15 अगस्त समारोह में राष्ट्रगान से पहले वंदे मातरम, Gen Z और युवा शक्ति पर फोकस

80वें स्वतंत्रता दिवस पर युवा शक्ति और Gen Z को केंद्र में रखा गया है. वंदे मातरम राष्ट्रगान से पहले गाया जाएगा. ओलंपियाड विजेताओं सहित युवा उपलब्धियों का सम्मान होगा.

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लाल किले पर खड़े डिफेंस फोर्सेस के जवान. स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियां चल रही हैं. (Photo: PTI) लाल किले पर खड़े डिफेंस फोर्सेस के जवान. स्वतंत्रता दिवस समारोह की तैयारियां चल रही हैं. (Photo: PTI)

शिवानी शर्मा / मंजीत नेगी

  • नई दिल्ली,
  • 10 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:42 PM IST

भारत इस वर्ष अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस धूमधाम से मनाएगा. लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र को संबोधित करेंगे. राष्ट्रीय ध्वज फहराएंगे. इस बार समारोह का मुख्य फोकस 'युवा शक्ति' पर रखा गया है. सरकार युवा पीढ़ी खासकर Gen Z की उपलब्धियों, आकांक्षाओं और योगदान को केंद्र में रखकर विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ने का संदेश देना चाहती है. साथ ही वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने का भी विशेष महत्व है.

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इस वर्ष के समारोह की सबसे खास बात यह है कि लाल किले की प्राचीर से पहले वंदे मातरम गाया जाएगा और उसके बाद राष्ट्रगान. यह व्यवस्था पहली बार अपनाई जा रही है. वंदे मातरम को स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक माना जाता है.

इसके 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इसे इतना महत्व देना ऐतिहासिक है. रक्षा सचिव आर.के. सिंह ने इस विशेष व्यवस्था की जानकारी दी है. यह कदम राष्ट्रभक्ति की भावना को और मजबूत करेगा तथा युवाओं में देशप्रेम का संचार करेगा.

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युवा उपलब्धियों को मिलेगा केंद्र स्थान

सरकार ने युवा उपलब्धियों को विशेष रूप से सम्मानित करने की योजना बनाई है. अंतरराष्ट्रीय भौतिकी, रसायन, जीव विज्ञान और गणित ओलंपियाड 2026 में पदक जीतने वाले 19 छात्रों को लाल किले की प्राचीर पर बैठाया जाएगा और सम्मानित किया जाएगा.

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इसके अलावा युवा इनोवेटर्स, प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के लाभार्थी, स्टार्टअप संस्थापक, पीएम कौशल विकास योजना के लाभार्थी, स्टार्टअप इंडिया सीड फंड से जुड़े उद्यमी और माय भारत स्वयंसेवक भी विशेष अतिथि के रूप में शामिल होंगे.

दिल्ली सरकार के स्कूलों के वे छात्र भी आमंत्रित हैं जिन्होंने विभिन्न क्विज और प्रतियोगिताओं में चयन हासिल किया है. यह कदम युवाओं को प्रोत्साहित करने और उन्हें राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनाने का स्पष्ट संदेश देता है. जेन जी को केंद्र में रखकर सरकार यह दिखाना चाहती है कि देश का भविष्य युवाओं के हाथ में है.

विकसित भारत @2047 और सेवा तीर्थ का संदेश

समारोह में विकसित भारत@2047 की यात्रा को भी प्रमुखता दी जाएगी. गार्ड ऑफ ऑनर क्षेत्र में परमाणु तकनीक, अंतरिक्ष और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की प्रगति को दर्शाने वाले विजुअल एलिमेंट्स लगाए जाएंगे. निमंत्रण पत्र पर भी सेवा तीर्थ को प्रमुखता से जगह दी गई है. यह सरकार की जनसेवा की संस्थागत दृष्टि और विकसित भारत के लक्ष्य को रेखांकित करता है.

सेवा तीर्थ का जिक्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सार्वजनिक सेवा को नए आयाम देने की दिशा में सरकार के प्रयासों को दर्शाता है. युवाओं को न सिर्फ उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया जा रहा है बल्कि उन्हें सेवा भाव से जोड़ने का प्रयास भी दिख रहा है.

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इस वर्ष बैठने के बाड़ों के नाम भारत की प्रमुख झीलों पर रखे गए हैं. इससे पहले गणतंत्र दिवस पर नदियों के नाम रखे गए थे. यह जल संरक्षण पर फोकस जारी रखने का संकेत है. विपक्ष के नेता को हर साल की तरह आमंत्रित किया जाएगा. बैठने की व्यवस्था तालिका ऑफ प्रीसीडेंस के अनुसार सख्ती से की जाएगी. झीलों के नामकरण से पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी जाता है जो युवाओं के लिए प्रासंगिक है.

युवा शक्ति पर फोकस का महत्व

80वें स्वतंत्रता दिवस पर युवा शक्ति को इतना महत्व देना समय की मांग है. भारत की आबादी का बड़ा हिस्सा युवा है और Gen Z तकनीक, इनोवेशन और सामाजिक बदलाव का नेतृत्व कर रहा है. ओलंपियाड विजेताओं से लेकर स्टार्टअप संस्थापकों तक को मंच देकर सरकार यह संदेश दे रही है कि मेधा और उद्यमिता दोनों को सम्मान मिलना चाहिए.

वंदे मातरम को राष्ट्रीय गान से पहले स्थान देना सांस्कृतिक और ऐतिहासिक गौरव को जोड़ता है. यह स्वतंत्रता संग्राम की यादों को ताजा करता है और नई पीढ़ी को उससे जोड़ता है. समग्र रूप से यह समारोह सिर्फ औपचारिकता नहीं बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाला अवसर बनने जा रहा है.

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लाल किले से दिया जाने वाला संदेश युवाओं को प्रेरित करेगा और देश को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ाने में मददगार साबित होगा. 15 अगस्त 2026 का यह समारोह युवा ऊर्जा, राष्ट्रभक्ति और प्रगति का संगम बनने वाला है.

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