अमेरिका के सबसे आधुनिक स्टील्थ फाइटर जेट F35 फाइटर जेट के कुछ पुर्जे हांग कांग पहुंच गए हैं. यह खबर बुधवार को सामने आई. पेंटागन और F35 फाइटर जेट जॉइंट प्रोग्राम ऑफिस ने स्वीकार किया कि शिपमेंट में समस्या हुई है. वे अमेरिकी अधिकारियों और इंडस्ट्री पार्टनर्स के साथ इन पुर्जों को वापस लाने, घटना की जांच करने और भविष्य में ऐसी गलती रोकने के उपाय करने में लगे हैं.
ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने मंगलवार को पुष्टि की कि पुर्जे हांगकांग पहुंचे, लेकिन उन्होंने जोर दिया कि ये संवेदनशील उपकरण नहीं हैं. ऑस्ट्रेलिया उन देशों में शामिल है जो इस विमान का इस्तेमाल करते हैं. मार्ल्स ने कहा कि अमेरिका और लॉकहीड मार्टिन के साथ मिलकर काम हो रहा है. इस मामले को मुख्य रूप से वे ही संभालेंगे.
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ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार चीन के पास F35 फाइटर जेट के दो मुख्य पुर्जे- कॉकपिट कैनोपी और वेपन्स-बे डोर पहुंच गए हैं. ये पुर्जे कई महीने पहले ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका मरम्मत या निपटान के लिए जा रहे थे, लेकिन रास्ते में अप्रत्याशित रूप से हांग कांग भटक गए. कैसे भटके, यह अभी स्पष्ट नहीं है.
पोलिटिको ने पहले बताया था कि इस घटना ने कांग्रेस में पूछताछ शुरू कर दी क्योंकि चिंता है कि चीन को हाइली क्लाइसीफाइड तकनीक के महत्वपूर्ण हिस्सों तक पहुंच मिल सकती है.
F35 फाइटर जेट क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
F35 फाइटर जेट लाइटनिंग II को पांचवीं पीढ़ी का फाइटर कहा जाता है. लगभग 20 साल पहले टेक्सास की असेंबली लाइन से पहला विमान निकला था. अब तक 1200 से ज्यादा विमान बने हैं. 19 देशों ने ऑर्डर दिए हैं. यह विमान स्टील्थ कोटिंग्स, एडवांस रडार, सेंसर और नेटवर्किंग क्षमताओं से लैस है. यह दुश्मनों को बेहतर पहचान सकता है. सहयोगी विमानों तथा जमीनी बलों से संपर्क बनाए रख सकता है.
फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के ब्रैडली बोमन के अनुसार यह अमेरिका का सबसे अच्छा और एडवांस फाइटर जेट है. अमेरिकी सैन्य प्रणालियां लगातार अपडेट होती रहती हैं, इसलिए पुरानी चोरी की गई जानकारी भी पूरी तरह उपयोगी नहीं रहती.
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फिर भी विशेषज्ञ चिंतित हैं क्योंकि हांग कांग पर बीजिंग का कड़ा नियंत्रण है. 1997 में ब्रिटिश शासन से लौटने के बाद हांगकांग अपनी सेना या कूटनीति नहीं रख सकता. इसलिए पुर्जे हांगकांग पहुंचने का मतलब लगभग सीधे चीन की पहुंच माना जा रहा है.
पिछले खतरे और मौजूदा जोखिम
चीन के पास पहले से ही कुछ जानकारी हो सकती है. 2013 में डिफेंस साइंस बोर्ड की रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि चीनी साइबर हमलों ने पेंटागन के दर्जनों कार्यक्रमों का डेटा चुराया, जिसमें जॉइंट स्ट्राइक फाइटर भी शामिल था. हालांकि वह जानकारी कई साल पुरानी है. नया मामला भौतिक पुर्जों का है.
कॉकपिट कैनोपी विमान की स्टील्थ और पायलट सुरक्षा से जुड़ी होती है. वेपन्स-बे डोर हथियार रखने और छोड़ने की प्रणाली का हिस्सा है. भले ही अधिकारी इन्हें 'संवेदनशील' न कहें, लेकिन किसी भी एडवांस विमान के पुर्जे विश्लेषण के लिए मूल्यवान हो सकते हैं. चीन इनकी स्टडी करके अपने विमानों में सुधार या काउंटर-मेजर्स विकसित कर सकता है.
शिपमेंट कैसे भटका, यह सवाल सबसे बड़ा है. सामान्य रूप से सैन्य पुर्जों की सप्लाई चेन बहुत सख्त नियंत्रण में रहती है. ऑस्ट्रेलिया से अमेरिका का रास्ता लंबा है. कई जगहों से गुजरता है. किसी गलती, गलत लेबलिंग या जानबूझकर किए गए हस्तक्षेप की संभावना जांच का विषय है. लॉकहीड मार्टिन ने अभी तक टिप्पणी नहीं की.
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चीनी दूतावास और हांगकांग व्यापार कार्यालय से भी जवाब नहीं मिला. दिलचस्प बात यह है कि यह खबर उस समय आई जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से राज्य यात्रा के लिए वाशिंगटन पहुंचे.
अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और आगे की राह
यह घटना सिर्फ अमेरिका-चीन तनाव नहीं बढ़ाती. ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगी देशों की सप्लाई चेन सुरक्षा पर भी सवाल उठते हैं. F35 फाइटर जेट कई देशों में साझा कार्यक्रम है. अगर पुर्जे आसानी से गलत जगह पहुंच सकते हैं तो अन्य सहयोगियों के बीच भरोसा प्रभावित हो सकता है. पेंटागन अब सुरक्षा उपाय मजबूत करने की बात कर रहा है.
भविष्य में शिपमेंट ट्रैकिंग, दोहरी जांच और संवेदनशील पुर्जों के लिए अलग प्रोटोकॉल अपनाए जा सकते हैं. विश्लेषकों का कहना है कि भौतिक पुर्जे मिलने से चीन को डिजाइन समझने, सामग्री का अध्ययन करने या कमजोरियों का पता लगाने में मदद मिल सकती है.
आधुनिक विमानों में सॉफ्टवेयर, सेंसर फ्यूजन और निरंतर अपडेट इतने महत्वपूर्ण हैं कि केवल दो पुर्जों से पूरा रहस्य नहीं खुलता. फिर भी किसी भी लीकेज को गंभीरता से लिया जाता है क्योंकि यह दुश्मन को सीखने का मौका देता है.
कुल मिलाकर यह मामला सैन्य तकनीक की सुरक्षा, वैश्विक सप्लाई चेन की कमजोरियों और अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता को एक साथ रेखांकित करता है. जांच पूरी होने तक पूरी तस्वीर सामने नहीं आएगी, लेकिन पेंटागन और सहयोगी देश पहले से ही नुकसान सीमित करने और भविष्य की घटनाएं रोकने पर ध्यान दे रहे हैं. F35 फाइटर जेट जैसे कार्यक्रमों में पारदर्शिता और सुरक्षा का संतुलन बनाए रखना अब और ज्यादा जरूरी हो गया है.
ऋचीक मिश्रा