना ने इसे अपने भविष्य के कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के रूप में नहीं चुना है.
बल्कि यह ऑटोनॉमस, मिशन प्लानिंग और कमांड-कंट्रोल सिस्टम के विकास के लिए टेस्ट एयरक्राफ्ट यानी सरोगेट के रूप में काम कर रहा है. जनरल एटॉमिक्स के अनुसार यह भूमिका पिछले पांच साल से ज्यादा समय से निभा रहा है, भले ही नए खास बनाए गए डेमोंस्ट्रेटर विमान आ चुके हों.
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10 सितंबर को हुए ग्रे फ्लैग 2026 प्रदर्शन में अमेरिकी नौसेना की स्ट्राइक प्लानिंग एंड एग्जिक्यूशन सिस्टम्स टीम ने एक पूरा मिशन तैयार किया, उसे MQ-20 को भेजा और बाद में परिणामों की समीक्षा की. यह सिर्फ बिना पायलट के उड़ान भरने का परीक्षण नहीं था. असल चुनौती यह है कि कमांडर ऑटोनॉमस विमानों को बड़े युद्ध योजना का हिस्सा कैसे बनाएं.
सीएएमपी तकनीक क्यों खास है?
इस परीक्षण का मुख्य आधार कोलैबोरेटिव ऑटोनॉमी मिशन प्लानिंग यानी CAMP है. सीएएमपी योजना को अलग-अलग विमान के लिए लागू करने की भूमिका, कार्य, समय, अधिकार और सीमाओं में बदल देता है. ऑटोनॉमस सिस्टम को पता चल जाता है कि उसे क्या हासिल करना है और किन सीमाओं के अंदर रहना है.
अगर हर ऑटोनॉमस विमान के लिए लगातार एक ऑपरेटर उड़ान पथ नियंत्रित करे तो ज्यादा विमान तैनात करने पर कंट्रोलर, ग्राउंड स्टेशन और संचार क्षमता भी उतनी ही बढ़ानी पड़ेगी. इससे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की उपयोगिता सीमित हो जाती है. सीएएमपी एक अलग मॉडल पेश करता है.
ऑपरेटर मिशन के उद्देश्य, समय, अधिकार और पाबंदियां तय करते हैं. बाकी ऑटोनॉमस विमान खुद संभालता है. इससे ऑपरेटर का बोझ कम होता है और भविष्य में कई कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट को आसानी से शामिल किया जा सकता है.
बिगड़े संचार माहौल में भी काम करने की क्षमता
यह क्षमता विरोधी के जैमिंग या सैटेलाइट संचार बाधित होने पर भी महत्वपूर्ण है. अगर विमान को पहले से अपना मिशन, समय, इलाका और सीमाएं पता हों तो वह सीधा कंट्रोल टूटने पर अपना काम जारी रख सकता है.
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पहले नवंबर 2024 में अमेरिकी नौसेना ने पैटक्सेंट रिवर से कैलिफोर्निया में उड़ रहे MQ-20 को लो-अर्थ-ऑर्बिट सैटेलाइट के जरिए नियंत्रित किया था. वह लंबी दूरी के कमांड-कंट्रोल का परीक्षण था. ग्रे फ्लैग 2026 मिशन स्तर की ऑटोनॉमस की ओर बढ़ता है.
MQ-20 परिपक्व जेट पावर्ड प्लेटफॉर्म है. इस पर नए सॉफ्टवेयर, ऑटोनॉमस फंक्शन और संचार आर्किटेक्चर का परीक्षण आसानी से हो सकता है. इसकी गति, उड़ान अवधि और मिशन सिस्टम असल युद्ध विमान के करीब हैं. जनवरी 2026 में जनरल एटॉमिक्स ने बताया कि एवेंजर ने सरकारी रेफरेंस ऑटोनॉमी सॉफ्टवेयर के साथ क्रूड एग्रेसर विमान के खिलाफ लाइव ऑटोनॉमस इंटरसेप्ट भी किया.
ऑनबोर्ड सेंसर से खुद से फैसले लिए. इससे भविष्य के कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट के लिए जरूरी सॉफ्टवेयर विकसित करने में मदद मिल रही है. सीएएमपी की असली ताकत इंटरऑपरेबिलिटी में है. भविष्य में ऑटोनॉमस विमान, हथियार और अन्य सिस्टम एक नेटवर्क में जुड़ेंगे. यह ऑटोनॉमस विमान, हथियार और अन्य नेटवर्क्ड सिस्टम को एक ही मिशन उद्देश्य के इर्द-गिर्द कॉर्डिनेट करने में मदद कर सकता है.
ऋचीक मिश्रा